वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में कपसेठी थाना पुलिस ने मोबाइल तस्करी के एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बरकी पेट्रोल पंप के पास बंद पड़े चंदन ढाबे पर खड़े एक डीसीएम वाहन की तलाशी में 2,570 मोबाइल फोन और विभिन्न दूरसंचार कंपनियों के 113 सक्रिय सिम कार्ड बरामद किए। पकड़े गए सभी आरोपी पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के निवासी हैं। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी गांवों और कस्बों में घूमकर बर्तनों के बदले पुराने और खराब मोबाइल फोन इकट्ठा करते थे। इसके बाद इन मोबाइलों को पश्चिम बंगाल ले जाकर बेचने की तैयारी थी।
मुखबिर की सूचना पर डीसीएम की तलाशी
पुलिस के मुताबिक, क्षेत्र में चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने और संदिग्ध वाहनों तथा व्यक्तियों की जांच के दौरान मुखबिर से एक डीसीएम में बड़ी संख्या में संदिग्ध मोबाइल फोन लदे होने की सूचना मिली थी। वाहन को बरकी पेट्रोल पंप के पास खड़े बंद ढाबे के निकट देखा गया था। सूचना की गंभीरता को देखते हुए कपसेठी थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और डीसीएम की तलाशी ली।
तलाशी के दौरान वाहन से कुल 2,570 मोबाइल फोन बरामद हुए। इनमें 345 एंड्रॉयड स्मार्टफोन और 2,225 कीपैड मोबाइल शामिल हैं। इसके अलावा विभिन्न दूरसंचार कंपनियों के 113 सक्रिय सिम कार्ड भी मिले। आरोपियों के पास से ₹2,149 नकद बरामद किए गए। इतनी बड़ी संख्या में मोबाइल फोन मिलने के बाद पुलिस ने मौके पर मौजूद पांच लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। बाद में सभी को गिरफ्तार कर लिया गया।
मुर्शिदाबाद के रहने वाले हैं पांचों आरोपी
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बाबुर अली, मंटू खां, नारजूल शेख, लालबाबू शेख और मिलन शेख के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, पांचों पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के निवासी हैं। मामले में आरोपियों की भूमिका, मोबाइल फोन की खरीद और उनके परिवहन से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है।
पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बरामद मोबाइल फोन किन लोगों से जुटाए गए थे और उन्हें पश्चिम बंगाल में कहां बेचा जाना था। इतनी बड़ी खेप मिलने के बाद मोबाइलों के स्रोत और उनके स्वामित्व से संबंधित जानकारी जुटाना भी जांच का अहम हिस्सा है।
फेरीवाले बनकर गांवों में जुटाते थे मोबाइल
पूछताछ में आरोपियों की कथित कार्यप्रणाली सामने आई है। अपर पुलिस उपायुक्त, गोमती जोन के अनुसार, आरोपी और उनके साथी फेरीवाले बनकर गांवों तथा कस्बों में घूमते थे। वे ग्रामीणों को स्टील और अन्य घरेलू बर्तनों के बदले पुराने या खराब मोबाइल फोन देने के लिए तैयार करते थे। इस तरीके से वे बड़ी संख्या में इस्तेमाल किए जा चुके मोबाइल फोन इकट्ठा कर लेते थे।
इसके बाद इन मोबाइलों को डीसीएम वाहन के जरिये पश्चिम बंगाल ले जाया जाता था, जहां उन्हें ऊंचे दामों पर बेचने की योजना थी। पुलिस की पूछताछ में यह भी सामने आया कि कथित तौर पर इसी डीसीएम वाहन से पहले दो बार मोबाइल फोन की खेप पश्चिम बंगाल भेजी जा चुकी थी। इस बार तीसरी खेप ले जाने की तैयारी थी, लेकिन पुलिस की कार्रवाई में वाहन समेत मोबाइल फोन बरामद कर लिए गए।
पुलिस टीम को ₹25 हजार का पुरस्कार
अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करने और बड़ी संख्या में मोबाइल फोन बरामद करने वाली पुलिस टीम की सफलता पर डीसीपी, गोमती जोन ने ₹25,000 नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है। कपसेठी थाना पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ संबंधित कानूनी धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
पुलिस अब बरामद मोबाइल फोन और सिम कार्डों की भी जांच कर रही है। जांच का एक प्रमुख पहलू यह पता लगाना है कि इनका इस्तेमाल किसी आपराधिक गतिविधि या साइबर धोखाधड़ी के नेटवर्क में तो नहीं किया गया। हालांकि, बरामद मोबाइल फोन और सिम कार्डों के किसी साइबर अपराध से जुड़े होने की अभी पुष्टि नहीं हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही इनके वास्तविक स्रोत, इस्तेमाल और संभावित खरीदारों के बारे में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
