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Home»क्राइम»रिवोल्यूट डेटा कांड में बड़ा खुलासा, ब्लॉकचेन से चुने 680 क्रिप्टो खाते और सरकारी पहचान का लिया सहारा
क्राइम

रिवोल्यूट डेटा कांड में बड़ा खुलासा, ब्लॉकचेन से चुने 680 क्रिप्टो खाते और सरकारी पहचान का लिया सहारा

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksSeptember 16, 2026No Comments4 Mins Read
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इटली के सरकारी ईमेल तंत्र का इस्तेमाल कर कानून प्रवर्तन अधिकारी बनकर मांगी गई ग्राहकों की गोपनीय जानकारी; बड़ी क्रिप्टो होल्डिंग वाले खातों को निशाना बनाने का दावा, 31 देशों के ग्राहक प्रभावित
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नई दिल्ली। डिजिटल बैंकिंग कंपनी रिवोल्यूट से करीब 680 ग्राहकों की संवेदनशील जानकारी कथित तौर पर हासिल करने के लिए साइबर अपराधियों ने तकनीकी सेंध के बजाय सरकारी पहचान और आधिकारिक ईमेल व्यवस्था का सहारा लिया। हमलावरों ने इटली के सरकारी ईमेल तंत्र से जुड़े एक वास्तविक पते का इस्तेमाल करते हुए खुद को कानून प्रवर्तन अधिकारी बताया और कई महीनों तक रिवोल्यूट से अलग-अलग ग्राहकों की जानकारी मांगते रहे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निशाने पर खास तौर पर ऐसे ग्राहक थे जिनके खातों में बड़ी मात्रा में क्रिप्टोकरेंसी मौजूद थी।
मामले की सबसे अहम कड़ी यह सामने आई है कि हमलावरों ने कथित तौर पर ब्लॉकचेन विश्लेषण के जरिये रिवोल्यूट के उन खातों की पहचान की, जिनमें बड़ी क्रिप्टो होल्डिंग थी। इन्हें आम तौर पर क्रिप्टो ‘व्हेल’ कहा जाता है। इसके बाद सरकारी एजेंसी से जुड़े आधिकारिक ईमेल पते की विश्वसनीयता का फायदा उठाकर इन ग्राहकों से संबंधित विस्तृत जानकारी मांगी गई। शुरुआती तौर पर सामने आए विवरण में स्विट्जरलैंड और फ्रांस के ग्राहकों की संख्या अधिक होने की बात कही गई है, जबकि 31 अन्य देशों के ग्राहकों की जानकारी भी प्रभावित होने का दावा है।
हमलावरों ने कथित तौर पर कई चरणों में रिवोल्यूट को संदेश भेजे। इनमें कुछ ग्राहकों के नाम, पते, फोन नंबर और खातों से जुड़ी जानकारी मांगने के लिए इन्हें चल रही कानून प्रवर्तन जांच का हिस्सा बताया गया। बाद में खातों के लेनदेन और अन्य संवेदनशील विवरण भी मांगे गए। सरकारी डोमेन से आने वाले संदेशों को वैध मानकर जानकारी साझा किए जाने का आरोप है।
इटली की प्रमाणित सरकारी ईमेल व्यवस्था को पीईसी कहा जाता है। इसका इस्तेमाल सरकारी संस्थानों, कंपनियों और नागरिकों के बीच आधिकारिक तथा कानूनी संचार के लिए किया जाता है। इसकी वजह से इस माध्यम से भेजे गए संदेश सामान्य ईमेल की तुलना में अधिक विश्वसनीय माने जाते हैं। साइबर अपराधियों ने इसी भरोसे का फायदा उठाकर रिवोल्यूट की जांच और सत्यापन प्रक्रिया को भ्रमित करने की कोशिश की।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

मामले में यह भी सामने आया है कि कथित तौर पर साझा की गई जानकारी में पहचान से जुड़े दस्तावेज, संपर्क विवरण, बैंक खाते, आईबीएएन, खातों का विवरण और लेनदेन का इतिहास शामिल हो सकता है। कुछ ग्राहकों की क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित गतिविधियों की जानकारी भी इसमें होने की बात सामने आई है। हालांकि, कंपनी ने कहा है कि उसके आंतरिक सिस्टम या ग्राहकों के धन से सीधे छेड़छाड़ नहीं हुई। घटना का स्वरूप ग्राहकों की जानकारी को अनधिकृत तीसरे पक्ष के साथ साझा किए जाने से जुड़ा है।
रिवोल्यूट ने संदिग्ध गतिविधि का पता चलने के बाद संबंधित ईमेल पते को ब्लॉक करने और सरकारी एजेंसी, कानून प्रवर्तन तथा संबंधित नियामकीय संस्थाओं को सूचना देने की बात कही है। प्रभावित ग्राहकों से सीधे संपर्क कर उन्हें घटना की जानकारी देने का भी दावा किया गया है। इटली में मामले की जांच शुरू हो चुकी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि सरकारी ईमेल व्यवस्था तक अनधिकृत पहुंच कैसे हासिल की गई।
साइबर अपराध विशेषज्ञों के अनुसार, यह घटना बताती है कि मजबूत तकनीकी सुरक्षा के बावजूद पहचान आधारित धोखाधड़ी वित्तीय संस्थानों के लिए गंभीर जोखिम बन सकती है। यदि किसी अपराधी के पास वास्तविक सरकारी ईमेल खाते या डोमेन तक पहुंच हो, तो वह वैध प्रक्रिया का रूप देकर संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश कर सकता है। खासकर क्रिप्टो निवेशकों के मामले में पहचान, संपत्ति और लेनदेन संबंधी जानकारी एक साथ हासिल हो जाने पर आगे लक्षित ठगी, पहचान चोरी या दबाव बनाने वाले हमलों का जोखिम बढ़ सकता है।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, ऐसे मामलों में केवल ईमेल डोमेन की प्रामाणिकता को पर्याप्त सत्यापन नहीं माना जाना चाहिए। वित्तीय संस्थानों को संवेदनशील ग्राहक डेटा साझा करने से पहले अनुरोध करने वाली संस्था की स्वतंत्र पुष्टि, अधिकृत अधिकारी की पहचान और जांच से जुड़े दस्तावेजों का बहु-स्तरीय सत्यापन करना जरूरी है।
हमलावरों ने कथित तौर पर कुछ हासिल की गई जानकारी के स्क्रीनशॉट भी सार्वजनिक किए हैं। हालांकि, सामने आई सभी सामग्री की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है। हमलावरों की वास्तविक पहचान और पूरे अभियान के पीछे की मंशा भी स्पष्ट नहीं है। घटना की जांच आगे बढ़ने के साथ यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि सरकारी ईमेल तक पहुंच कैसे बनाई गई, कितने ग्राहकों का डेटा वास्तव में साझा हुआ और चोरी की गई जानकारी का आगे किस तरह इस्तेमाल किया गया।
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