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Home»Policy Watch»पिछले पांच वर्षों में ₹1.42 लाख करोड़ की बैंक धोखाधड़ी के मामले सामने आए, केवल ₹6,389 करोड़ की हुई वसूली: सरकार
Policy Watch

पिछले पांच वर्षों में ₹1.42 लाख करोड़ की बैंक धोखाधड़ी के मामले सामने आए, केवल ₹6,389 करोड़ की हुई वसूली: सरकार

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksJuly 21, 2026No Comments4 Mins Read
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वित्त मंत्रालय ने संसद में दी जानकारी; सरकारी और निजी बैंकों में हजारों धोखाधड़ी के मामलों की जांच जारी, विशेषज्ञ बोले—रोकथाम के लिए तकनीक और निगरानी दोनों को मजबूत करना होगा
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देश में बैंकिंग धोखाधड़ी का खतरा लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। केंद्र सरकार ने संसद को बताया कि पिछले पांच वित्तीय वर्षों के दौरान बैंकों में ₹1.42 लाख करोड़ से अधिक मूल्य की धोखाधड़ी के मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें अब तक ₹6,389 करोड़ की राशि की वसूली की जा सकी है। सरकार के अनुसार, शेष मामलों में जांच, कानूनी कार्रवाई, परिसंपत्तियों की पहचान और रिकवरी की प्रक्रिया विभिन्न एजेंसियों एवं बैंकों के स्तर पर जारी है।

वित्त मंत्रालय की ओर से संसद में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, बैंक धोखाधड़ी के मामलों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, निजी बैंक और अन्य अनुसूचित बैंक शामिल हैं। इन मामलों में फर्जी ऋण, जाली दस्तावेजों के आधार पर कर्ज प्राप्त करना, बैंक गारंटी में अनियमितता, खातों में हेरफेर, साइबर माध्यम से वित्तीय धोखाधड़ी और अन्य बैंकिंग अनियमितताएं शामिल हैं।

सरकार ने स्पष्ट किया कि बैंकिंग क्षेत्र में धोखाधड़ी की रोकथाम के लिए नियामकीय ढांचे को लगातार मजबूत किया जा रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों को जोखिम आधारित निगरानी, आंतरिक नियंत्रण प्रणाली, डिजिटल लेनदेन की रियल-टाइम मॉनिटरिंग, संदिग्ध खातों की पहचान और समयबद्ध रिपोर्टिंग जैसे कई उपाय लागू करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही बड़े वित्तीय लेनदेन और उच्च जोखिम वाले खातों की विशेष निगरानी भी की जा रही है।

सरकार के अनुसार, धोखाधड़ी का पता चलते ही संबंधित बैंक नियमानुसार जांच शुरू करते हैं और आवश्यकता पड़ने पर प्रवर्तन एजेंसियों, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), प्रवर्तन निदेशालय (ED) तथा अन्य सक्षम एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित किया जाता है। जिन मामलों में आपराधिक साक्ष्य मिलते हैं, उनमें प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाती है तथा आरोपियों की संपत्तियों की पहचान कर वसूली की प्रक्रिया शुरू की जाती है।

संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, बैंकिंग प्रणाली में तकनीकी निगरानी को लगातार उन्नत किया जा रहा है ताकि संदिग्ध लेनदेन का प्रारंभिक स्तर पर ही पता लगाया जा सके। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डेटा एनालिटिक्स और व्यवहार आधारित जोखिम विश्लेषण जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर धोखाधड़ी के पैटर्न की पहचान करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके साथ ही बैंक कर्मचारियों को भी वित्तीय अपराधों की पहचान और रोकथाम के लिए नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

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विशेषज्ञों का मानना है कि बैंकिंग धोखाधड़ी केवल तकनीकी कमजोरी का परिणाम नहीं होती, बल्कि कई मामलों में फर्जी दस्तावेज, पहचान की चोरी, अंदरूनी मिलीभगत, शेल कंपनियों का उपयोग और डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए केवल तकनीकी समाधान पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि मजबूत अनुपालन व्यवस्था, प्रभावी ऑडिट और समय पर जांच भी उतनी ही आवश्यक है।

सरकार ने यह भी कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने और वित्तीय प्रणाली में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए नियामकीय संस्थाएं लगातार निगरानी कर रही हैं। बैंकों को संदिग्ध खातों की शीघ्र पहचान, जोखिम प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करने और धोखाधड़ी के मामलों की समयबद्ध रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि संभावित नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि आधुनिक बैंकिंग धोखाधड़ी अब पारंपरिक वित्तीय अपराधों से आगे बढ़कर डिजिटल तकनीक, सोशल इंजीनियरिंग, फर्जी दस्तावेजों और अंतरराज्यीय नेटवर्क का उपयोग करने लगी है। उन्होंने कहा कि बैंकों को रियल-टाइम फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम, बहु-स्तरीय सत्यापन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित जोखिम विश्लेषण और संदिग्ध लेनदेन की तत्काल निगरानी को और मजबूत करना होगा। साथ ही ग्राहकों को भी अपने बैंकिंग क्रेडेंशियल, ओटीपी, इंटरनेट बैंकिंग विवरण और केवाईसी संबंधी जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।

सरकार ने दोहराया कि बैंकिंग धोखाधड़ी के मामलों में दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई जारी है। जांच एजेंसियां वित्तीय लेनदेन, दस्तावेजों और संपत्तियों की पड़ताल कर रही हैं ताकि अधिक से अधिक राशि की वसूली की जा सके और भविष्य में ऐसे वित्तीय अपराधों की पुनरावृत्ति को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।

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