नई दिल्ली। भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) ने ₹1,34,166 कीमत वाला नया सैटेलाइट फोन पेश किया है, जिसे उन विशेष उपयोगकर्ताओं के लिए विकसित किया गया है जो ऐसे क्षेत्रों में कार्य करते हैं जहां पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं होता। यह डिवाइस आम उपभोक्ताओं के लिए नहीं है और इसे सामान्य रिटेल स्टोर या ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से नहीं खरीदा जा सकेगा।
यह हैंडसेट Inmarsat सैटेलाइट तकनीक पर आधारित है, जो मोबाइल टावरों के बजाय सीधे सैटेलाइट से जुड़कर संचार सुविधा प्रदान करता है। इसमें वॉइस कॉलिंग, आपातकालीन SOS संचार, प्रतिकूल मौसम में संचालन की क्षमता तथा लंबे समय तक चलने वाली बैटरी जैसी विशेषताएं उपलब्ध हैं, जिससे यह दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उपयोग के लिए उपयुक्त बनता है।
प्रीमियम स्मार्टफोनों में उपलब्ध सीमित सैटेलाइट कनेक्टिविटी, जो मुख्य रूप से केवल आपातकालीन संदेश भेजने तक सीमित होती है, के विपरीत BSNL का यह सैटेलाइट फोन सीधे सैटेलाइट नेटवर्क के माध्यम से वॉइस कॉलिंग की सुविधा देता है। इससे ऐसे क्षेत्रों में भी संचार संभव होगा जहां सेलुलर नेटवर्क उपलब्ध नहीं है।
BSNL के अनुसार, यह सैटेलाइट फोन मुख्य रूप से रक्षा बलों, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), सीमा सुरक्षा एजेंसियों तथा उन दूरस्थ गांवों और क्षेत्रों के लिए तैयार किया गया है जहां अभी तक पारंपरिक दूरसंचार सेवाएं नहीं पहुंची हैं।
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कंपनी ने स्पष्ट किया है कि इच्छुक उपयोगकर्ता इस डिवाइस को सीधे बाजार से नहीं खरीद सकेंगे। इसके लिए BSNL से संपर्क कर सैटेलाइट संचार की आवश्यकता का उचित कारण प्रस्तुत करना होगा, जिसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उपलब्धता पर निर्णय लिया जाएगा।
BSNL ने फिलहाल इस नए सैटेलाइट फोन के टैरिफ या सेवा योजनाओं की घोषणा नहीं की है। हालांकि, कंपनी पहले से IsatPhone 2 नामक सैटेलाइट फोन भी उपलब्ध करा रही है, जिसकी कीमत लगभग ₹90,000 है। उस सेवा के लिए वाणिज्यिक और सरकारी उपयोगकर्ताओं के लिए अलग-अलग टैरिफ योजनाएं लागू हैं।
यह लॉन्च BSNL की व्यापक सैटेलाइट संचार रणनीति का भी हिस्सा है। सैटेलाइट फोन के अलावा कंपनी Viasat के सहयोग से Direct-to-Device (D2D) सैटेलाइट संचार सेवा भी शुरू कर चुकी है, जिसका उद्देश्य उन क्षेत्रों में कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है जहां पारंपरिक मोबाइल या ब्रॉडबैंड नेटवर्क नहीं पहुंचता।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में सैटेलाइट संचार सेवाओं का विस्तार आने वाले वर्षों में और तेज हो सकता है, क्योंकि रक्षा, आपदा प्रबंधन, समुद्री परिचालन, दूरस्थ औद्योगिक क्षेत्रों और ग्रामीण इलाकों में विश्वसनीय संचार की मांग लगातार बढ़ रही है।
