नई दिल्ली। देशभर में तेजी से बढ़ रहे ‘कृत्रिम पनीर’ के कारोबार पर अब सरकार सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। बाजार में असली पनीर के विकल्प के रूप में बिक रहे इस नकली उत्पाद को पूरी तरह प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव मंजूर कर लिया गया है और इसे जल्द लागू किया जा सकता है। जानकारी के मुताबिक, कम पोषण मूल्य और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस संबंध में गठित उच्चस्तरीय समिति ने अक्टूबर 2025 में अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी, जिसे मार्च 2026 की बैठक में मंजूरी दे दी गई। अब इस प्रस्ताव को लागू करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और जल्द ही इसकी औपचारिक घोषणा हो सकती है।
बाजार में तेजी से बढ़ा ‘कृत्रिम पनीर’ का चलन
पिछले कुछ वर्षों में बाजार में ‘कृत्रिम पनीर’ की बिक्री में तेजी आई है। यह उत्पाद मुख्य रूप से पाम ऑयल, मिल्क पाउडर, स्टार्च और इमल्सीफायर जैसे तत्वों से तैयार किया जाता है। देखने और बनावट में यह असली पनीर जैसा ही लगता है, जिससे उपभोक्ताओं के लिए इसकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है।
सस्ता होने के कारण कई ढाबों, होटलों और छोटे रेस्टोरेंट में इसका बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है। यही वजह है कि उपभोक्ता अक्सर बिना जानकारी के इसे असली पनीर समझकर खा लेते हैं।
कीमत में बड़ा अंतर, बढ़ी खपत
अधिकारियों के अनुसार, जहां ब्रांडेड और असली पनीर की कीमत करीब ₹450 प्रति किलो तक होती है, वहीं कृत्रिम या बिना ब्रांड वाला पनीर ₹250 से ₹300 प्रति किलो में आसानी से उपलब्ध हो जाता है। कीमत में इस बड़े अंतर ने इसकी मांग को तेजी से बढ़ाया है।
कम लागत और अधिक मुनाफे के कारण कई कारोबारी इस अवैध या भ्रामक उत्पाद की ओर आकर्षित हुए हैं, जिससे बाजार में इसकी हिस्सेदारी लगातार बढ़ती गई।
स्वास्थ्य के लिए खतरा बना नकली पनीर
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कृत्रिम पनीर को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उनके अनुसार, इसमें प्रोटीन की मात्रा बहुत कम होती है, जबकि फैट का स्तर अधिक होता है। नियमित रूप से इसके सेवन से शरीर में कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इसके सेवन से इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ सकता है, जो आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है। इसके अलावा, लंबे समय तक इसका सेवन हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम भी बढ़ा सकता है।
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डेयरी सेक्टर पर भी पड़ रहा असर
भारत दुनिया का सबसे बड़ा डेयरी उत्पादक देश है, लेकिन इसके बावजूद नकली पनीर का बढ़ता कारोबार असली डेयरी उत्पादों के लिए चुनौती बन गया है। इससे न केवल उपभोक्ता भ्रमित हो रहे हैं, बल्कि डेयरी उद्योग को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
मार्केट रिसर्च के अनुसार, भारत का पनीर बाजार वर्तमान में करीब 10.8 अरब डॉलर का है और 2033 तक इसके 22.1 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में नकली उत्पादों की मौजूदगी इस वृद्धि पर भी असर डाल सकती है।
चरणबद्ध तरीके से लागू होगा प्रतिबंध
नई नीति के तहत सरकार कृत्रिम पनीर पर तुरंत पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से इसे बाजार से हटाने की योजना बना रही है।
सूत्रों के अनुसार, देश में करीब 1,000 ऐसे लाइसेंसधारी निर्माता और कारोबारी हैं, जो इस तरह का पनीर बना रहे हैं। नए नियम लागू होने के बाद:
- नए लाइसेंस जारी नहीं किए जाएंगे
- मौजूदा कंपनियों को स्टॉक खत्म करने का समय दिया जाएगा
- उत्पादन धीरे-धीरे बंद कराया जाएगा
उपभोक्ताओं के हित में बड़ा कदम
सरकार का मानना है कि यह फैसला उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और पारदर्शिता के लिए जरूरी है। नकली और असली उत्पाद के बीच स्पष्ट अंतर न होने के कारण लोग अनजाने में कम गुणवत्ता वाला उत्पाद खरीद रहे हैं।
सतर्कता भी जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक यह प्रतिबंध पूरी तरह लागू नहीं होता, तब तक उपभोक्ताओं को खुद भी सतर्क रहना होगा। हमेशा विश्वसनीय ब्रांड का पनीर खरीदें और खुले में बिकने वाले सस्ते उत्पादों से बचें।
यह कदम न सिर्फ उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा करेगा, बल्कि डेयरी उद्योग में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में भी अहम साबित हो सकता है।
