व्हाट्सएप पर आए फर्जी शादी के निमंत्रण ने बेंगलुरु के एक वरिष्ठ वन अधिकारी को करीब ₹9.96 लाख का नुकसान पहुंचा दिया। पुलिस के अनुसार, अधिकारी ने शादी के निमंत्रण के रूप में भेजी गई एक APK (Android Package Kit) फाइल डाउनलोड कर खोली, जिसके बाद साइबर अपराधियों ने कथित तौर पर उनके मोबाइल फोन पर नियंत्रण हासिल कर लिया और बैंक खाते से कई अनधिकृत लेनदेन कर लगभग ₹9.96 लाख निकाल लिए। मामले में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
पुलिस के अनुसार, पीड़ित रमेशबाबू वी (50) बेंगलुरु के यशवंतपुर क्षेत्र के निवासी हैं और वर्तमान में कर्नाटक वन विभाग में डिप्टी रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं। शिकायत के मुताबिक, 14 जुलाई को उन्हें व्हाट्सएप पर एक संदेश मिला, जिसमें शादी का निमंत्रण होने का दावा किया गया था। संदेश के साथ एक APK फाइल संलग्न थी, जिसे उन्होंने डाउनलोड कर खोल दिया।
जांच में सामने आया कि फाइल खोलने के कुछ ही मिनटों बाद शाम लगभग 4:40 बजे से 4:55 बजे के बीच उनके मोबाइल पर बैंक लेनदेन के लगातार संदेश आने लगे। जब उन्होंने अपने बैंक खाते की जांच की तो पाया कि उनकी जानकारी या अनुमति के बिना कई ऑनलाइन ट्रांजैक्शन किए जा चुके थे। पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधियों ने उनके बैंक ऑफ बड़ौदा खाते से कुल ₹9,96,659 विभिन्न ट्रांजैक्शनों के जरिए निकाल लिए। जांच के दौरान यह भी पता चला कि मोबाइल फोन से जुड़े सभी UPI ID भी हटा दिए गए थे।
घटना के अगले दिन 15 जुलाई को पीड़ित ने नॉर्थ CEN क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अब डिजिटल साक्ष्यों, बैंकिंग रिकॉर्ड और मोबाइल डिवाइस की जांच कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि धनराशि किन खातों में भेजी गई और इसके पीछे सक्रिय साइबर गिरोह की पहचान कैसे की जाए।
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पुलिस ने बताया कि इसी प्रकार का एक मामला मई 2026 में भी सामने आया था, जिसमें एक 42 वर्षीय कारोबारी ने व्हाट्सएप पर मिले शादी के निमंत्रण वाले संदेश में मौजूद APK फाइल पर क्लिक कर दिया था। इसके बाद उनका मोबाइल भी हैक हो गया और साइबर अपराधियों ने उनके बैंक खाते से ₹5 लाख की ठगी कर ली। अधिकारियों के अनुसार, अपराधी भावनात्मक या सामान्य प्रतीत होने वाले संदेशों का इस्तेमाल कर लोगों को APK फाइल डाउनलोड करने के लिए प्रेरित करते हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही कोई व्यक्ति इस प्रकार की दुर्भावनापूर्ण APK फाइल इंस्टॉल करता है, साइबर अपराधी उसके मोबाइल पर नियंत्रण हासिल कर सकते हैं। इसके बाद वे बैंकिंग ऐप, यूपीआई एप्लिकेशन, कैमरा, संपर्क सूची, संदेश और अन्य संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने में सक्षम हो सकते हैं। यही कारण है कि अनजान नंबरों से प्राप्त APK फाइलों या ऐप इंस्टॉल करने वाले लिंक पर कभी भी क्लिक नहीं करना चाहिए।
कर्नाटक पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में APK आधारित साइबर ठगी के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2024 में ऐसे लगभग 325 मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 944 हो गई। वर्ष 2026 में केवल अप्रैल तक ही 458 मामले सामने आ चुके हैं। पुलिस के अनुसार, अपराधी अक्सर “Wedding Invite”, “PM Kisan Beneficiary”, “India Post Address”, “RTO Traffic Challan”, “ITR Refund”, “Amazon Part-Time Jobs” और “PAN KYC Mandatory Verification” जैसे नामों वाली APK फाइलें भेजकर लोगों को निशाना बनाते हैं।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि APK फाइलें सामान्य दस्तावेज नहीं बल्कि मोबाइल एप्लिकेशन इंस्टॉलर होती हैं। यदि इन्हें किसी अज्ञात स्रोत से डाउनलोड कर इंस्टॉल किया जाता है, तो साइबर अपराधी मोबाइल डिवाइस का नियंत्रण हासिल कर बैंकिंग जानकारी, ओटीपी, संदेश और अन्य संवेदनशील डेटा तक पहुंच बना सकते हैं। उन्होंने सलाह दी कि किसी भी अनजान नंबर से प्राप्त APK फाइल, लिंक या ऐप को डाउनलोड न करें। यदि गलती से ऐसी फाइल इंस्टॉल हो जाए और बैंक खाते में संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे, तो तुरंत बैंक को सूचित करें, मोबाइल का इंटरनेट बंद करें और बिना देरी किए साइबर पुलिस से संपर्क करें, क्योंकि शुरुआती कार्रवाई से धनराशि की रिकवरी की संभावना बढ़ जाती है।
