Close Menu
Bharat Speaks
  • Trending
  • Motivation
  • Health
  • Education
  • Development
  • About Us
What's Hot

2022 से 2026 के बीच 111 सांसद-विधायक बदले दल, नागालैंड और बंगाल में सबसे ज्यादा मामले

September 26, 2026

₹6.25 करोड़ की पुनर्भुगतान योजना पर नया कानूनी मोड़, सुभाष चंद्र ने NCLAT में NCLT के आदेश को दी चुनौती

September 23, 2026

India Salutes Ritika Chopra: Courageous Probe Lays Bare Deep Rifts Inside Election Commission

September 23, 2026
Facebook X (Twitter) Instagram
Facebook X (Twitter) Instagram
Bharat Speaks
Subscribe
  • Trending
  • Motivation
  • Health
  • Education
  • Development
  • About Us
Bharat Speaks
Home»Policy Watch»2022 से 2026 के बीच 111 सांसद-विधायक बदले दल, नागालैंड और बंगाल में सबसे ज्यादा मामले
Policy Watch

2022 से 2026 के बीच 111 सांसद-विधायक बदले दल, नागालैंड और बंगाल में सबसे ज्यादा मामले

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksSeptember 26, 2026No Comments4 Mins Read
Facebook Twitter LinkedIn Telegram WhatsApp Email
एडीआर के विश्लेषण में 26 लोकसभा सांसद, सात राज्यसभा सदस्य और 78 विधायक शामिल; दल बदलने के मामलों में इस्तीफे, उपचुनाव, विलय और अयोग्यता के बाद हुए राजनीतिक बदलाव भी दर्ज
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email
नई दिल्ली। वर्ष 2022 से 2026 के बीच चुनाव जीतने के बाद 111 सांसदों और विधायकों ने राजनीतिक दल बदले। इनमें 26 लोकसभा सांसद, सात राज्यसभा सदस्य और 78 विधायक शामिल हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और नेशनल इलेक्शन वॉच के विश्लेषण में यह जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट में 2022 से 2026 के दौरान हुए चुनाव और उपचुनावों से जुड़े मामलों को शामिल किया गया है।
विश्लेषण के अनुसार दल बदलने की श्रेणी में केवल सीधे तौर पर दूसरे दल में शामिल होने वाले जनप्रतिनिधि ही नहीं, बल्कि पार्टी विलय, इस्तीफा देकर उपचुनाव जीतने और अयोग्य ठहराए जाने के बाद उपचुनाव में दोबारा निर्वाचित होने वाले मामले भी शामिल हैं। एडीआर ने बताया कि उपलब्ध आधिकारिक सूचनाओं में दल बदलने वाले जनप्रतिनिधियों का कोई व्यवस्थित और एकीकृत डेटाबेस नहीं होने के कारण यह आंकड़ा पूरी तरह व्यापक होने का दावा नहीं करता।
राज्यों में नागालैंड सबसे अधिक मामलों के साथ शीर्ष पर रहा। यहां 32 मामले दर्ज किए गए और सभी विधायक स्तर के थे। इन मामलों का बड़ा हिस्सा नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी और नगा पीपुल्स फ्रंट के बीच राजनीतिक पुनर्संरेखण से जुड़ा था। रिपोर्ट के मुताबिक, नागालैंड के मामलों में दलों के बीच राजनीतिक बदलाव और विलय की घटनाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पश्चिम बंगाल में 20 मामले दर्ज किए गए और सभी लोकसभा सांसदों से संबंधित थे। एडीआर के अनुसार, ये सांसद पहले तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित हुए थे और बाद में नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया से जुड़ गए। इन सांसदों ने पार्टी विलय का दावा किया है, जिसका मामला लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष लंबित बताया गया है।
तेलंगाना में नौ मामले सामने आए और सभी भारत राष्ट्र समिति के टिकट पर निर्वाचित विधायकों से जुड़े थे। इनमें कांग्रेस प्रमुख प्राप्तकर्ता दल के रूप में सामने आई। गोवा में कांग्रेस के आठ विधायक भारतीय जनता पार्टी में गए। पंजाब में आठ मामले दर्ज हुए, जिनमें छह राज्यसभा सदस्य और दो विधायक शामिल थे।
महाराष्ट्र में छह मामले सभी लोकसभा सांसदों से जुड़े थे। ये सांसद शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के टिकट पर निर्वाचित हुए थे और बाद में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हुए। मेघालय में छह विधायक, मणिपुर में पांच, अरुणाचल प्रदेश और गुजरात में चार-चार, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान में दो-दो तथा कर्नाटक, मध्य प्रदेश, सिक्किम, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में एक-एक मामला दर्ज किया गया।
पार्टीवार आंकड़ों में नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी से सबसे अधिक 25 जनप्रतिनिधियों के बाहर जाने का उल्लेख है। इसके बाद तृणमूल कांग्रेस से 20 और कांग्रेस से 19 जनप्रतिनिधि अलग हुए। भारत राष्ट्र समिति से नौ, आम आदमी पार्टी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से सात-सात, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) से छह, जनता दल (यूनाइटेड) से पांच और नेशनल पीपुल्स पार्टी से चार जनप्रतिनिधियों के दल बदलने का रिकॉर्ड दर्ज किया गया।
दूसरी ओर, नगा पीपुल्स फ्रंट को 32 जनप्रतिनिधियों के जुड़ने का उल्लेख किया गया है। भारतीय जनता पार्टी को 29 और नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया को 20 जनप्रतिनिधि मिले। कांग्रेस के खाते में नौ, शिवसेना के आठ, नेशनल पीपुल्स पार्टी के छह और पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल के चार जनप्रतिनिधियों के आने का उल्लेख है।
एडीआर ने कहा कि कुछ राज्यों में दल बदल की घटनाओं का संबंध सरकारों के गिरने से भी रहा है। संस्था ने दल बदल कानून में बदलाव की सिफारिश की है। इनमें सांसदों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला लेने की जिम्मेदारी पीठासीन अधिकारियों से हटाकर राष्ट्रपति और विधायकों के मामलों में राज्यपाल को देने का प्रस्ताव शामिल है। एडीआर ने इन फैसलों में निर्वाचन आयोग की सलाह लेने और याचिकाओं के निपटारे के लिए निश्चित समयसीमा तय करने का सुझाव भी दिया है।
इसके अलावा, एडीआर ने प्रस्ताव दिया है कि दल बदलने वाले जनप्रतिनिधियों को दोबारा निर्वाचित होने तक सार्वजनिक पद संभालने से रोका जाए। ये सुझाव मौजूदा दल बदल कानून के तहत अयोग्यता से जुड़े मामलों के निपटारे की प्रक्रिया में बदलाव पर केंद्रित हैं।
📲 Join Our WhatsApp Channel
Algoritha Registration
Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email
Previous Article₹6.25 करोड़ की पुनर्भुगतान योजना पर नया कानूनी मोड़, सुभाष चंद्र ने NCLAT में NCLT के आदेश को दी चुनौती
Team Bharat Speaks
  • Website

Related Posts

₹6.25 करोड़ की पुनर्भुगतान योजना पर नया कानूनी मोड़, सुभाष चंद्र ने NCLAT में NCLT के आदेश को दी चुनौती

September 23, 2026

अमेरिका में H-1B और विदेशी श्रम कार्यक्रमों में ₹1.65 लाख करोड़ की संदिग्ध धोखाधड़ी का दावा, जांच तेज

September 23, 2026

बाल यौन शोषण सामग्री मिलने पर भारत में सीधे अधिकारियों को रिपोर्ट करेगा गूगल

September 22, 2026
Add A Comment
Leave A Reply Cancel Reply

Top Posts

Subscribe to Updates

Get the latest sports news from SportsSite about soccer, football and tennis.

Welcome to BharatSpeaks.com, where our mission is to keep you informed about the stories that matter the most. At the heart of our platform is a commitment to delivering verified, unbiased news from across India and beyond.

We're social. Connect with us:

Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
Top Insights
Get Informed

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

© 2026 Bharat Speaks.
  • Trending
  • Motivation
  • Health
  • Education
  • Development
  • About Us

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.