नई दिल्ली। भारत के कर अधिकारियों ने शराब कारोबार की प्रमुख कंपनियों पर्नो रिकार्ड और डियाजियो के खिलाफ जांच शुरू की है। जांच इस बात पर केंद्रित है कि क्या दोनों कंपनियों ने भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते के तहत कम आयात शुल्क का लाभ लेने के लिए बल्क स्कॉच व्हिस्की के आयात का गलत वर्गीकरण किया। अधिकारियों को संदेह है कि कंपनियों ने आयातित उत्पादों की श्रेणी के संबंध में ऐसी घोषणा की, जिसके आधार पर उन्हें कम शुल्क का लाभ मिल सकता था। हालांकि, अभी तक किसी कंपनी के खिलाफ कर नियमों के उल्लंघन की अंतिम पुष्टि नहीं हुई है।
यह मामला भारत और ब्रिटेन के बीच हुए व्यापार समझौते के तहत स्कॉच व्हिस्की पर आयात शुल्क में कटौती के बाद सामने आया है। समझौता 15 जुलाई से लागू हुआ, जिसके तहत कुछ स्कॉच उत्पादों पर आयात शुल्क 150 प्रतिशत से घटाकर 75 प्रतिशत किया गया। लेकिन कर अधिकारियों का तर्क है कि यह रियायती दर बल्क स्कॉच कंसंट्रेट पर लागू नहीं होती। जांच का मुख्य उद्देश्य यह निर्धारित करना है कि कंपनियों द्वारा आयात किए गए उत्पाद शुल्क में कटौती के लिए निर्धारित शर्तों के दायरे में आते हैं या नहीं।
पर्नो रिकार्ड के कार्यालय में अधिकारियों की पूछताछ
मामले से परिचित सूत्रों के मुताबिक, पिछले सप्ताह कर अधिकारियों ने नई दिल्ली के निकट स्थित पर्नो रिकार्ड के भारतीय मुख्यालय का दौरा किया। इस दौरान कंपनी के अधिकारियों से स्कॉच व्हिस्की के आयात से संबंधित सवाल पूछे गए और बल्क आयात से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने यह पता लगाने की कोशिश की कि आयातित उत्पादों को किस श्रेणी में घोषित किया गया था और क्या उन पर लागू शुल्क की गणना सही तरीके से की गई।
सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को कंपनी के कार्यालय में दस्तावेजों की जांच की थी। इसके बाद कंपनी से दोबारा संपर्क किए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि, जांच की विस्तृत स्थिति और अधिकारियों द्वारा मांगे गए दस्तावेजों का पूरा ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया है।
डियाजियो की भारतीय इकाई यूनाइटेड स्पिरिट्स ने भी पिछले सप्ताह शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया था कि शुक्रवार को विभिन्न स्थानों पर उसके कार्यालयों की तलाशी ली गई। कंपनी ने इसे अधिकारियों की ओर से की जा रही उद्योगव्यापी कार्रवाई का हिस्सा बताया। हालांकि, कंपनी की ओर से जारी सूचना में तलाशी का विशिष्ट कारण नहीं बताया गया था। मामले से परिचित सूत्रों ने संकेत दिया कि डियाजियो के कुछ स्कॉच आयातों के वर्गीकरण की भी जांच की जा रही है।
दोनों कंपनियों ने जांच में सहयोग की बात कही
पर्नो रिकार्ड ने कहा है कि वह राजस्व खुफिया निदेशालय के साथ सहयोग कर रही है और अधिकारियों की ओर से मांगी गई सभी जानकारियां उपलब्ध करा रही है। कंपनी ने यह भी कहा कि वह अधिकारियों द्वारा उठाए गए सवालों का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
डियाजियो ने भी भारतीय अधिकारियों के साथ सहयोग करने की बात कही है। कंपनी के अनुसार, उसने हमेशा स्थानीय कानूनों का पालन किया है। यूनाइटेड स्पिरिट्स ने अपने शेयर बाजार संबंधी खुलासे में कहा कि उसने अधिकारियों को मांगे गए दस्तावेज और स्पष्टीकरण उपलब्ध करा दिए हैं।
भारत में आयातित वस्तुओं के वर्गीकरण और सीमा शुल्क के भुगतान को लेकर विदेशी कंपनियों तथा कर अधिकारियों के बीच पहले भी विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों में कभी-कभी आयात के कई वर्ष बाद अतिरिक्त कर भुगतान की मांग की जाती है। सैमसंग, एलजी और फॉक्सवैगन जैसी कंपनियां भी अलग-अलग समय पर आयात वर्गीकरण और कर संबंधी विवादों का सामना कर चुकी हैं।
स्कॉच पर शुल्क घटने से बाजार में बदली स्थिति
पर्नो रिकार्ड फ्रांस की कंपनी है, जबकि डियाजियो ब्रिटेन की प्रमुख शराब निर्माता कंपनी है। दोनों भारतीय शराब बाजार में बड़ी हिस्सेदारी रखती हैं। इन कंपनियों द्वारा आयात किए जाने वाले बल्क स्कॉच कंसंट्रेट को अन्य सामग्री के साथ मिलाकर विभिन्न शराब ब्रांड तैयार किए जाते हैं। इनमें रॉयल स्टैग, ब्लेंडर्स प्राइड और मैकडॉवेल्स जैसे ब्रांड शामिल हैं।
भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते के तहत कुछ स्कॉच उत्पादों पर आयात शुल्क में कटौती का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देना है। मौजूदा व्यवस्था में संबंधित उत्पादों पर शुल्क 150 प्रतिशत से घटाकर 75 प्रतिशत किया गया है। अगले 10 वर्षों में इसे और घटाकर 40 प्रतिशत करने का कार्यक्रम है।
शुल्क में कटौती के बाद कई राज्यों में चुनिंदा आयातित स्कॉच उत्पादों की कीमतों में भी कमी की गई है। महाराष्ट्र, राजस्थान, गोवा और उत्तर प्रदेश में कुछ उत्पादों की कीमतें लगभग 10 से 15 प्रतिशत तक घटाई गईं। डियाजियो के जॉनी वॉकर ब्लैक लेबल और जेएंडबी जैसे उत्पादों की कीमतों में बदलाव हुआ, जबकि पर्नो रिकार्ड ने शिवास, बैलेंटाइन्स और द ग्लेनलिवेट के लिए कम कीमतों की मंजूरी मांगी।
ब्रिटेन सरकार ने भी जुलाई में कहा था कि व्हिस्की और जिन जैसे प्रमुख ब्रिटिश उत्पादों को भारत की शुल्क कटौती से लाभ मिलेगा। ब्रिटिश सरकार के अनुसार, वर्ष 2022 में भारत को ब्रिटेन से व्हिस्की का निर्यात 20 करोड़ पाउंड से अधिक का था। क्रिसिल रेटिंग्स के मुताबिक, भारत के आयातित स्पिरिट्स बाजार में ब्रिटेन की हिस्सेदारी लगभग 75 प्रतिशत है, जिसमें स्कॉच व्हिस्की की प्रमुख भूमिका है।
पर्नो रिकार्ड के सामने अन्य नियामकीय चुनौतियां
पर्नो रिकार्ड भारत में अन्य नियामकीय मामलों का भी सामना कर रही है। कंपनी के खिलाफ देश में प्रतिस्पर्धा संबंधी मामले चल रहे हैं। इसके अलावा, कुछ आयातित उत्पादों का कम मूल्य घोषित किए जाने के आरोपों को लेकर लगभग 31.4 करोड़ डॉलर के अतिरिक्त कर की मांग भी की गई है। कंपनी ने आरोपों को गलत बताया है।
डियाजियो की भारतीय इकाई ने भी अगस्त में खाद्य सुरक्षा नियामक की कार्रवाई के बाद अपने कुछ लोकप्रिय पेय पदार्थों की निर्माण प्रक्रिया में बदलाव करने पर सहमति जताई थी। नियामक ने कुछ राज्यों में ऐसे पेय पदार्थों पर प्रतिबंध लगाया था, जिनमें इस्तेमाल किए गए स्वाद संबंधी घटकों को नियमों के कथित उल्लंघन से जोड़ा गया था।
फिलहाल, ताजा जांच का केंद्र बल्क स्कॉच व्हिस्की के आयात का वर्गीकरण और भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते के तहत कम शुल्क का लाभ लेने की पात्रता है। जांच के निष्कर्षों से स्पष्ट होगा कि संबंधित आयातों पर रियायती शुल्क लागू था या कंपनियों को अतिरिक्त कर देना पड़ सकता है।
