नई दिल्ली: 4 अगस्त को Phuket से Delhi आ रही Air India की उस उड़ान के कप्तान का पोस्ट-फ्लाइट डोप टेस्ट कथित तौर पर साइकोएक्टिव पदार्थों के लिए पॉजिटिव आया है, जिसे उड़ान के दौरान अचानक आए तेज टर्बुलेंस के कारण हादसे का सामना करना पड़ा था। सूत्रों के अनुसार, घटना के बाद विमान के पायलटों की जांच की गई और प्रारंभिक परीक्षण में कप्तान के नमूने में साइकोएक्टिव पदार्थ की मौजूदगी के संकेत मिले। इसके बाद कप्तान को फिलहाल उड़ान ड्यूटी से हटा दिया गया है।
हालांकि, एयरलाइन ने स्पष्ट किया है कि उसे जांच के परिणाम आधिकारिक तौर पर उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। इसलिए फिलहाल यह कहना संभव नहीं है कि शरीर में किस विशेष पदार्थ की मौजूदगी के कारण टेस्ट पॉजिटिव आया।
AAIB के निर्देश पर हुआ परीक्षण
सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली एयरपोर्ट पर पायलटों का साइकोएक्टिव पदार्थों के लिए परीक्षण Aircraft Accident Investigation Bureau (AAIB) के निर्देश पर कराया गया था। AAIB नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधीन काम करता है और विमान दुर्घटना या गंभीर घटना की परिस्थितियों में आवश्यक जांच और परीक्षण कराने का अधिकार रखता है।
बताया गया है कि विमान के दिल्ली पहुंचने के बाद दोनों पायलटों का पहले ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट किया गया था, जिसका परिणाम निगेटिव रहा। इसके बाद रक्त और मूत्र के नमूने लिए गए। प्रारंभिक जांच में साइकोएक्टिव पदार्थ के संकेत मिलने के बाद पुष्टि के लिए दोबारा परीक्षण कराया गया है। नमूने प्रमाणित प्रयोगशाला भेजे गए हैं। जरूरत पड़ने पर बालों के नमूनों की भी जांच किए जाने की संभावना है।
टर्बुलेंस के दौरान 300 फीट नीचे गया था विमान
4 अगस्त को Phuket-Delhi उड़ान के दौरान विमान अचानक तेज टर्बुलेंस की चपेट में आया था। घटना के दौरान विमान करीब 300 फीट नीचे चला गया था। इस दौरान कुल 17 लोग घायल हुए थे, जिनमें चार केबिन क्रू सदस्य भी शामिल थे।
घटना को विमानन नियमों के तहत दुर्घटना के रूप में देखा जा रहा है। इसी वजह से पायलटों की विस्तृत जांच और डोप टेस्ट की प्रक्रिया शुरू की गई। हादसे की परिस्थितियों और विमान संचालन से जुड़े सभी पहलुओं की जांच भी जारी है।
Air India ने क्या कहा?
Air India ने कहा कि पायलटों का पोस्ट-फ्लाइट स्क्रीनिंग टेस्ट लागू प्रोटोकॉल के तहत किया गया था, लेकिन टेस्ट के परिणाम एयरलाइन के साथ साझा नहीं किए गए हैं। इसलिए एयरलाइन किसी निष्कर्ष पर टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं है।
एयरलाइन के मुताबिक, चालक दल के सदस्यों का नियमित ड्रग टेस्ट नागरिक उड्डयन नियमों के तहत किया जाता है और यह प्रक्रिया किसी एक उड़ान या घटना तक सीमित नहीं है। कंपनी ने संबंधित अधिकारियों के साथ आवश्यक सहयोग जारी रखने की बात कही है।
विशेषज्ञ बोले- अंतिम रिपोर्ट से पहले निष्कर्ष जल्दबाजी होगी
Federation of Indian Pilots के अध्यक्ष कैप्टन सीएस रंधावा ने कहा कि शरीर में कुछ साइकोएक्टिव पदार्थों के अवशेष लंबे समय तक रह सकते हैं। उनके मुताबिक, सबसे पहले यह स्पष्ट होना जरूरी है कि जांच में कौन सा पदार्थ मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि पायलटों में कभी-कभी बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा लेने की प्रवृत्ति होती है और कुछ दर्द निवारक दवाओं में ऐसे तत्व हो सकते हैं जो डोप टेस्ट में पॉजिटिव परिणाम दे सकते हैं।
रंधावा ने कहा कि यदि किसी प्रतिबंधित पदार्थ का सेवन महीनों पहले किया गया हो और उसका अवशेष अब भी शरीर में मौजूद हो, तो मामला गंभीर हो सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अंतिम निष्कर्ष के लिए पुष्टि करने वाली प्रयोगशाला रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी।
Airline Pilot Association of India के अध्यक्ष कैप्टन सैम थॉमस ने भी कहा कि इस स्तर पर पायलट के बारे में कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। उन्होंने बताया कि कुछ लोग बॉडी-बिल्डिंग सप्लीमेंट लेते हैं, जिनमें प्रतिबंधित पदार्थ मौजूद हो सकते हैं। उनके मुताबिक, सेल्फ-मेडिकेशन भी एक बड़ी समस्या है और पॉजिटिव टेस्ट के वास्तविक कारण की पुष्टि होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
अब जांच का मुख्य फोकस कथित पॉजिटिव परिणाम में मिले पदार्थ की पहचान, उसकी मात्रा और स्रोत का पता लगाने पर है। प्रमाणित प्रयोगशाला की पुष्टि रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कप्तान के खिलाफ आगे की कार्रवाई किस आधार पर की जाएगी और इसका 4 अगस्त की उड़ान से कोई प्रत्यक्ष संबंध था या नहीं।
