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Home»Fraud Alert»हीरो फिनकॉर्प के खाते से ₹12.84 करोड़ की साइबर ठगी, बैंक मैनेजर समेत पांच गिरफ्तार
Fraud Alert

हीरो फिनकॉर्प के खाते से ₹12.84 करोड़ की साइबर ठगी, बैंक मैनेजर समेत पांच गिरफ्तार

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksSeptember 17, 2026No Comments5 Mins Read
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317 अनधिकृत डिजिटल लेनदेन के जरिए 34 खातों में भेजी गई रकम; फर्जी एपीके से बैंक खातों का दूर बैठकर नियंत्रण, टेलीग्राम के जरिए क्रिप्टो में बदलकर विदेश भेजने का आरोप, ₹1.70 करोड़ की राशि फ्रीज
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नई दिल्ली। गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी हीरो फिनकॉर्प के कॉर्पोरेट खाते से कथित तौर पर ₹12.84 करोड़ की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटजिक ऑपरेशंस (आईएफएसओ) इकाई ने मामले की जांच के दौरान अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़े कथित साइबर नेटवर्क का पता लगाते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक निजी बैंक का रिलेशनशिप मैनेजर भी शामिल है। पुलिस ने ठगी की रकम में से ₹1.70 करोड़ को अलग-अलग बैंक खातों में फ्रीज कराने का दावा किया है।
मामला तब सामने आया जब कंपनी को बैंक के सिस्टम अलर्ट के जरिए अपने कॉर्पोरेट खाते से संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिली। जांच के मुताबिक, खाते से बिना अनुमति 317 डिजिटल लेनदेन किए गए और कुल ₹12,84,09,997 की रकम 34 अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर की गई। शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच को साइबर अपराध की विशेषज्ञ टीम को सौंपा गया।
जांच में टेलीग्राम के जरिए विदेश में सक्रिय कथित साइबर अपराधियों से संपर्क की बात सामने आई। पुलिस के अनुसार, भारत में खातों में पहुंची ठगी की रकम को क्रिप्टोकरेंसी, खासकर यूएसडीटी, में बदलकर विदेश स्थित कथित संचालकों तक पहुंचाया जाता था। जांचकर्ताओं ने इस नेटवर्क में बैंक खातों की व्यवस्था करने, उन्हें संचालित करने और रकम को आगे भेजने के लिए अलग-अलग स्तरों पर लोगों के इस्तेमाल की बात कही है।

फर्जी एपीके से खातों पर नियंत्रण का आरोप

पुलिस के मुताबिक, नेटवर्क ने एक आरोपी के मोबाइल फोन में कथित फर्जी एपीके फाइल इंस्टॉल कराई थी। इसके जरिए उसके बैंक खातों को दूर बैठे लोग नियंत्रित करते थे। जांच में आरोप है कि संबंधित व्यक्ति को दिल्ली के एक होटल में ठहराकर उसके बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया। खातों में रकम पहुंचने के बाद उसे अलग-अलग माध्यमों से आगे भेजा गया और बाद में क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेश ट्रांसफर किया गया।
जांचकर्ताओं के अनुसार, नेटवर्क में शामिल बैंक रिलेशनशिप मैनेजर ने कथित तौर पर फर्जी नाम से बैंक खाते खुलवाने में मदद की और अन्य आरोपियों को नेटवर्क के मुख्य संचालकों से जोड़ने में भूमिका निभाई। दूसरे आरोपियों पर बैंक खातों को संचालित करने और उनमें आई रकम को आगे भेजने के बदले कमीशन लेने का आरोप है।
एक आरोपी के दो बैंक खातों में ₹1.10 करोड़ से अधिक की कथित ठगी की रकम पहुंचने की बात सामने आई है। इनमें से एक खाता देशभर में दर्ज 43 साइबर शिकायतों से जुड़ा पाया गया। एक अन्य खाते में करीब ₹80 लाख की रकम पहुंचने का दावा किया गया है, जबकि एक दूसरे आरोपी के खाते में ₹60 हजार आने और उसके एटीएम से नकदी निकाले जाने की जानकारी जांच में सामने आई।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

देशभर में कार्रवाई के दौरान पांच गिरफ्तारियां

मामले की जांच के दौरान राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश समेत अलग-अलग राज्यों में कार्रवाई की गई। पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें बैंकिंग क्षेत्र से जुड़ा एक व्यक्ति, बैंक खातों को उपलब्ध कराने और संचालित करने वाले कथित सहयोगी तथा ठगी की रकम प्राप्त करने वाले लोग शामिल हैं। पुलिस आरोपियों के बीच संपर्क और पैसों के लेनदेन की कड़ियों की जांच कर रही है।
जांच में पांच मोबाइल फोन, चेकबुक और एक कारोबारी फर्म की रबर स्टांप बरामद होने की बात कही गई है। इन उपकरणों और दस्तावेजों की जांच से कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य बैंक खातों और लेनदेन का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
साइबर अपराध विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह के मामलों में बैंकिंग प्रणाली तक पहुंच हासिल करने के लिए किसी एक तरीके पर निर्भर रहने के बजाय कई स्तरों पर खातों, उपकरणों और डिजिटल संचार का इस्तेमाल किया जाता है। साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, फर्जी एपीके जैसे माध्यमों से मोबाइल डिवाइस पर नियंत्रण हासिल होने की स्थिति में बैंकिंग ऐप, संदेश और प्रमाणीकरण से जुड़ी संवेदनशील जानकारी जोखिम में पड़ सकती है। ऐसे मामलों में केवल ओटीपी साझा न करना पर्याप्त सुरक्षा नहीं है; डिवाइस पर अनजान एप्लिकेशन की मौजूदगी और असामान्य गतिविधियों पर भी नजर रखना जरूरी है।
पुलिस के अनुसार, जांच में सामने आए कथित नेटवर्क के अन्य प्रमुख सदस्यों की पहचान की जा रही है। इनमें भारत के अलग-अलग हिस्सों और विदेश में सक्रिय लोगों की भूमिका की भी जांच हो रही है। अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और जब्त डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच के बाद ठगी की पूरी रकम, अन्य खातों और संभावित पीड़ित संस्थाओं से जुड़ी जानकारी सामने आ सकती है।
हीरो फिनकॉर्प एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी है और उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर कंपनी अपनी डिजिटल सेवाओं तथा वित्तीय उत्पादों की जानकारी देती है।
मामले में पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कॉर्पोरेट खाते तक कथित तौर पर पहुंच कैसे बनाई गई, 34 खातों के नेटवर्क में रकम किस क्रम से भेजी गई और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए विदेश तक पहुंचाई गई राशि का अंतिम गंतव्य क्या था। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे साइबर नेटवर्क और उससे जुड़े वित्तीय नुकसान की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
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