देहरादून। गन्ना विकास परिषद डोईवाला के सरकारी बैंक खाते से अधिकारियों के कथित फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर रकम निजी खातों में ट्रांसफर किए जाने का मामला सामने आया है। परिषद के प्रभारी लेखाकार पर आरोप है कि उन्होंने अधिकारियों के हस्ताक्षरों को स्कैन कर बैंक एडवाइस तैयार की और परिषद के खाते से रकम अपने निजी बचत खातों में स्थानांतरित कर ली। शिकायत के आधार पर डोईवाला पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मामला वर्ष 2026-27 का बजट तैयार किए जाने के दौरान सामने आया। गन्ना विकास परिषद डोईवाला का बचत बैंक खाता स्थानीय पंजाब नेशनल बैंक शाखा में है। खाते का संचालन सहायक गन्ना आयुक्त देहरादून और परिषद के मंत्री के संयुक्त हस्ताक्षर से होता है। बजट तैयार करने के दौरान विभाग ने बैंक खाते की विस्तृत विवरणी की जांच की तो कई लेनदेन संदिग्ध पाए गए।
इसके बाद 23 जुलाई को विभागीय अधिकारियों ने बैंक शाखा पहुंचकर संबंधित बैंक वाउचर की जांच की। जांच के दौरान आरोप सामने आया कि प्रभारी लेखाकार ने अधिकारियों के वास्तविक हस्ताक्षरों को स्कैन कर उनका इस्तेमाल किया। इन स्कैन किए गए हस्ताक्षरों के आधार पर बैंक एडवाइस तैयार की गई और परिषद के खाते से कथित तौर पर निजी बचत खातों में रकम ट्रांसफर की गई।
शिकायत में बैंक रिकॉर्ड और लेनदेन से जुड़े वाउचर को भी जांच का आधार बनाया गया है। हालांकि सरकारी खाते से कथित तौर पर कितनी रकम निकाली या ट्रांसफर की गई, इसका अंतिम आंकड़ा अभी स्पष्ट नहीं है। पुलिस बैंक खाते के लेनदेन और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद रकम का वास्तविक विवरण जुटाएगी।
इस मामले में विभाग की ओर से 24 जुलाई को डोईवाला पुलिस को तहरीर दी गई थी। इसमें परिषद के अधिकारियों की ओर से कथित वित्तीय अनियमितताओं और फर्जी हस्ताक्षर के इस्तेमाल की शिकायत की गई। तहरीर मिलने के बाद पुलिस ने 15 सितंबर को भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(5) और 318(4) के तहत मुकदमा दर्ज किया।
पुलिस अब परिषद के बैंक खाते से हुए सभी संदिग्ध लेनदेन की जांच करेगी। इसके लिए बैंक वाउचर, बैंक एडवाइस, खाते की विवरणी और हस्ताक्षरों से संबंधित रिकॉर्ड खंगाले जाएंगे। जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि परिषद के खाते से कितनी रकम किस-किस निजी खाते में पहुंची और इन खातों से आगे किसी अन्य खाते में रकम स्थानांतरित की गई या नहीं।
जांच का एक अहम हिस्सा यह भी होगा कि बैंक में जमा कराए गए दस्तावेजों में इस्तेमाल हस्ताक्षर वास्तविक थे या स्कैन किए गए थे और संबंधित लेनदेन को बैंक की आंतरिक प्रक्रिया के तहत किस तरह मंजूरी मिली। पुलिस यह भी पता लगाएगी कि कथित रकम ट्रांसफर में प्रभारी लेखाकार के अलावा किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।
मामले की जानकारी संबंधित वरिष्ठ विभागीय और प्रशासनिक अधिकारियों को भी भेजी गई है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही कथित वित्तीय अनियमितता में कुल रकम, लेनदेन की संख्या और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। मुकदमा दर्ज होने के साथ ही बैंक रिकॉर्ड और दस्तावेजों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
