देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित एक अर्बन कोऑपरेटिव बैंक में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर जमाकर्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। जमाकर्ताओं का दावा है कि नियामकीय पाबंदियों के कारण बैंक में जमा करीब ₹124 करोड़ की राशि तक उनकी पहुंच प्रभावित हुई है। मुख्यमंत्री ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को मामले में तत्काल कार्रवाई और उच्चस्तरीय जांच की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
करीब 50 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री आवास पर मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में सामाजिक कल्याण मंत्री खजान दास के साथ जमाकर्ताओं के अधिकृत प्रतिनिधि और प्रभावित खाताधारक भी शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बैंक की मौजूदा वित्तीय स्थिति और जमाकर्ताओं के सामने पैदा हुई समस्याओं से अवगत कराया।
जमाकर्ताओं की ओर से आरोप लगाया गया कि लोगों ने अपनी जीवनभर की बचत बैंक में इस भरोसे के साथ जमा की थी कि यह एक सुरक्षित और विनियमित वित्तीय संस्थान है। उनका कहना है कि बैंक के संचालन पर लागू नियामकीय प्रतिबंधों के बाद बड़ी संख्या में खाताधारक अपनी जमा राशि का इस्तेमाल या निकासी नहीं कर पा रहे हैं। फरवरी 2026 में भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से बैंक पर छह महीने की पाबंदियां लगाए जाने और खाताधारकों की निकासी पर रोक की जानकारी सामने आई थी।
प्रतिनिधिमंडल ने मामले को केवल बैंक की वित्तीय कमजोरी का परिणाम मानने के बजाय लंबे समय से चली आ रही कथित वित्तीय अनियमितताओं से जोड़ते हुए जांच की मांग की। जमाकर्ताओं ने बैंक के अध्यक्ष, निदेशक मंडल, प्रबंधन और कर्मचारियों की भूमिका की व्यापक जांच की मांग रखी है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र जांच अभी बाकी है और किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी जांच के निष्कर्ष के बाद ही तय हो सकेगी।
जमाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि वर्ष 1998 से बैंक के अध्यक्ष पद पर एक ही परिवार का प्रभाव बना रहा। उनका दावा है कि बाद में परिवार के भीतर ही नेतृत्व का हस्तांतरण हुआ। प्रतिनिधिमंडल ने बैंक के निदेशक मंडल में कथित रिश्तेदारी और प्रभाव की भी जांच कराने की मांग की है। जमाकर्ताओं के अनुसार, यह देखा जाना चाहिए कि बोर्ड में नियुक्तियों और बैंक के संचालन में किसी प्रकार का हितों का टकराव या नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ।
प्रतिनिधिमंडल ने बैंक के पिछले वर्षों के लेखापरीक्षण को लेकर भी सवाल उठाए। जमाकर्ताओं का कहना है कि वर्ष 2012-13 से 2025-26 के बीच भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नियुक्त लेखापरीक्षकों की निगरानी और ऑडिट के बावजूद कथित अनियमितताएं लंबे समय तक सामने नहीं आ सकीं। उन्होंने इसकी भी जांच की मांग की है कि बैंक की वित्तीय स्थिति में कथित गिरावट के संकेत समय रहते क्यों नहीं पकड़े गए।
इसके अलावा कर्मचारियों की नियुक्ति और वेतन को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं। जमाकर्ताओं ने दावा किया कि बैंक में निर्धारित पात्रता मानकों की अनदेखी करते हुए कुछ लोगों को नियुक्त किया गया और उन्हें अपेक्षाकृत अधिक वेतन दिया गया। प्रतिनिधिमंडल ने इन नियुक्तियों की प्रक्रिया, पात्रता और संबंधित लोगों के बैंक प्रबंधन से संबंधों की भी जांच कराने की मांग की।
इससे पहले बैंक की वित्तीय स्थिति को लेकर सामने आई जानकारी में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों और फंसे हुए कर्ज को लेकर भी सवाल उठे थे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, बैंक में करीब नौ हजार खाताधारकों की ₹124 करोड़ से अधिक की जमा राशि प्रभावित हुई थी। बैंक के ऋणों और वित्तीय प्रावधानों को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।
जमाकर्ताओं की शिकायत पर मुख्यमंत्री ने गढ़वाल रेंज के पुलिस महानिरीक्षक और देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों के अनुसार, आरोपों की जांच के लिए उच्चस्तरीय जांच की प्रक्रिया शुरू की जाएगी और मामले से जुड़े तथ्यों, बैंक के वित्तीय रिकॉर्ड तथा प्रबंधन की भूमिका की जांच की जाएगी।
जांच का एक प्रमुख पहलू यह भी होगा कि बैंक की वित्तीय स्थिति बिगड़ने के पीछे वास्तविक कारण क्या थे और क्या किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन या आपराधिक कृत्य हुआ। अधिकारियों के मुताबिक जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। जमाकर्ताओं ने इस प्रक्रिया के साथ अपनी जमा राशि तक पहुंच बहाल कराने और उनकी वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
