अलीगढ़: उत्तर प्रदेश में डीएलएड परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक करने के मामले में पुलिस ने करीब आठ महीने से फरार चल रहे कथित मास्टरमाइंड को लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी की पहचान सीतापुर निवासी नीतेश पांडेय के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, नीतेश ने डीएलएड प्रथम और तृतीय सेमेस्टर की परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र गिरोह के सदस्यों तक पहुंचाया था। इसके बाद सोशल मीडिया के माध्यम से अभ्यर्थियों को कथित तौर पर प्रश्नपत्र उत्तर सहित उपलब्ध कराया गया और इसके बदले यूपीआई के जरिए रकम वसूली गई। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को शनिवार को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
पुलिस के मुताबिक, नीतेश पांडेय सीतापुर जिले के कोतवाली देहात क्षेत्र स्थित अंबिकापुरम नेपालापुर का रहने वाला है। वह नरेश कुमार पांडेय का पुत्र है। मामले में पुलिस और विशेष कार्यबल की जांच के दौरान उसकी भूमिका सामने आई थी। इसके बाद से पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। करीब आठ महीने तक फरार रहने के बाद उसे लखनऊ में दबोचा गया।
2 नवंबर 2025 की परीक्षा से जुड़ा है मामला
यह मामला 2 नवंबर 2025 को आयोजित डीएलएड प्रथम और तृतीय सेमेस्टर की परीक्षा से जुड़ा है। परीक्षा की शुचिता भंग करने और प्रश्नपत्र लीक किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद मामले को गंभीरता से लिया गया था। प्रश्नपत्र लीक करने वाले गिरोह पर कार्रवाई के लिए एसटीएफ की लखनऊ विंग और इगलास पुलिस ने संयुक्त रूप से जांच शुरू की थी।
जांच के दौरान पुलिस ने इगलास क्षेत्र के नगला हरिकरना भरतपुर निवासी पुष्पेंद्र और उसके भाई धर्मेंद्र को गिरफ्तार किया था। दोनों को पूछताछ के बाद जेल भेज दिया गया था। पुलिस के अनुसार, इन दोनों तक प्रश्नपत्र पहुंचाने में नीतेश पांडेय की महत्वपूर्ण भूमिका थी।
मास्टरमाइंड ने उपलब्ध कराया था प्रश्नपत्र
जांच में सामने आया कि नीतेश ने कथित तौर पर पुष्पेंद्र और धर्मेंद्र को डीएलएड परीक्षा का प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया था। इसके बाद दोनों भाइयों ने इसे आगे अभ्यर्थियों तक पहुंचाने का नेटवर्क तैयार किया। आरोप है कि परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्नपत्र को उत्तर सहित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए अभ्यर्थियों तक भेजा गया।
इस पूरे नेटवर्क में सोशल मीडिया और डिजिटल भुगतान माध्यमों का इस्तेमाल किया गया। अभ्यर्थियों से प्रश्नपत्र और उसके उत्तर उपलब्ध कराने के बदले यूपीआई के माध्यम से पैसे लिए गए। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस प्रक्रिया में कितने अभ्यर्थी शामिल थे और उनसे कुल कितनी रकम वसूली गई।
डिजिटल लेनदेन की भी जांच
मामले में पुलिस की जांच अब केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसियां प्रश्नपत्र के डिजिटल प्रसार, सोशल मीडिया संपर्कों और यूपीआई लेनदेन की कड़ियों को खंगाल रही हैं। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि लीक हुआ प्रश्नपत्र सबसे पहले किस स्तर पर बाहर आया और उसके बाद किन-किन लोगों तक पहुंचा।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि नीतेश के संपर्क में कौन-कौन लोग थे और क्या गिरोह में उसके अलावा अन्य व्यक्ति भी सक्रिय थे। आरोपियों के मोबाइल फोन, डिजिटल संपर्क और वित्तीय लेनदेन से संबंधित साक्ष्यों की पड़ताल से नेटवर्क के विस्तार का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
आठ महीने से चल रही थी तलाश
पुलिस के अनुसार, नीतेश मामले में सामने आने के बाद से फरार था और उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे। तकनीकी जानकारी और अन्य जांच के आधार पर पुलिस टीम आखिरकार उसे लखनऊ से पकड़ने में सफल रही। गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ की गई और मामले से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटाई गई।
सीओ इगलास कमलेश कुमार के अनुसार, आरोपी को शनिवार को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। अब पुलिस आगे की जांच में प्रश्नपत्र लीक की पूरी श्रृंखला, डिजिटल माध्यमों से उसके प्रसार और पैसों के लेनदेन से जुड़े तथ्यों को जोड़ने में जुटी है।
मामले में पहले गिरफ्तार पुष्पेंद्र और धर्मेंद्र की भूमिका की भी जांच जारी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित गिरोह ने इससे पहले या बाद में किसी अन्य परीक्षा का प्रश्नपत्र भी लीक किया था या नहीं। जांच पूरी होने के बाद ही इस नेटवर्क में शामिल सभी लोगों और कथित तौर पर वसूली गई रकम की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
