ज्ञानपुर (भदोही)। उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में कोडीनयुक्त कफ सिरप के कथित अवैध कारोबार के मामले में पुलिस और विशेष जांच दल (एसआईटी) ने सात फर्मों के संचालकों के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल कर दिया है। मामले में दो आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि फरार चल रहे पांच अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी पर ₹25-25 हजार का इनाम घोषित है।
प्राथमिकी के अनुसार, वाराणसी निवासी शुभम जायसवाल से जुड़ी रांची की फर्म शैली ट्रेडर्स के माध्यम से जिले की सात फर्मों ने कथित तौर पर ₹10 करोड़ से अधिक का अवैध कारोबार किया था। जांच के दौरान पुलिस को ₹12 करोड़ से अधिक के संदिग्ध लेनदेन और फर्जी ई-वे बिल तैयार किए जाने के मामले भी सामने आए।
लखनऊ से मिली सूचना के बाद दर्ज हुई प्राथमिकी
मामले का खुलासा 18 नवंबर 2025 को लखनऊ से मिली गोपनीय सूचना के बाद हुआ था। इसके आधार पर औषधि निरीक्षक कुमार सौमित्र ने चौरी, औराई और भदोही थानों में सात फर्मों के संचालकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
जांच के दौरान पुलिस ने विभिन्न दवा कंपनियों के बीच हुए लेनदेन, परिवहन संबंधी दस्तावेजों और अन्य अभिलेखों की पड़ताल की। जांच का उद्देश्य कथित अवैध खरीद, वितरण और बिक्री में शामिल फर्मों की भूमिका का पता लगाना था। इसके साथ ही अलग-अलग जिलों में कफ सिरप की खेप की आवाजाही और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की भी जांच की गई।
दो गिरफ्तार, पांच आरोपी अब भी फरार
विवेचना के दौरान पुलिस ने सबसे पहले फरवरी में पूर्णा फार्मा के संचालक शैलेंद्र तिवारी को गिरफ्तार किया था। उन्हें औराई में माधोसिंह रेलवे स्टेशन के पास से पकड़ा गया था। शैलेंद्र तिवारी वाराणसी के भिखारीदास लेन स्थित भारतेंदु भवन के निवासी हैं।
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में ₹12 करोड़ से अधिक के कथित फर्जी लेनदेन और फर्जी ई-वे बिल तैयार करने की जानकारी सामने आई। इसके बाद पुलिस ने 13 अप्रैल को चौरी के मानिकपुर से विजय गुप्ता को गिरफ्तार किया।
मामले में पांच अन्य आरोपी अब भी फरार हैं। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक ने उनकी गिरफ्तारी पर ₹25-25 हजार का इनाम घोषित किया था। पुलिस फरार आरोपियों की तलाश कर रही है और मामले में उनकी कथित भूमिका से जुड़े साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
दो महीने में चार लाख से अधिक शीशियों की बिक्री
जांच में सामने आया कि सातों फर्मों के माध्यम से जिले में कोडीनयुक्त कफ सिरप की चार लाख से अधिक शीशियों की कथित तौर पर खरीद-बिक्री की गई थी। बताया गया कि यह पूरा स्टॉक महज दो महीने के भीतर बेच दिया गया।
जांच में अलग-अलग जिलों की दवा फर्मों के बीच हुए बड़े लेनदेन का भी पता चला। आजमगढ़ की एक फर्म से कथित तौर पर 1.65 लाख शीशियां खरीदी गई थीं, जबकि सोनभद्र की एक फर्म को एक लाख शीशियों की आपूर्ति किए जाने की जानकारी सामने आई। इसके अलावा वाराणसी की पूर्णा फार्मा से भी करीब एक लाख शीशियां खरीदे जाने की बात जांच में सामने आई।
पुलिस इन लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों और आपूर्ति शृंखला की पड़ताल कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कफ सिरप की खरीद, परिवहन और बिक्री किस तरह की गई थी। इतनी बड़ी मात्रा में दवा की कथित बिक्री मामले की जांच का प्रमुख हिस्सा है।
वैज्ञानिक और दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ दाखिल हुई चार्जशीट
पुलिस अधीक्षक शुभम अग्रवाल ने बताया कि मामले की विस्तृत विवेचना पूरी कर ली गई है और करीब 15 दिन पहले न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल कर दिया गया था।
पुलिस ने आरोपपत्र के साथ कई वैज्ञानिक और दस्तावेजी साक्ष्य भी प्रस्तुत किए हैं। इनमें जब्त किए गए कथित फर्जी ई-वे बिल, बैंक स्टेटमेंट, नकदी जमा करने की पर्चियां, बैंक के सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) शामिल हैं।
इसके अलावा बरामद कोडीनयुक्त कफ सिरप की फॉरेंसिक प्रयोगशाला की रिपोर्ट भी साक्ष्यों में शामिल की गई है। औषधि निरीक्षक, एबॉट और अन्य दवा कंपनियों की आधिकारिक रिपोर्ट भी न्यायालय में पेश की गई हैं।
इन दस्तावेजों के माध्यम से पुलिस कथित वित्तीय अनियमितताओं, फर्मों के बीच हुए लेनदेन और कफ सिरप की आपूर्ति से संबंधित तथ्यों को न्यायालय के समक्ष रखने की तैयारी कर चुकी है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।
इन सात फर्मों के संचालकों पर आरोप
मामले में नामजद सात फर्में और उनके संचालक हैं:
1. मेसर्स राजेंद्र एंड संस, स्टेशन रोड, परसीपुर, चौरी — संचालक अंशिका गुप्ता, निवासी गोला दीनानाथ, वाराणसी।
2. दिलीप मेडिकल स्टोर, आजाद नगर — संचालक दिलीप कुमार।
3. गुरुदेव मेडिकल एजेंसी, अमवा कला, चौरी — संचालक अमन कुमार, निवासी जगतगंज, वाराणसी कैंट।
4. ओपी फार्मा, महाराजगंज, तिउरी, औराई — संचालक ओम प्रकाश कसेरा, निवासी पियरी कला, वाराणसी।
5. मेसर्स महेंद्र मेडिकल एजेंसी, मर्यादपट्टी — संचालक संजीव गुप्ता।
6. पूर्णा फार्मा — संचालक शैलेंद्र तिवारी, निवासी भिखारीदास लेन, भारतेंदु भवन, वाराणसी।
7. चौरी स्थित एक फर्म — संचालक विजय गुप्ता।
पुलिस के अनुसार, फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए प्रयास जारी हैं। जांच में सामने आए वित्तीय लेनदेन और आपूर्ति संबंधी तथ्यों के आधार पर मामले की आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आरोपपत्र दाखिल होने के बाद अब मामले की सुनवाई न्यायालय में होगी।
