अटलांटा। अमेरिका के जॉर्जिया राज्य से रिपब्लिकन सांसद रिच मैककॉर्मिक ने अटलांटा महानगर क्षेत्र और आसपास के इलाकों में H-1B वीजा के कथित बड़े पैमाने पर दुरुपयोग और धोखाधड़ी की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों को कई बार पत्र और संदेश भेजकर मामले की जांच शुरू करने का आग्रह किया है। उनकी यह मांग ऐसे समय सामने आई है, जब अमेरिकी प्रशासन देशभर में वीजा धोखाधड़ी और आव्रजन नियमों के कथित उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई तेज कर रहा है।
मैककॉर्मिक ने आरोप लगाया कि H-1B कार्यक्रम का इस्तेमाल कुछ नियोक्ताओं और अन्य पक्षों द्वारा विदेशी कर्मचारियों से कम वेतन पर काम कराने और उनकी रोजगार संबंधी निर्भरता का फायदा उठाने के लिए किया जा सकता है। उनका कहना है कि H-1B वीजा धारकों की अमेरिका में कानूनी स्थिति उनके रोजगार से जुड़ी होती है। ऐसे में कुछ नियोक्ता कथित तौर पर कम वेतन और प्रतिकूल कामकाजी परिस्थितियों का लाभ उठा सकते हैं।
सांसद ने सोशल मीडिया पर कहा कि कुछ लोगों ने H-1B वीजा और आवश्यक कार्य अनुमति हासिल करने के लिए कथित तौर पर ऐसे अवैध तरीके विकसित किए हैं, जिनका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। उनके मुताबिक, नियमों का केवल न्यूनतम अनुपालन दिखाकर धोखाधड़ी और विदेशी कर्मचारियों के कथित शोषण से आर्थिक लाभ हासिल किया जा सकता है।
मैककॉर्मिक की जांच की मांग अमेरिकी प्रशासन की व्यापक वीजा कार्रवाई की पृष्ठभूमि में आई है। ट्रंप प्रशासन ने जुलाई में देशभर में वीजा धोखाधड़ी की जांच पर जोर दिया था। इसके बाद अमेरिकी अधिकारियों ने अलग-अलग शहरों में कंपनियों और H-1B आवेदनों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच शुरू की।
अगस्त में टेक्सास के डलास में अमेरिकी श्रम विभाग के जांचकर्ताओं ने उन कंपनियों की जांच की थी, जिनके पास बड़ी संख्या में H-1B आवेदन स्वीकृत थे। महानिरीक्षक कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, जांच के दौरान कई ऐसी निष्क्रिय कंपनियां सामने आई थीं, जिनके नाम पर 500 से अधिक H-1B आवेदन स्वीकृत थे। इसके बाद H-1B कार्यक्रम में फर्जी या निष्क्रिय कंपनियों के इस्तेमाल को लेकर सवाल और गंभीर हुए।
अब मैककॉर्मिक की मांग के बाद अटलांटा महानगर क्षेत्र में भी H-1B वीजा से जुड़े नियोक्ताओं और मामलों की जांच की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, अटलांटा में कथित बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
H-1B कार्यक्रम को लेकर ट्रंप प्रशासन के भीतर भी लगातार कड़ा रुख सामने आया है। 2 अक्टूबर को उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोशल मीडिया पर H-1B व्यवस्था को ‘पूरी तरह खराब’ बताते हुए इसके इस्तेमाल को खत्म करने का समर्थन करने की बात कही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यक्रम का इस्तेमाल कुछ कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कम वेतन वाले विदेशी कर्मचारियों को रखने के लिए कर रही हैं।
वेंस ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी अमेरिकी कर्मचारी को सालाना 60,000 डॉलर वेतन मिलता है और उसकी जगह 45,000 डॉलर वेतन वाले विदेशी कर्मचारी को रखा जाता है, तो यह उस कार्यक्रम के मूल उद्देश्य के अनुरूप नहीं है। उन्होंने ऐसे इस्तेमाल को अमेरिकी नौकरियों को नुकसान पहुंचाने और अमेरिकी लोगों के साथ धोखाधड़ी के रूप में बताया।
H-1B वीजा अमेरिका में विशेष कौशल वाले विदेशी कर्मचारियों को रोजगार देने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला प्रमुख वीजा कार्यक्रम है। तकनीकी, इंजीनियरिंग, वित्त और अन्य पेशेवर क्षेत्रों में अमेरिकी कंपनियां इसका इस्तेमाल करती हैं। हालांकि, कार्यक्रम के तहत वेतन, नौकरी, नियोक्ता और कार्यस्थल से जुड़े नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर समय-समय पर जांच और विवाद सामने आते रहे हैं।
अटलांटा में जांच की मांग इसी व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है। फिलहाल सांसद द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच होना बाकी है और किसी कंपनी या वीजा धारक के खिलाफ दोष साबित नहीं हुआ है। आगे अमेरिकी प्रशासन की जांच से यह स्पष्ट होगा कि अटलांटा क्षेत्र में H-1B वीजा से जुड़ी कथित अनियमितताओं का दायरा कितना बड़ा है और क्या नियमों के उल्लंघन के ठोस मामले सामने आते हैं।
