नई दिल्ली। चीन की सस्ती और अत्याधुनिक स्मार्ट कारों ने अमेरिकी वाहन उद्योग के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। चीनी वाहन निर्माता गीली की गैलेक्सी एम9 जैसी कारें जिस कीमत पर अत्याधुनिक सुविधाएं दे रही हैं, उसने अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा संरक्षण को लेकर भी बहस तेज कर दी है। करीब ₹33 लाख की शुरुआती कीमत वाली गैलेक्सी एम9 में ऐसे फीचर्स दिए गए हैं, जो अमेरिका में उपलब्ध कई महंगी लग्जरी कारों में भी एक साथ नहीं मिलते।
तीन कतार वाली इस संकर एसयूवी में मालिश और गर्म करने वाली चमड़े की सीटें, 30 इंच की अनुकूलन योग्य वीडियो स्क्रीन, 27 स्पीकर वाला सराउंड साउंड सिस्टम, अंदर बना छोटा रेफ्रिजरेटर और वायरलेस कराओके जैसी सुविधाएं हैं। कंपनी के मुताबिक कार बैटरी और पेट्रोल के संयोजन से करीब 1,060 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकती है। इसकी एक खास सुविधा में चालक स्क्रीन पर कार की तस्वीर को खाली पार्किंग स्थान पर खींचकर वाहन को स्वचालित रूप से पार्क करा सकता है।
कीमत ने बढ़ाई अमेरिकी कंपनियों की चिंता
चीन में गैलेक्सी एम9 की कीमत करीब 35,000 डॉलर बताई जाती है, जो लगभग ₹33 लाख बैठती है। इसके मुकाबले अमेरिका में समान स्तर के फीचर्स वाली मर्सिडीज या टेस्ला की कई गाड़ियों की कीमत करीब ₹70-80 लाख या उससे अधिक हो सकती है। यही कीमत का अंतर अमेरिकी वाहन निर्माताओं के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
अमेरिकी वाहन उद्योग का कहना है कि चीनी कंपनियों को केवल कम लागत का फायदा नहीं है, बल्कि चीन में विकसित मजबूत आपूर्ति शृंखला और अत्याधुनिक कारखानों का नेटवर्क भी उन्हें तेजी से नई तकनीक बाजार में उतारने में मदद करता है। जॉर्ज वॉशिंगटन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जॉन हेल्वेस्टन के अनुसार, चीन का आपूर्ति शृंखला तंत्र और विशेष रूप से नई पीढ़ी की कारों के लिए बनाए गए कारखाने उसकी बड़ी ताकत हैं।
कैमरा और सेंसर से डेटा सुरक्षा का सवाल
अमेरिका में चिंता का दूसरा बड़ा कारण स्मार्ट कारों में लगे कैमरे, माइक्रोफोन, सेंसर और इंटरनेट से जुड़ी प्रणालियां हैं। अमेरिकी अधिकारियों और सुरक्षा विशेषज्ञों का सवाल है कि इन उपकरणों से लगातार जुटाया जाने वाला वाहन और आसपास के वातावरण का डेटा कहां संग्रहित होता है और उस तक किसकी पहुंच होती है।
सीनेटर एलिसा स्लॉटकिन, जो पहले सीआईए में काम कर चुकी हैं, ने चिंता जताई है कि स्मार्ट कारें हर सेकंड बड़ी संख्या में तस्वीरें और अन्य जानकारी जुटा सकती हैं। उनके अनुसार, ऐसी तकनीक से सैन्य ठिकानों, संवेदनशील बुनियादी ढांचे या महत्वपूर्ण लोगों की आवाजाही से जुड़ी जानकारी के दुरुपयोग का जोखिम पैदा हो सकता है। हालांकि, किसी विशेष वाहन द्वारा संवेदनशील अमेरिकी डेटा को सीधे बीजिंग भेजे जाने का दावा अलग-अलग मामलों में ठोस प्रमाण से स्थापित किया जाना अभी जरूरी है।
प्रस्तावित कानून में 15% स्वामित्व सीमा
इन चिंताओं के बीच ‘कनेक्टेड व्हीकल सिक्योरिटी एक्ट 2026’ प्रस्तावित किया गया है। इसे रिपब्लिकन सीनेटर बर्नी मोरेनो और डेमोक्रेट सीनेटर एलिसा स्लॉटकिन ने आगे बढ़ाया है। संबंधित समिति ने प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया है।
प्रस्तावित व्यवस्था में उन वाहन निर्माताओं पर रोक लगाने की बात कही गई है जिनमें चीनी स्वामित्व 15 प्रतिशत से अधिक हो। सीमा पार से चीनी कारों के प्रवेश को लेकर भी कड़े प्रावधान प्रस्तावित हैं। यदि कानून लागू होता है तो चीन से जुड़े वाहन निर्माताओं के लिए अमेरिकी बाजार में कारोबार करना काफी कठिन हो सकता है।
इसका असर केवल चीनी कंपनियों तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। मर्सिडीज-बेंज में चीन से जुड़ा करीब 20 प्रतिशत स्वामित्व होने की बात सामने आई है। ऐसे में प्रस्तावित सीमा लागू होने पर कुछ वैश्विक वाहन कंपनियों को अपने स्वामित्व ढांचे में बदलाव करना पड़ सकता है।
अमेरिकी कंपनियों के सामने दोहरी चुनौती
फोर्ड के कार्यकारी चेयरमैन बिल फोर्ड ने भी संकेत दिया है कि चीनी कारों को हमेशा अमेरिकी बाजार से बाहर रखना संभव नहीं होगा। उनके मुताबिक अमेरिकी कंपनियों को चीन की प्रतिस्पर्धी क्षमता का सामना करने के लिए अपनी तकनीक, लागत और उत्पादन क्षमता में सुधार करना होगा। गीली की उम्र करीब 28 वर्ष है, फिर भी वह वैश्विक स्तर पर लगभग उतनी ही बड़ी संख्या में वाहन बेचने की दिशा में पहुंच चुकी है जितनी 123 वर्ष पुरानी फोर्ड कंपनी।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का एक वर्ग पूर्ण प्रतिबंध के बजाय डेटा सुरक्षा के कड़े नियमों का समर्थन करता है। इसके तहत विदेशी वाहन कंपनियों को अमेरिकी उपभोक्ताओं का डेटा स्थानीय सर्वर पर रखने और संवेदनशील जानकारी को देश से बाहर भेजने पर नियंत्रण जैसी शर्तें लागू की जा सकती हैं। ब्रिटेन, पोलैंड और इजरायल जैसे देशों ने भी चीनी कारों को पूरी तरह प्रतिबंधित करने के बजाय सुरक्षा और डेटा से जुड़े जोखिमों पर अलग-अलग उपाय अपनाए हैं।
अमेरिका के सामने अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि चीनी कारें कितनी सस्ती या तकनीकी रूप से कितनी उन्नत हैं। असली चुनौती यह तय करने की है कि कम कीमत और अत्याधुनिक सुविधाओं के लाभ के साथ डेटा सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के जोखिमों का संतुलन कैसे बनाया जाए। गैलेक्सी एम9 जैसी कारों ने इस बहस को अमेरिकी ऑटो बाजार में और अधिक तेज कर दिया है।
