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Home»Policy Watch»चीन-अमेरिका के बीच बढ़ी AI की जंग, ब्रिक्स के बाद वैश्विक तकनीकी ध्रुवीकरण तेज
Policy Watch

चीन-अमेरिका के बीच बढ़ी AI की जंग, ब्रिक्स के बाद वैश्विक तकनीकी ध्रुवीकरण तेज

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksSeptember 14, 2026No Comments4 Mins Read
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चीन ने ब्रिक्स देशों के लिए ओपन-सोर्स AI पारिस्थितिकी तंत्र बनाने का प्रस्ताव रखा; अमेरिका ने निर्यात नियंत्रण और तकनीकी गठबंधनों के जरिए बढ़त बनाए रखने पर जोर दिया, भारत ने तकनीक के हथियारकरण के बजाय ग्लोबल साउथ की समान पहुंच की पैरवी की
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नई दिल्ली। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन के साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को लेकर चीन और अमेरिका के बीच वैश्विक प्रतिस्पर्धा और तेज होती दिखाई दे रही है। चीन ने ब्रिक्स देशों के लिए ओपन-सोर्स AI समुदाय और साझा तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने का प्रस्ताव दिया है। इसके जवाब में अमेरिका अपनी उन्नत AI तकनीक, अत्याधुनिक चिप, सेमीकंडक्टर उपकरण और क्लाउड सुविधाओं तक पहुंच को रणनीतिक साझेदारों तक सीमित रखने की नीति पर आगे बढ़ रहा है। इससे AI अब केवल तकनीकी विकास का विषय न रहकर वैश्विक कूटनीति और आर्थिक शक्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है।
13 सितंबर को नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन सत्र में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने कहा कि उनका देश ब्रिक्स के लिए ओपन-सोर्स AI समुदाय बनाने में अग्रणी भूमिका निभाएगा। प्रस्ताव के तहत बड़े भाषा मॉडल के विकास और इस्तेमाल में सहयोग, विशेष प्रशिक्षण तथा साझा AI पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने की दिशा में काम करने की बात कही गई। चीन की कंपनियां पिछले कुछ समय से ओपन-सोर्स AI मॉडल को बढ़ावा दे रही हैं, जबकि अमेरिकी कंपनियां अधिक नियंत्रित और अत्याधुनिक फ्रंटियर मॉडल के विकास पर जोर दे रही हैं।
चीन का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब वह विकासशील देशों के साथ AI सहयोग का दायरा बढ़ा रहा है। जुलाई 2026 में चीन के नेतृत्व में 29 देशों के साथ वर्ल्ड AI कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन के गठन की दिशा में समझौता हुआ। पाकिस्तान, रूस, मलेशिया, केन्या, क्यूबा, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया और ब्राजील समेत कई देश इस पहल से जुड़े हैं। चीन की कोशिश AI के क्षेत्र में ऐसे देशों को साझा तकनीकी ढांचे से जोड़ने की है, जिन्हें अत्याधुनिक AI संसाधनों तक सीमित पहुंच हासिल है।
दूसरी ओर, अमेरिका AI क्षेत्र में अपनी बढ़त को बनाए रखने के लिए तकनीकी निर्यात और रणनीतिक साझेदारियों का इस्तेमाल कर रहा है। उच्च क्षमता वाले चिप, सेमीकंडक्टर उपकरण, क्लाउड कंप्यूटिंग सुविधाओं और कुछ अत्याधुनिक AI मॉडल से जुड़ी तकनीक पर निर्यात नियंत्रण लगाए गए हैं। इन संसाधनों की उपलब्धता को चुनिंदा भरोसेमंद साझेदार देशों तक सीमित रखने की नीति को चीन की तकनीकी प्रगति को नियंत्रित करने की व्यापक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

अमेरिका के नेतृत्व वाले पैक्स सिलिका गठबंधन के जरिए भी AI और सेमीकंडक्टर तकनीक को लेकर देशों के बीच सहयोग का नया ढांचा तैयार किया जा रहा है। जून 2026 में हुई इसकी बैठक के संयुक्त बयान पर 34 देशों ने हस्ताक्षर किए थे। भारत भी इस समूह का हिस्सा है। इसके साथ ही अमेरिका ने खाड़ी देशों के साथ चिप निर्माण और निवेश से जुड़े समझौतों को भी अपनी तकनीकी रणनीति से जोड़ा है। AI स्टैक और उससे जुड़ी तकनीक का अंतरराष्ट्रीय विस्तार अब अमेरिकी कूटनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है।
भारत ने इस बढ़ती प्रतिस्पर्धा को केवल चीन और अमेरिका के बीच तकनीकी दौड़ के रूप में देखने से परहेज किया है। ब्रिक्स सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चेतावनी दी कि तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों का हथियारकरण साझा वैश्विक प्रगति में बाधा बन सकता है। भारत का जोर इस बात पर है कि AI जैसी परिवर्तनकारी तकनीक पर विकासशील और गरीब देशों की भी पर्याप्त पहुंच होनी चाहिए। इससे वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए AI के अवसरों को व्यापक बनाने की भारतीय नीति स्पष्ट होती है।
AI को लेकर यूरोपीय संघ ने भी अलग रास्ता अपनाया है। यूरोपीय संघ के AI कानून के तहत उसके बाजार में काम करने वाली AI कंपनियों को निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा। इस तरह बाजार तक पहुंच को भी तकनीकी नियमन और वैश्विक प्रभाव के साधन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
चीन द्वारा ओपन-सोर्स AI मॉडल और साझा तकनीकी ढांचे को बढ़ावा देने तथा अमेरिका द्वारा अत्याधुनिक AI संसाधनों पर नियंत्रण मजबूत करने से आने वाले समय में वैश्विक तकनीकी ध्रुवीकरण बढ़ सकता है। AI मॉडल, चिप, दुर्लभ खनिज, डेटा सेंटर और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी तकनीकें अब आर्थिक प्रतिस्पर्धा के साथ रणनीतिक शक्ति का आधार भी बनती जा रही हैं। ऐसे में इसी महीने प्रस्तावित शी चिनफिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात में AI शासन, तकनीकी व्यापार और उन्नत कंप्यूटिंग संसाधनों की पहुंच प्रमुख मुद्दों में शामिल होने की संभावना है।
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