बेंगलुरु। कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गई है। 27 अक्टूबर को प्रकाशित इस सूची में राज्य के कुल मतदाताओं की संख्या 4.54 करोड़ से अधिक दर्ज की गई है। पिछली मतदाता सूची में शामिल 5,54,32,814 मतदाताओं की तुलना में 99.7 लाख से अधिक नाम कम हुए हैं। मतदाता सूची में हुए इस बड़े बदलाव ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाताओं के नामों की जांच को लेकर राजनीतिक बहस को फिर तेज कर दिया है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी, कर्नाटक के कार्यालय के मुताबिक, अंतिम सूची में 2.24 करोड़ से अधिक पुरुष मतदाता और 2.29 करोड़ से अधिक महिला मतदाता शामिल हैं। राज्य में तीसरे लिंग के 2,841 मतदाता भी दर्ज किए गए हैं। पुनरीक्षण के दौरान मतदान केंद्रों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। अब राज्य में कुल 41,888 मतदान केंद्र हैं, जो पहले की तुलना में 390 अधिक हैं।
मसौदा सूची में थे 4.46 करोड़ मतदाता
कर्नाटक में अंतिम मतदाता सूची जारी होने से पहले 24 अगस्त को मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित की गई थी। इसमें कुल 4,46,35,975 मतदाताओं के नाम शामिल थे। इसके बाद मतदाता सूची में नाम शामिल कराने, पहले से दर्ज विवरण हटाने या उनमें सुधार कराने के लिए दावे और आपत्तियां दर्ज करने का अवसर दिया गया। यह प्रक्रिया 23 सितंबर को समाप्त हुई।
इस अवधि में मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय को करीब 19.5 लाख आवेदन प्राप्त हुए। इन आवेदनों में नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, सूची से नाम हटाने और मतदाता विवरण में सुधार करने से संबंधित अनुरोध शामिल थे। हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों से यह स्पष्ट नहीं होता कि इन आवेदनों में से कितनों को मंजूरी मिली और कितनों को अस्वीकार किया गया।
विशेष गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य
भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची की जांच और अद्यतन करने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू की थी। इसका उद्देश्य मतदाताओं के विवरण का सत्यापन करना और चुनावी डेटाबेस को अधिक सटीक बनाना है। इस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में दर्ज जानकारियों की समीक्षा की जाती है और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नाम जोड़ने, हटाने तथा संशोधित करने की कार्रवाई की जाती है।
कर्नाटक में इस अभ्यास के दौरान मतदाताओं की संख्या में बड़ी कमी सामने आई है। पिछली सूची में 5.54 करोड़ से अधिक मतदाता दर्ज थे, जबकि अंतिम सूची में यह संख्या घटकर 4.54 करोड़ से अधिक रह गई। इस अंतर के कारण राज्य की मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर सवाल उठ रहे हैं।
कांग्रेस और विपक्ष ने उठाए सवाल
कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी दलों की आपत्तियां मुख्य रूप से पुनरीक्षण प्रक्रिया और मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर हैं। इतनी बड़ी संख्या में नाम कम होने के बाद सूची की जांच, नाम हटाने के आधार और पात्र मतदाताओं के अधिकारों को लेकर बहस महत्वपूर्ण हो गई है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में हटाए गए नामों का विस्तृत वर्गीकरण नहीं दिया गया है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि कुल कमी में कितने नाम मृत मतदाताओं, स्थान बदलने, दोहरी प्रविष्टियों या अन्य कारणों से हटाए गए। यह अंतर समझने के लिए निर्वाचन अधिकारियों की विस्तृत जानकारी और पुनरीक्षण से जुड़े आधिकारिक आंकड़े महत्वपूर्ण होंगे।
मतदाताओं के लिए सूची की जांच अहम
अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद मतदाताओं के लिए अपने नाम और विवरण की जांच करना महत्वपूर्ण है। जिन लोगों ने नाम जोड़ने या विवरण में सुधार के लिए आवेदन किया था, उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी जानकारी अंतिम सूची में सही तरीके से दर्ज है। यदि किसी पात्र मतदाता का नाम सूची में शामिल नहीं है या विवरण में त्रुटि है, तो उसे निर्वाचन आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के तहत संबंधित निर्वाचन अधिकारी से संपर्क करना चाहिए।
कर्नाटक की अंतिम सूची में मतदाताओं की कुल संख्या, पुरुषों और महिलाओं का अनुपात तथा मतदान केंद्रों की संख्या से जुड़े आंकड़े सामने आ गए हैं। लेकिन 99.7 लाख से अधिक नाम कम होने के कारणों और दावे-आपत्तियों पर हुई कार्रवाई का पूरा आकलन विस्तृत आधिकारिक विवरण के बाद ही संभव होगा।
