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Home»PEOPLE»मीडिया पर ट्रंप का हमला तेज, आलोचनात्मक खबरों को बताया ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा’; विवाद पहुंचा अदालत
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मीडिया पर ट्रंप का हमला तेज, आलोचनात्मक खबरों को बताया ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा’; विवाद पहुंचा अदालत

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksSeptember 21, 2026No Comments3 Mins Read
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सीएनएन, एमएस नाउ और पोलिटिको ने व्हाइट हाउस की पाबंदियों को दी चुनौती; पत्रकारों को उचित नोटिस और प्रक्रिया के बिना प्रवेश से रोकने का आरोप, संघीय अदालत से अस्थायी राहत की मांग
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वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और कई प्रमुख मीडिया संस्थानों के बीच विवाद सोमवार को और बढ़ गया। ट्रंप ने अपने प्रशासन की आलोचनात्मक रिपोर्टिंग करने वाले समाचार संगठनों पर तीखा हमला बोला, वहीं तीन मीडिया संस्थानों ने व्हाइट हाउस में अपने पत्रकारों की पहुंच पर लगाई गई पाबंदियों को अदालत में चुनौती दी है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर कुछ मीडिया संस्थानों को ‘फेक न्यूज’ फैलाने वाला बताते हुए उनकी रिपोर्टिंग को ‘कैंसर’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की खबरें अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं और इन्हें तत्काल रोका जाना चाहिए।
ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब सीएनएन, एमएस नाउ और पोलिटिको ने व्हाइट हाउस प्रशासन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की है। तीनों संस्थानों ने अपने पत्रकारों की व्हाइट हाउस परिसर तक पहुंच रोकने और उनके प्रेस क्रेडेंशियल वापस लिए जाने के फैसले को चुनौती दी है।

मीडिया संस्थानों पर क्यों लगी पाबंदी?

ट्रंप प्रशासन ने 18 सितंबर को सीएनएन, एमएस नाउ और पोलिटिको पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया था। इसके बाद इन संस्थानों के पत्रकारों को व्हाइट हाउस परिसर में प्रवेश से रोक दिया गया और उनके प्रेस क्रेडेंशियल वापस ले लिए गए।
प्रशासन ने इस कार्रवाई को इन संस्थानों की ट्रंप और उनके प्रशासन से जुड़ी रिपोर्टिंग से जोड़ा है। ट्रंप लंबे समय से उन समाचार संगठनों की आलोचना करते रहे हैं, जिनकी रिपोर्टिंग उनके मुताबिक उनके प्रशासन के खिलाफ या प्रतिकूल रही है। उन्होंने ऐसे संस्थानों पर गलत या भ्रामक जानकारी प्रकाशित करने का आरोप लगाया है।
ट्रंप ने यह संकेत भी दिया है कि भविष्य में अन्य मीडिया संस्थानों के खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई की जा सकती है। इस घटनाक्रम ने व्हाइट हाउस और मीडिया के संबंधों के साथ-साथ सरकारी परिसरों में पत्रकारों की पहुंच को लेकर कानूनी और संवैधानिक सवाल खड़े कर दिए हैं।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

मीडिया संस्थानों ने अदालत में क्या कहा?

सीएनएन, एमएस नाउ और पोलिटिको ने सोमवार को ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर करने की जानकारी दी। इन संस्थानों का आरोप है कि व्हाइट हाउस ने उनके पत्रकारों की पहुंच रोकने से पहले पर्याप्त नोटिस या उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया।
मीडिया संस्थानों का तर्क है कि इस तरह की पाबंदियां अमेरिकी संविधान के प्रथम संशोधन में प्रेस की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े अधिकारों को प्रभावित करती हैं। उनका कहना है कि प्रशासन किसी समाचार संस्थान की रिपोर्टिंग के आधार पर उसके पत्रकारों की सरकारी परिसर तक पहुंच सीमित नहीं कर सकता।
तीनों संस्थानों ने वॉशिंगटन डीसी की संघीय अदालत से अस्थायी राहत की मांग की है, ताकि उनके पत्रकारों की व्हाइट हाउस तक पहुंच बहाल की जा सके। मामले में इसी सप्ताह शुरुआती सुनवाई होने की संभावना है।

अदालत के सामने अब क्या सवाल?

कानूनी चुनौती के बाद विवाद अब न्यायपालिका के सामने पहुंच गया है। अदालत को प्रशासन की ओर से पाबंदियां लगाने के लिए दिए गए कारणों और मीडिया संस्थानों की ओर से उठाए गए संवैधानिक सवालों पर विचार करना होगा।
मामले का एक प्रमुख सवाल यह होगा कि पत्रकारों की पहुंच प्रतिबंधित करते समय ट्रंप प्रशासन ने आवश्यक कानूनी और प्रक्रियात्मक मानकों का पालन किया था या नहीं। अदालत प्रतिबंधों की परिस्थितियों, प्रशासन के औचित्य और मीडिया संस्थानों के प्रथम संशोधन से जुड़े दावों की जांच कर सकती है।
ट्रंप और अमेरिकी मीडिया के एक वर्ग के बीच पहले से जारी तनाव के बीच यह विवाद प्रेस की स्वतंत्रता और व्हाइट हाउस तक पत्रकारों की पहुंच को लेकर व्यापक बहस को भी प्रभावित कर सकता है। हालांकि, मामले का अंतिम परिणाम अदालत के समक्ष पेश किए गए तथ्यों, कानूनी दलीलों और न्यायिक निष्कर्षों पर निर्भर करेगा।
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