मुजफ्फरनगर। यूपी ग्रामीण बैंक की बुढ़ाना शाखा में बचत और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) खातों से कथित तौर पर रकम निकाले जाने का मामला सामने आया है। शनिवार को करीब 25 खाताधारकों ने बैंक पहुंचकर लगभग ₹1 करोड़ की हेराफेरी का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई। शिकायतों के बाद बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय ने प्रारंभिक जांच कराई, जिसमें खातों में गड़बड़ी की पुष्टि होने की बात सामने आई है। इसके बाद हाल में दूसरी शाखा में स्थानांतरित किए गए पूर्व शाखा प्रबंधक समेत दो कर्मचारियों के निलंबन की संस्तुति लखनऊ स्थित बैंक मुख्यालय को भेजी गई है।
मामला उस समय सामने आया जब बुढ़ाना शाखा में नए प्रबंधक के कार्यभार संभालने के बाद अलग-अलग गांवों के खाताधारकों ने अपने खातों से अनधिकृत निकासी की शिकायत की। बड़कता, नगवा, बड़ौदा और बुढ़ाना क्षेत्र के ग्राहकों ने बैंक अधिकारियों को बताया कि उनके बचत खातों से ऑनलाइन लेनदेन के जरिए रकम निकाली गई है। कुछ खाताधारकों ने किसान क्रेडिट कार्ड खातों में भी रकम कम होने की शिकायत की।
शिकायतों की संख्या बढ़ने पर बैंक के मुजफ्फरनगर क्षेत्रीय कार्यालय को इसकी जानकारी दी गई। क्षेत्रीय प्रबंधन ने मामले की जांच के लिए उप क्षेत्रीय प्रबंधक के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम को बुढ़ाना भेजा। टीम में आईटी और ऑडिट से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हैं। टीम ने खातों में हुए लेनदेन, डिजिटल प्रविष्टियों और बैंकिंग रिकॉर्ड की प्रारंभिक पड़ताल शुरू की है।
बैंक अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में कुछ खातों में अनियमित लेनदेन और रिकॉर्ड से संबंधित गड़बड़ियां सामने आई हैं। इसके आधार पर हाल ही में अलमासपुर शाखा में स्थानांतरित किए गए पूर्व शाखा प्रबंधक और एक अन्य कर्मचारी के खिलाफ निलंबन की संस्तुति मुख्यालय को भेजी गई है। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले किसी कर्मचारी की व्यक्तिगत भूमिका या जिम्मेदारी को अंतिम रूप से तय नहीं किया गया है।
क्षेत्रीय प्रबंधन के अनुसार, फिलहाल करीब ₹1 करोड़ की हेराफेरी का आरोप खाताधारकों की शिकायतों के आधार पर सामने आया है। वास्तविक वित्तीय नुकसान कितना हुआ, इसका निर्धारण विस्तृत ऑडिट और सभी संबंधित खातों की जांच पूरी होने के बाद ही किया जा सकेगा। बैंक इस बात की भी जांच कर रहा है कि अनधिकृत लेनदेन किस तरीके से किए गए और रकम किन खातों या माध्यमों में स्थानांतरित हुई।
जांच में शाखा के सभी कर्मचारियों को दायरे में रखा गया है। बैंक रिकॉर्ड, कंप्यूटर प्रणाली, लॉगिन गतिविधियों और लेनदेन से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान यदि किसी अन्य कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
खाताधारकों की शिकायतों में बचत खातों के साथ-साथ केसीसी खातों से रकम गायब होने का मुद्दा भी प्रमुख है। बैंक यह पता लगाने में जुटा है कि क्या दोनों तरह के खातों में हुई कथित अनधिकृत निकासी का तरीका एक जैसा था या अलग-अलग माध्यमों का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा पुराने और नए लेनदेन का मिलान कर संदिग्ध प्रविष्टियों की पहचान की जा रही है।
बैंक अधिकारियों ने संकेत दिया है कि विस्तृत जांच आगे बढ़ने पर शिकायतों की संख्या बढ़ सकती है। ऐसे में शाखा के खातों और पिछले लेनदेन की व्यापक स्तर पर जांच की जा रही है, ताकि किसी भी अन्य प्रभावित ग्राहक का पता लगाया जा सके।
बैंक प्रबंधन की ओर से मुख्यालय को प्रारंभिक रिपोर्ट भेजे जाने के बाद अब निलंबन की संस्तुति और विस्तृत ऑडिट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। जांच टीम कथित वित्तीय अनियमितताओं की अवधि, रकम के वास्तविक नुकसान, डिजिटल लेनदेन के तरीके और इसमें शामिल संभावित लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। बैंक अधिकारियों के अनुसार, विस्तृत ऑडिट पूरा होने के बाद ही गबन की वास्तविक राशि और जिम्मेदारी की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
