कोल्हापुर। महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में एक बड़ा वित्तीय ठगी मामला सामने आया है, जहां एक 78 वर्षीय रिटायर्ड कर्मचारी को कथित तौर पर मजदूर सप्लाई ठेका पार्टनरशिप के नाम पर ₹31.5 लाख की चपत लगा दी गई। आरोपी ने मुंबई की कंपनियों में बड़े ठेके दिलाने और हर महीने भारी मुनाफा देने का झांसा देकर यह पूरा खेल रचा।
पीड़ित की पहचान महावीर गजानन मूग के रूप में हुई है, जो कोल्हापुर के रविवार पेठ इलाके के निवासी हैं। आरोप है कि उन्हें उनके बेटे के परिचित के जरिए आरोपी संजय रामचंद्र वाडेकर से मिलवाया गया। वाडेकर मूल रूप से यवतमाल के बेलोरी का रहने वाला है और वर्तमान में नवी मुंबई के खारघर में रह रहा था।
आरोपी ने खुद को मजदूर सप्लाई ठेकेदार बताते हुए दावा किया कि उसके पास मुंबई की दो बड़ी कंपनियों में ठेके का काम है और वह इसमें पार्टनरशिप के लिए निवेशकों की तलाश कर रहा है। उसने भरोसा दिलाया कि यह एक सुरक्षित निवेश है और हर महीने नियमित रिटर्न मिलेगा।
इस झांसे में आकर पीड़ित ने सितंबर 2020 से अक्टूबर 2021 के बीच करीब एक साल में सात किस्तों में कुल ₹31.5 लाख आरोपी द्वारा बताए गए दो अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए।
जांच में सामने आया है कि शुरुआत में आरोपी लगातार संपर्क में रहा और काम जल्द शुरू होने का भरोसा देता रहा। लेकिन बाद में उसने बातचीत कम कर दी और बार-बार एग्रीमेंट करने से बचता रहा, जिससे पीड़ित को शक होने लगा।
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बार-बार दस्तावेज और पैसे की वापसी की मांग के बावजूद आरोपी टालमटोल करता रहा। धीरे-धीरे यह स्पष्ट हो गया कि जिस मजदूर सप्लाई ठेके का दावा किया गया था, वह पूरी तरह फर्जी था और कोई वास्तविक बिजनेस डील मौजूद नहीं थी।
इसके बाद पीड़ित ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के आदेश के बाद शाहूपुरी पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात से जुड़े प्रावधानों के तहत केस दर्ज किया है।
पुलिस अब आरोपी की तलाश में जुटी है और उन बैंक खातों की जांच कर रही है जिनमें पैसे ट्रांसफर किए गए थे। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस धोखाधड़ी में अन्य लोग भी शामिल थे या किसी नेटवर्क के जरिए पैसे को आगे ट्रांसफर किया गया।
प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि आरोपी ने इसी तरह के तरीकों से अन्य लोगों को भी निशाना बनाया हो सकता है। जांच एजेंसियों का मानना है कि अलग-अलग बैंक खातों का इस्तेमाल पैसे को ट्रेस होने से बचाने के लिए किया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के मामलों में ठग अक्सर भरोसा जीतने के लिए व्यक्तिगत संपर्क और गारंटीड रिटर्न का लालच देते हैं। रिटायर्ड और वरिष्ठ नागरिक ऐसे मामलों में ज्यादा आसानी से निशाना बन जाते हैं।
अधिकारियों ने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी निवेश प्रस्ताव को बिना लिखित समझौते और सत्यापन के स्वीकार न करें और केवल मौखिक आश्वासनों के आधार पर पैसे ट्रांसफर न करें।
फिलहाल पुलिस जांच जारी है और इस मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
