बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा की सुविधा देने वाली अपनी महत्वाकांक्षी ‘शक्ति’ योजना में कथित फर्जीवाड़े और दुरुपयोग को रोकने के लिए बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। राज्य सरकार अब लाभार्थियों के लिए एक विशेष स्मार्ट कार्ड प्रणाली लागू करने पर विचार कर रही है, जिसके तहत पात्रता सत्यापन के बाद ही मुफ्त यात्रा की सुविधा उपलब्ध होगी। सरकार का मानना है कि इस कदम से योजना का लाभ केवल वास्तविक पात्र लोगों तक पहुंचेगा और सरकारी राजस्व को होने वाले संभावित नुकसान पर भी अंकुश लगाया जा सकेगा।
शक्ति योजना कर्नाटक सरकार की प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं में शामिल है। इस योजना के तहत राज्य की महिलाओं को सरकारी बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा प्रदान की जाती है। योजना शुरू होने के बाद करोड़ों यात्राएं दर्ज की जा चुकी हैं और इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना गया है। हालांकि हाल के महीनों में सरकार के सामने ऐसी शिकायतें और आशंकाएं आईं कि कुछ लोग फर्जी आधार कार्ड अथवा अन्य गलत दस्तावेजों का उपयोग कर मुफ्त यात्रा का लाभ उठा रहे हैं।
इन्हीं चिंताओं के मद्देनजर परिवहन विभाग एक नई सत्यापन प्रणाली विकसित कर रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, लाभार्थियों को पहले अपनी पात्रता साबित करनी होगी और उसके बाद उन्हें एक समर्पित स्मार्ट कार्ड जारी किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्ड मुफ्त यात्रा के अधिकार का प्रमाण होगा और इसके बिना योजना का लाभ लेना संभव नहीं होगा।
प्रस्ताव के तहत कर्नाटक का मतदाता पहचान पत्र पात्रता सत्यापन का एक महत्वपूर्ण आधार बन सकता है। इसके साथ आधार कार्ड भी प्रस्तुत करना होगा। दोनों दस्तावेजों की जांच और सत्यापन के बाद ही लाभार्थी को स्मार्ट कार्ड जारी किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल राज्य के वास्तविक पात्र निवासी ही योजना का लाभ प्राप्त करें।
अधिकारियों के अनुसार प्रत्येक स्मार्ट कार्ड में लाभार्थी का नाम, फोटो, आधार संख्या और आवासीय पता जैसी महत्वपूर्ण जानकारी दर्ज होगी। कार्ड को गैर-हस्तांतरणीय बनाने की भी योजना है, ताकि इसका उपयोग केवल वही व्यक्ति कर सके जिसके नाम पर इसे जारी किया गया है। इससे किसी अन्य व्यक्ति द्वारा कार्ड के दुरुपयोग की संभावना कम हो जाएगी।
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सरकार राज्यभर में लगभग 3 करोड़ स्मार्ट कार्ड जारी करने की संभावना पर काम कर रही है। प्रारंभिक चरण में इस व्यवस्था को बेंगलुरु महानगर परिवहन निगम (BMTC) के दायरे में पायलट परियोजना के रूप में लागू किया जा सकता है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो बाद में इसे राज्य की अन्य परिवहन निगम सेवाओं तक विस्तारित किया जाएगा।
परिवहन विभाग कार्ड को भविष्य की सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों से भी जोड़ने पर विचार कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार कार्ड में नियर फील्ड कम्युनिकेशन (NFC) तकनीक शामिल की जा सकती है। इससे भविष्य में यही कार्ड नम्मा मेट्रो सहित अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में भी उपयोग किया जा सकेगा। सरकार की दीर्घकालिक योजना एकीकृत परिवहन पहचान प्रणाली विकसित करने की है, जिससे यात्रियों को अलग-अलग टिकट या कार्ड की आवश्यकता न पड़े।
यह प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है जब राज्य सरकार कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों के सत्यापन पर विशेष जोर दे रही है। हाल ही में उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा था कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वाले लोगों के नाम राज्य की मतदाता सूची में दर्ज होने चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि पात्र लोगों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी, जबकि अपात्र लाभार्थियों को चिन्हित कर व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्मार्ट कार्ड प्रणाली प्रभावी ढंग से लागू होती है तो इससे शक्ति योजना की विश्वसनीयता और पारदर्शिता दोनों मजबूत होंगी। साथ ही सरकार को वास्तविक लाभार्थियों का सटीक डाटाबेस तैयार करने में भी मदद मिलेगी। हालांकि इतने बड़े स्तर पर सत्यापन और कार्ड वितरण की प्रक्रिया प्रशासनिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है।
फिलहाल योजना अंतिम रूप लेने की प्रक्रिया में है, लेकिन यह स्पष्ट है कि कर्नाटक सरकार मुफ्त बस यात्रा योजना को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। इससे भविष्य में कल्याणकारी योजनाओं के संचालन का नया मॉडल भी विकसित हो सकता है।
