नई दिल्ली। भारत सरकार ने अमेरिका द्वारा कुछ भारतीय निर्यात उत्पादों पर प्रस्तावित 12.5% अतिरिक्त टैरिफ लगाने के फैसले का औपचारिक रूप से विरोध किया है। सरकार ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) को नौ पन्नों का विस्तृत जवाब भेजकर प्रस्तावित शुल्क पर पुनर्विचार करने की मांग की है। भारत ने अपने जवाब में भारतीय निर्यात में जबरन मजदूरी (Forced Labour) के इस्तेमाल के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इस कार्रवाई के कानूनी आधार और जांच प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।
सरकार ने USTR को भेजे गए अपने जवाब में कहा है कि भारतीय निर्यात उत्पादों के निर्माण में जबरन मजदूरी के इस्तेमाल का कोई विश्वसनीय या ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं है। भारत का कहना है कि देश में लागू श्रम कानून जबरन मजदूरी पर प्रभावी रोक लगाते हैं और अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों के अनुरूप श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
प्रस्तावित अतिरिक्त टैरिफ अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि द्वारा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में कथित श्रम प्रथाओं की समीक्षा के तहत विचाराधीन है। हालांकि भारत का कहना है कि प्रस्तावित कार्रवाई तथ्यों पर आधारित नहीं है और भारतीय निर्यात तथा कथित जबरन मजदूरी के बीच कोई प्रत्यक्ष संबंध स्थापित नहीं किया गया है।
भारत ने अपने जवाब में यह भी कहा कि USTR की जांच प्रक्रिया निर्धारित कानूनी मानकों के अनुरूप नहीं रही। सरकार का तर्क है कि जांच के दौरान अमेरिकी व्यापार अधिनियम (US Trade Act) के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं का समुचित पालन नहीं किया गया और किसी भी देश के संदर्भ में पर्याप्त तथा स्वतंत्र विश्लेषण किए बिना अतिरिक्त शुल्क का प्रस्ताव रखा गया।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्क का कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है। भारत के अनुसार, जांच के दौरान देश के श्रम कानूनों, नियामकीय व्यवस्था, प्रवर्तन तंत्र और श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए मौजूद संस्थागत व्यवस्थाओं का समुचित मूल्यांकन नहीं किया गया।
अपने जवाब में भारत ने कहा कि देश में जबरन मजदूरी पर रोक लगाने, श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करने और विभिन्न क्षेत्रों में श्रम कानूनों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए मजबूत कानूनी एवं संस्थागत ढांचा मौजूद है। सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था जिम्मेदार विनिर्माण और निष्पक्ष व्यापार के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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कई भारतीय कंपनियों ने भी प्रस्तावित अतिरिक्त टैरिफ का विरोध किया है। उनका कहना है कि यदि यह शुल्क लागू किया जाता है तो भारतीय निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित होगी, अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद महंगे हो जाएंगे और बिना पर्याप्त साक्ष्यों के अनावश्यक व्यापारिक बाधाएं उत्पन्न होंगी।
भारत सरकार ने USTR से आग्रह किया है कि वह भारत द्वारा प्रस्तुत कानूनी और तथ्यात्मक पक्ष पर गंभीरता से विचार करते हुए प्रस्तावित 12.5% अतिरिक्त टैरिफ को वापस ले या उस पर पुनर्विचार करे। सरकार का कहना है कि किसी भी व्यापारिक कार्रवाई का आधार वस्तुनिष्ठ साक्ष्य, पारदर्शी प्रक्रिया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य कानूनी सिद्धांत होने चाहिए।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब भारत और अमेरिका बाजार पहुंच, आपूर्ति श्रृंखला सहयोग, निवेश और द्विपक्षीय व्यापार सहित कई महत्वपूर्ण आर्थिक मुद्दों पर लगातार बातचीत कर रहे हैं। व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि प्रस्तावित अतिरिक्त टैरिफ से संबंधित क्षेत्रों के निर्यातकों पर प्रभाव पड़ सकता है और दोनों देशों के बीच भविष्य की व्यापारिक वार्ताओं पर भी इसका असर दिखाई दे सकता है।
अब USTR भारत सहित विभिन्न हितधारकों से प्राप्त जवाबों और टिप्पणियों की समीक्षा करने के बाद अंतिम निर्णय लेगा। इस फैसले पर भारतीय निर्यातकों, उद्योग संगठनों और नीति निर्माताओं की नजर रहेगी, क्योंकि इसका असर भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों और द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग की दिशा पर पड़ सकता है।
