ओटावा। अमेरिका की टैरिफ नीति के खिलाफ कनाडा ने जवाबी कदम और तेज कर दिए हैं। कनाडा सरकार ने 700 से अधिक अमेरिकी उत्पादों पर अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने का फैसला किया है। अलग-अलग वस्तुओं पर यह शुल्क 15%, 25% और 50% तक होगा। नई व्यवस्था 8 सितंबर से लागू होने की तैयारी है। सरकार का कहना है कि इन शुल्कों का उद्देश्य अतिरिक्त राजस्व जुटाना नहीं, बल्कि अमेरिकी आयात से दबाव झेल रहे कनाडाई उद्योगों और कारोबारों को सुरक्षा देना है।
कनाडाई अधिकारियों के अनुसार, नए जवाबी शुल्क में अमेरिकी स्टील, एल्युमिनियम, डेयरी उत्पाद, घरेलू उपकरण, कृषि उपकरण, पल्प और पेपर, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े तथा अन्य उत्पाद शामिल होंगे। शुल्क की दर संबंधित अमेरिकी टैरिफ के अनुरूप रखने की योजना है। कुछ श्रेणियों में आयात शुल्क 50% तक पहुंच जाएगा, जिससे अमेरिका से कनाडा आने वाले कई उत्पादों की लागत बढ़ने की संभावना है।
सरकार के मुताबिक, 50% शुल्क के दायरे में कुछ एल्युमिनियम उत्पाद, फर्नीचर, कपड़े और परिधान शामिल होंगे। घरेलू उपकरणों, पनीर सहित कुछ डेयरी उत्पादों, मछली और समुद्री खाद्य पदार्थों तथा कुछ स्टील और एल्युमिनियम उत्पादों पर 25% शुल्क लगाया जाएगा। कुछ अन्य अमेरिकी वस्तुओं पर 15% की दर लागू होगी।
अमेरिकी वाहनों पर कनाडा की ओर से पहले से लगाए गए जवाबी शुल्क भी जारी रहेंगे। कनाडा का ताजा कदम ऐसे समय आया है जब दोनों पड़ोसी देशों के बीच व्यापारिक तनाव लगातार बढ़ रहा है। दोनों अर्थव्यवस्थाओं की आपूर्ति श्रृंखलाएं एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी होने के कारण टैरिफ का असर केवल आयातकों तक सीमित रहने के बजाय विनिर्माण, परिवहन, कृषि और खुदरा कारोबार तक पहुंच सकता है।
कनाडा के वित्त मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैंपेन ने कहा कि अमेरिकी टैरिफ का देश के श्रमिकों, कारोबारों और समुदायों पर वास्तविक प्रभाव पड़ रहा है। उनके अनुसार, कनाडा ने व्यापार संघर्ष की शुरुआत नहीं की, लेकिन यदि आर्थिक संबंधों को दोनों देशों के लिए लाभकारी साझेदारी के बजाय दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है तो कनाडा को जवाब देना पड़ेगा।
कनाडा सरकार ने व्यापार विवाद से प्रभावित श्रमिकों और कारोबारों के लिए 7.5 अरब कनाडाई डॉलर यानी करीब ₹47,000 करोड़ का सहायता पैकेज भी घोषित किया है। सरकार का कहना है कि जवाबी शुल्क से कुछ कंपनियों और उपभोक्ताओं की लागत बढ़ सकती है, लेकिन इसका समग्र आर्थिक प्रभाव सीमित रखने की कोशिश की जाएगी। सहायता पैकेज का उद्देश्य टैरिफ से प्रभावित क्षेत्रों को अस्थायी राहत देना और रोजगार पर पड़ने वाले दबाव को कम करना है।
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सरकार के अनुसार, 2025 की शुरुआत से अब तक व्यापार शुल्क से जुड़े विभिन्न सहायता उपायों के तहत 30 अरब कनाडाई डॉलर यानी करीब ₹1.88 लाख करोड़ से अधिक उपलब्ध कराए जा चुके हैं। यह राशि जवाबी शुल्क से संभावित रूप से मिलने वाले राजस्व से काफी अधिक है। कनाडा का कहना है कि उसकी प्राथमिकता व्यापार युद्ध से प्रभावित उद्योगों और श्रमिकों को सहारा देना है, न कि टैरिफ से सरकारी आय बढ़ाना।
व्यापार विवाद का सबसे बड़ा जोखिम दोनों देशों की परस्पर निर्भर आपूर्ति श्रृंखलाओं को लेकर है। कनाडा और अमेरिका के वाहन, ऊर्जा, कृषि तथा विनिर्माण क्षेत्र लंबे समय से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। किसी एक देश द्वारा लगाए गए अतिरिक्त शुल्क से उत्पादन लागत बढ़ सकती है और कंपनियों को वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की तलाश करनी पड़ सकती है। इसका असर अंततः वस्तुओं की कीमतों और उपभोक्ता मांग पर भी पड़ सकता है।
कनाडा की उद्योग मंत्री मेलानी जोली ने घरेलू उत्पादों की खरीद को बढ़ावा देने की अपील की है। सरकार की कोशिश है कि अमेरिकी उत्पादों पर बढ़े शुल्क के बीच कनाडाई कंपनियों को घरेलू बाजार में अधिक हिस्सेदारी मिले। इसके साथ ही स्थानीय उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
नए टैरिफ के लागू होने के बाद अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक तनाव के और बढ़ने की आशंका है। हालांकि दोनों देशों के बीच व्यापक व्यापारिक संबंधों को देखते हुए लंबे समय तक चलने वाला टैरिफ संघर्ष दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए महंगा साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में सबसे अहम सवाल यही होगा कि क्या दोनों देश बातचीत के जरिए शुल्क कम करने या व्यापारिक विवाद को सीमित करने का रास्ता निकाल पाते हैं।
