नई दिल्ली। केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत भारतीय ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) द्वारा पिछले दस वर्षों के ईंधन गुणवत्ता निरीक्षण, कथित धोखाधड़ी और उपभोक्ता शिकायतों से जुड़े विस्तृत रिकॉर्ड उपलब्ध कराने से इनकार करने के निर्णय को बरकरार रखा है। आयोग ने माना कि मांगी गई जानकारी देशभर के विभिन्न कार्यालयों में बिखरी हुई है और उसे एकत्र करना सार्वजनिक प्राधिकरण के संसाधनों पर असंगत बोझ डालेगा।
यह मामला उस अपील से जुड़ा था, जिसमें वर्ष 2014 से 2023 के बीच पेट्रोल पंपों पर घटिया गुणवत्ता या कम मात्रा में ईंधन वितरण की जांच, फ्यूल डिस्पेंसिंग मशीनों में चिप आधारित छेड़छाड़, दोषी आउटलेट्स के खिलाफ की गई कार्रवाई, उपभोक्ता शिकायतों और सतर्कता रिपोर्टों से संबंधित वर्षवार जानकारी मांगी गई थी।
अपीलकर्ता का तर्क था कि उपभोक्ता पहले से ही बढ़ती ईंधन कीमतों का बोझ उठा रहे हैं, इसलिए इस प्रकार की जानकारी सार्वजनिक हित में उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उनका कहना था कि डिजिटल युग में ऐसी सूचनाओं का केंद्रीय स्तर पर संधारण किया जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान IOCL ने आयोग को बताया कि मांगी गई जानकारी निर्धारित प्रारूप में उपलब्ध नहीं है। कंपनी ने कहा कि उसके देशभर में लगभग 42,000 खुदरा पेट्रोल पंप हैं और मानक संचालन प्रक्रिया के तहत प्रत्येक आउटलेट का वर्ष में कम से कम दो बार निरीक्षण किया जाता है। इस प्रकार हर वर्ष लगभग आठ लाख निरीक्षण किए जाते हैं।
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कंपनी ने दलील दी कि वर्ष 2014 से 2023 तक की जानकारी 16 राज्य कार्यालयों और 73 मंडलीय कार्यालयों में अलग-अलग उपलब्ध है। इतने बड़े पैमाने पर रिकॉर्ड एकत्र और संकलित करना RTI अधिनियम की धारा 7(9) के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण के संसाधनों का अनुपातहीन उपयोग होगा, इसलिए जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा सकती।
IOCL ने यह भी बताया कि सभी सक्रिय रिटेल आउटलेट्स का चरणबद्ध तरीके से डिजिटलीकरण किया जा रहा है ताकि परिचालन की बेहतर निगरानी की जा सके। इसके अलावा, उन्नत विनिर्देशों वाली ईंधन वितरण मशीनें स्थापित की जा रही हैं, जिनका प्रमाणीकरण सी-डैक (C-DAC) द्वारा किया गया है। कंपनी ने कहा कि पेट्रोल पंप कर्मचारियों को नियमित प्रशिक्षण दिया जाता है और उपभोक्ता जागरूकता कार्यक्रम भी लगातार संचालित किए जाते हैं।
सूचना आयुक्त ने अपने आदेश में कहा कि IOCL उपलब्ध नियमों, विपणन अनुशासन दिशानिर्देशों, वेबसाइट लिंक और अन्य उपलब्ध तथ्यात्मक जानकारी पहले ही अपीलकर्ता को उपलब्ध करा चुका है। आयोग ने माना कि शेष जानकारी उपलब्ध न कराने का निर्णय RTI अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप है और इस मामले में किसी अतिरिक्त हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
इसके साथ ही आयोग ने अपील खारिज कर दी। हालांकि, यह आदेश केवल सूचना उपलब्ध कराने के दायरे से संबंधित है और इसका ईंधन गुणवत्ता निरीक्षण या कथित अनियमितताओं के गुण-दोष पर कोई प्रत्यक्ष निष्कर्ष नहीं माना जाएगा।
