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Policy Watch

टाटा संस में चंद्रशेखरन की तीसरी पारी पर विवाद, नोएल टाटा के रुख से बढ़ी कानूनी चुनौती की संभावना

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksSeptember 20, 2026No Comments3 Mins Read
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टाटा संस बोर्ड ने 4:1 के मत से एन चंद्रशेखरन के अगले पांच साल के कार्यकाल को मंजूरी दी; टाटा ट्रस्ट्स ने नामित निदेशकों के वीटो अधिकार और मतदान प्रक्रिया को लेकर उठाए सवाल
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नई दिल्ली। टाटा संस में एन चंद्रशेखरन के कार्यकारी चेयरमैन के तौर पर तीसरे कार्यकाल को लेकर टाटा ट्रस्ट्स और कंपनी के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। 17 सितंबर को टाटा संस के बोर्ड ने 4:1 के मत से चंद्रशेखरन के पांच साल के नए कार्यकाल के प्रस्ताव को मंजूरी दी। बैठक में विरोध का एकमात्र मत टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा की ओर से आया। मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होना है।
टाटा संस में करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला टाटा ट्रस्ट्स अब इस फैसले को कानूनी चुनौती देने के विकल्प पर विचार कर रहा है। मामले में वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी के जुड़ने के बाद विवाद के अदालत तक पहुंचने की संभावना और बढ़ गई है। सिंघवी ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए टाटा विवाद में अपनी भूमिका की जानकारी दी। हालांकि, टाटा ट्रस्ट्स की ओर से इस मामले पर अभी कोई औपचारिक सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।
सिंघवी ने अपने बयान में शेयरधारकों के अधिकारों और कंपनी के संचालन में कॉरपोरेट प्रशासन से जुड़े सवाल उठाए। उनका कहना है कि शेयरधारक-मालिकों के अधिकारों को कमजोर करने से बड़ी कंपनियों में कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े गंभीर प्रश्न पैदा हो सकते हैं। उन्होंने टाटा ट्रस्ट्स के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया और बैठक बुलाने से संबंधित अधिकारों पर भी सवाल उठाए हैं।
विवाद का एक प्रमुख बिंदु टाटा संस के एसोसिएशन ऑफ आर्टिकल्स यानी AoA में शामिल प्रावधान हैं। नोएल टाटा ने बोर्ड बैठक के दौरान और उसके बाद नामित निदेशकों के वीटो अधिकार तथा निर्णायक मत से संबंधित नियमों के कथित उल्लंघन का मुद्दा उठाया। उनका रुख है कि इन प्रावधानों को नजरअंदाज कर बोर्ड का निर्णय लेना कंपनी के आंतरिक शासन ढांचे से जुड़े सवाल खड़े करता है।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

टाटा ट्रस्ट्स ने मामले में भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ से कानूनी राय भी ली थी। दूसरी ओर, टाटा संस ने वरिष्ठ वकीलों सुदीप्तो सरकार और बी. एन. श्रीकृष्ण समेत अन्य कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ली। दोनों पक्षों को मिली कानूनी राय में AoA की अलग-अलग धाराओं की व्याख्या अलग तरीके से की गई है। यही अंतर अब विवाद के कानूनी पहलू को महत्वपूर्ण बना रहा है।
टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच संबंधों का इतिहास एक सदी से अधिक पुराना है। ट्रस्ट्स टाटा संस का सबसे बड़ा शेयरधारक है और समूह की होल्डिंग कंपनी में इसकी हिस्सेदारी के कारण उसके अधिकार और भूमिका लंबे समय से कॉरपोरेट प्रशासन के केंद्र में रहे हैं। मौजूदा विवाद में इसी हिस्सेदारी के साथ जुड़े अधिकारों और बोर्ड के फैसले लेने की प्रक्रिया की व्याख्या महत्वपूर्ण हो गई है।
नोएल टाटा टाटा संस के बोर्ड में ट्रस्ट्स की ओर से नामित निदेशकों में शामिल हैं। 17 सितंबर की बैठक में उनके अकेले विरोध के बावजूद प्रस्ताव को 4:1 के बहुमत से मंजूरी मिली। इससे यह सवाल भी सामने आया है कि AoA के तहत नामित निदेशकों के अधिकारों की सीमा क्या है और क्या कुछ परिस्थितियों में ट्रस्ट्स की सहमति या वीटो आवश्यक है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने में कुछ महीने बाकी हैं। बोर्ड की मंजूरी के बाद उनका अगला कार्यकाल तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है, लेकिन यदि टाटा ट्रस्ट्स कानूनी रास्ता अपनाता है तो नियुक्ति से जुड़े AoA प्रावधान और शेयरधारक अधिकार अदालत के विचार का विषय बन सकते हैं। फिलहाल अंतिम कानूनी कदम और उसकी समयसीमा स्पष्ट नहीं है।
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