बेंगलुरु। गूगल ने भारत में बाल यौन शोषण सामग्री से जुड़े मामलों की रिपोर्ट सीधे भारतीय अधिकारियों को देने पर सहमति जताई है। यह कदम उस वैश्विक व्यवस्था में बदलाव है, जिसके तहत ऐसी सामग्री की रिपोर्ट पहले अमेरिका की एक गैर-लाभकारी संस्था को भेजी जाती थी और वहां से संबंधित देश की कानून प्रवर्तन एजेंसियों तक पहुंचाई जाती थी।
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार और बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों के बीच बाल यौन शोषण सामग्री की पहचान और रिपोर्टिंग को लेकर चर्चा तेज हुई है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारतीय अधिकारियों ने हाल के सप्ताहों में गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों के सामने यह मुद्दा उठाया था कि भारत से संबंधित मामलों की सूचना सीधे देश की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को दी जानी चाहिए।
गूगल के एक प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी बाल यौन शोषण सामग्री का पता लगाने, उसे रोकने, हटाने और रिपोर्ट करने के लिए बड़े स्तर पर निवेश करती है। कंपनी ने इस प्रस्ताव को भारत सरकार के साथ चल रही बातचीत का हिस्सा बताया है।
भारत गूगल और मेटा दोनों के लिए उपयोगकर्ताओं की संख्या के लिहाज से सबसे बड़े बाजारों में शामिल है। इससे पहले मेटा ने भी भारत से जुड़े बाल यौन शोषण सामग्री के मामलों की रिपोर्टिंग व्यवस्था में बदलाव की घोषणा की थी। यह घटनाक्रम भारतीय सरकार और प्रौद्योगिकी कंपनियों के बीच इस मुद्दे पर कई सप्ताह से चल रही बातचीत के बाद सामने आया है।
अब तक गूगल और मेटा जैसी कंपनियां ऐसी रिपोर्ट अमेरिका स्थित नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रेन को भेजती रही हैं। यह संस्था रिपोर्ट को उस देश की कानून प्रवर्तन एजेंसी तक पहुंचाती है, जहां कथित अपराध से संबंधित सामग्री या गतिविधि पाई जाती है।
भारतीय अधिकारियों की मुख्य चिंता यह रही है कि इस बीच एक अतिरिक्त स्तर जुड़ने से रिपोर्ट संबंधित भारतीय पुलिस या अन्य एजेंसियों तक पहुंचने में समय लग सकता है। अधिकारियों के अनुसार, ऐसे मामलों में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है, खासकर तब जब किसी बच्चे के तत्काल खतरे में होने की आशंका हो।
बाल यौन शोषण सामग्री दुनियाभर में गंभीर और बढ़ती समस्या बनी हुई है। अमेरिका स्थित संबंधित संस्था के साइबरटिपलाइन मंच पर 2025 में दुनियाभर से बच्चों के यौन शोषण और शोषण की आशंका से जुड़ी 2.13 करोड़ से अधिक रिपोर्ट दर्ज हुई थीं। इन आंकड़ों में अलग-अलग प्रकार की संदिग्ध सामग्री और गतिविधियों से संबंधित रिपोर्ट शामिल हैं।
अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी तथा कानून प्रवर्तन से जुड़े अधिकारी भी ऑनलाइन मंचों से ऐसी सामग्री का तेजी से पता लगाने और तत्काल रिपोर्ट करने की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर देते रहे हैं। हालांकि, अधिकांश देश अब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिपोर्टों के आदान-प्रदान के लिए अमेरिका स्थित गैर-लाभकारी संस्था की व्यवस्था का इस्तेमाल करते हैं।
भारत में सीधे रिपोर्टिंग की दिशा में यह बदलाव जांच एजेंसियों को कथित बाल यौन शोषण सामग्री से जुड़े मामलों में तेजी से कार्रवाई करने में मदद कर सकता है। साथ ही, कंपनियों को सामग्री की पहचान, रिपोर्टिंग और स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय के लिए अपनी प्रक्रियाओं में बदलाव करना होगा।
बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों में नई व्यवस्था किस रूप में लागू होगी और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया में क्या तकनीकी बदलाव किए जाएंगे, इस पर सरकार और कंपनियों के बीच बातचीत जारी है। गूगल ने भी इसे भारत सरकार के साथ चल रही चर्चा का हिस्सा बताया है।
