नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने बहुचर्चित कथित खरीद घोटाले की जांच के बीच स्वास्थ्य प्रशासन में बड़ा अंतरिम बदलाव करते हुए स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (Directorate General of Health Services-DGHS) के नियमित कामकाज की जिम्मेदारी तीन वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों को सौंप दी है। यह निर्णय पूर्व DGHS निदेशक की गिरफ्तारी, पद से हटाए जाने और निलंबन के बाद लिया गया है, ताकि विभाग के प्रशासनिक और वित्तीय कार्य बिना किसी बाधा के जारी रह सकें। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू होगी और संबंधित अधिकारी अपने मौजूदा दायित्वों के साथ अतिरिक्त जिम्मेदारी भी निभाएंगे।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, गुरु तेग बहादुर (GTB) अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर को DGHS निदेशक के लिए प्रथम लिंक अधिकारी नियुक्त किया गया है। वहीं, डॉ. हेडगेवार आरोग्य संस्थान के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट को द्वितीय लिंक अधिकारी तथा लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट को तृतीय लिंक अधिकारी बनाया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश पूर्व में जारी निर्देशों का स्थान लेगा और तत्काल प्रभाव से लागू रहेगा।
सरकार के अनुसार इन अधिकारियों को DGHS निदेशक के नियमित प्रशासनिक एवं वित्तीय कार्यों की देखरेख की जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि यह अतिरिक्त दायित्व उनके वर्तमान पद और कार्यभार के अतिरिक्त होगा तथा इसके लिए किसी प्रकार का अतिरिक्त वेतन या भत्ता देय नहीं होगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य विभागीय कार्यों की निरंतरता बनाए रखना और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े निर्णयों में किसी प्रकार की प्रशासनिक रुकावट नहीं आने देना है।
यह प्रशासनिक फैसला ऐसे समय लिया गया है जब पूर्व DGHS निदेशक कथित बहु-करोड़ रुपये के खरीद घोटाले की जांच का सामना कर रही हैं। आरोप है कि DGHS के अधीन कार्यरत केंद्रीय खरीद एजेंसी (Central Procurement Agency) के माध्यम से दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और अन्य स्वास्थ्य सामग्रियों की खरीद में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं हुईं। मामले की जांच दिल्ली की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) कर रही है।
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जांच एजेंसी ने कथित अनियमितताओं के सिलसिले में पूर्व DGHS निदेशक को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी से पहले उन्हें मई में पद से हटा दिया गया था और बाद में विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित रहने तक निलंबित कर दिया गया। जांच एजेंसियां खरीद प्रक्रिया, निविदाओं, वित्तीय लेनदेन, स्वीकृति प्रक्रियाओं और संबंधित दस्तावेजों की विस्तृत जांच कर रही हैं।
मामले की सुनवाई के दौरान पूर्व DGHS निदेशक ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) में अपने तबादले को चुनौती दी थी। उन्होंने दावा किया कि सतर्कता जांच के दौरान उन्होंने अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग किया था। उनके अनुसार खरीद प्रक्रिया की निरंतरता बनाए रखने के लिए उन्होंने आवश्यक दस्तावेजों और तथाकथित “शैडो फाइलों” की प्रतियां उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया था। हालांकि इस दावे पर अंतिम निर्णय संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के तहत होना बाकी है।
इस मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। इससे पहले ACB दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और स्वास्थ्य संबंधी अन्य सामग्रियों की खरीद में कथित अनियमितताओं के आरोपों के संबंध में दो अन्य पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों को भी गिरफ्तार कर चुकी है। जांच एजेंसी वित्तीय रिकॉर्ड, खरीद दस्तावेजों, निविदा प्रक्रिया और विभागीय अनुमोदनों का गहन विश्लेषण कर रही है ताकि पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने लाई जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में खरीद प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और जवाबदेह होना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि किसी भी स्तर की अनियमितता का सीधा प्रभाव सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं और सार्वजनिक धन के उपयोग पर पड़ सकता है। इसलिए ऐसे मामलों में दस्तावेजी साक्ष्यों, वित्तीय लेनदेन और प्रशासनिक निर्णयों की निष्पक्ष जांच बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
फिलहाल दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि नई अंतरिम व्यवस्था केवल विभागीय कार्यों की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए लागू की गई है, जबकि कथित खरीद घोटाले की जांच अपने निर्धारित कानूनी और प्रशासनिक ढांचे के तहत जारी रहेगी। जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और यदि आवश्यकता हुई तो मामले में और अधिकारियों या संबंधित व्यक्तियों से भी पूछताछ की जा सकती है।
