भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP वृद्धि का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया है। इससे संकेत मिलता है कि महंगाई और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद केंद्रीय बैंक को भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर पहले से अधिक भरोसा है। RBI को उम्मीद है कि घरेलू खपत, निवेश और सेवा क्षेत्र आर्थिक वृद्धि को सहारा देंगे। हालांकि कमजोर मानसून, अल नीनो की स्थिति और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव अर्थव्यवस्था के लिए प्रमुख जोखिम बने हुए हैं।
RBI के अनुसार, चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद देश में आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं। लोगों की खपत ने आर्थिक वृद्धि को सहारा दिया है, जबकि शुद्ध निर्यात का योगदान भी सकारात्मक रहा है। घरेलू खपत बढ़ने से वस्तुओं और सेवाओं की मांग बनी रहती है, जिससे कारोबार को गति मिलती है। वहीं संयंत्र, मशीनरी और अन्य स्थायी परिसंपत्तियों में निवेश भविष्य में उत्पादन बढ़ाने की क्षमता तैयार करता है। केंद्रीय बैंक को खपत और निवेश, दोनों से आर्थिक वृद्धि को समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है।
दूसरी तिमाही के अनुमान में सबसे बड़ी बढ़ोतरी
पूरे वित्त वर्ष के वृद्धि अनुमान में बढ़ोतरी के पीछे दूसरी तिमाही की बेहतर तस्वीर अहम है। RBI ने जुलाई-सितंबर 2026 की GDP वृद्धि का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7.2% कर दिया है। यानी अनुमान में 0.8 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की गई है।
अक्टूबर-दिसंबर 2026 की तीसरी तिमाही के लिए GDP वृद्धि का अनुमान भी 6.5% से बढ़ाकर 6.9% किया गया है। जनवरी-मार्च 2027 की चौथी तिमाही का अनुमान 6.8% पर बरकरार रखा गया है। हालांकि अप्रैल-जून 2027 यानी वित्त वर्ष 2027-28 की पहली तिमाही का अनुमान 7.3% से घटाकर 7.1% कर दिया गया है।
इन संशोधनों से संकेत मिलता है कि RBI को मौजूदा वित्त वर्ष में पहले के अनुमान की तुलना में बेहतर आर्थिक वृद्धि की उम्मीद है। हालांकि हर तिमाही के अनुमान में बढ़ोतरी नहीं की गई है। ये अनुमान हैं और वास्तविक GDP आंकड़े सामने आने के बाद तस्वीर बदल सकती है।
आर्थिक गतिविधियां मजबूत, लेकिन पहली तिमाही से रफ्तार कुछ धीमी
RBI के मुताबिक, तेजी से उपलब्ध होने वाले आर्थिक आंकड़े बताते हैं कि दूसरी तिमाही में आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी रहीं, हालांकि पहली तिमाही की तुलना में रफ्तार कुछ धीमी हुई है। विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) विस्तार के दायरे में बने रहे, जो कारोबारी गतिविधियों में निरंतर वृद्धि का संकेत है।
सेवा क्षेत्र की गतिविधियां स्थिर बनी हुई हैं और कई क्षेत्रों में इसका विस्तार जारी है। स्थायी निवेश भी मजबूत रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि कंपनियां मशीनरी, संयंत्र और अन्य लंबे समय तक इस्तेमाल होने वाली परिसंपत्तियों पर निवेश कर रही हैं।
शहरी मांग को सहारा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर मौसम का जोखिम
RBI को उम्मीद है कि सेवा क्षेत्र की गतिविधियां और रोजगार की मोटे तौर पर स्थिर स्थिति शहरी मांग को सहारा देंगी। हालांकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए मौसम से जुड़ी अनिश्चितता बनी हुई है।
कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून और मजबूत अल नीनो परिस्थितियां आगामी रबी सीजन को प्रभावित कर सकती हैं। फसलों पर असर पड़ने की स्थिति में ग्रामीण आय और खपत पर दबाव बढ़ सकता है। कुछ क्षेत्रों में कमजोरी पहले से दिखाई दे रही है, जिनमें तेजी से खपत होने वाली वस्तुओं की कुछ श्रेणियां और घरेलू यात्री परिवहन शामिल हैं।
सेवा निर्यात से भी वृद्धि को उम्मीद
RBI को सेवा निर्यात के मजबूत बने रहने की उम्मीद है। हाल में हुए द्विपक्षीय समझौते भी निर्यात को अतिरिक्त सहारा दे सकते हैं। इससे घरेलू मांग के साथ विदेशी मांग भी आर्थिक वृद्धि में योगदान दे सकती है।
महंगाई बनी बड़ी चुनौती
GDP वृद्धि के अनुमान में बढ़ोतरी के साथ RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई का अनुमान भी 5% से बढ़ाकर 5.2% कर दिया है। CPI महंगाई आम उपभोक्ताओं द्वारा खरीदी जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बदलाव को दर्शाती है।
दूसरी तिमाही के लिए महंगाई का अनुमान 4.7% से बढ़ाकर 4.9% किया गया है। तीसरी तिमाही का अनुमान 5.9% से बढ़ाकर 6% और चौथी तिमाही का अनुमान 5.5% से बढ़ाकर 5.7% किया गया है। अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के लिए महंगाई का अनुमान 5.3% से बढ़ाकर 5.6% किया गया है। कोर महंगाई 4.4% रहने का अनुमान है।
RBI के अनुसार कमजोर मानसून, अल नीनो और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव महंगाई पर दबाव बनाए रख सकते हैं। ऐसे में भारतीय अर्थव्यवस्था की आगे की वृद्धि इस बात पर निर्भर करेगी कि महंगाई, मौसम और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच घरेलू खपत और निवेश की रफ्तार कितनी मजबूत बनी रहती है।
