नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ हालिया यौन अपराधों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताते हुए मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। अदालत के सामने ग्रेटर नोएडा से कश्मीरी गेट के बीच चलने वाली स्लीपर बस में 16 वर्षीय छात्रा से कथित सामूहिक दुष्कर्म का मामला भी आया। सुप्रीम कोर्ट ने हालिया घटनाओं में 2012 के निर्भया कांड से दर्दनाक समानताएं बताते हुए सार्वजनिक स्थानों और परिवहन साधनों में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने कोर्ट रजिस्ट्री को मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज करने और इसे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान पीठ की चिंता केवल किसी एक घटना तक सीमित नहीं रही, बल्कि सार्वजनिक जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी की कमी और कानून लागू करने वाली एजेंसियों की जवाबदेही तक पहुंची। अदालत ने संकेत दिया कि किसी घटना के बाद संवेदना जताना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यवस्था में जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।
पीठ ने हालिया मामलों की तुलना वर्ष 2012 के निर्भया मामले से करते हुए सवाल उठाया कि एक दशक से अधिक समय बीतने के बावजूद कानून लागू करने वाली व्यवस्था में कितना वास्तविक और प्रभावी बदलाव आया है। अदालत ने पार्क, सार्वजनिक परिवहन और अन्य सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। खराब रोशनी, निगरानी की कमी और जरूरी प्रशासनिक सुविधाओं के अभाव को लेकर भी सवाल उठे। अदालत का जोर इस बात पर रहा कि सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षा व्यवस्था की खामियों के कारण जोखिम वाले क्षेत्रों में नहीं बदलने दिया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट के सामने सार्वजनिक पार्क में किशोरी के साथ हुई एक हालिया घटना का भी संदर्भ आया। अदालत ने ऐसे मामलों को व्यापक सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ते हुए संकेत दिया कि समस्या किसी एक स्थान, विभाग या संस्थान तक सीमित नहीं है। सार्वजनिक स्थानों पर पुलिस निगरानी, प्रकाश व्यवस्था, निगरानी तंत्र और त्वरित सहायता की उपलब्धता की समीक्षा जरूरी हो सकती है। अदालत की टिप्पणियों में संबंधित एजेंसियों की भूमिका और उनकी जवाबदेही प्रमुख मुद्दा रही।
इसी बीच दिल्ली में 16 वर्षीय छात्रा से कथित सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया है। आरोप है कि ग्रेटर नोएडा से दिल्ली जा रही स्लीपर बस में चालक और कंडक्टर ने छात्रा के साथ वारदात को अंजाम दिया। कश्मीरी गेट थाना पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने कथित अपराध में इस्तेमाल की गई बस को भी जब्त किया है। मामले की जांच जारी है और पुलिस घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की पड़ताल कर रही है।
पुलिस के मुताबिक घटना 4 अगस्त 2026 की बताई गई है। पीड़िता उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले की रहने वाली और 11वीं कक्षा की छात्रा है। बताया गया है कि वह 3 अगस्त को पढ़ाई को लेकर मां की डांट से नाराज होकर बिना बताए घर से निकल गई थी। इसके बाद उसने नोएडा सेक्टर-63 में रहने वाले अपने चचेरे भाई के पास जाने का फैसला किया। इसी दौरान उसने ग्रेटर नोएडा से दिल्ली जाने वाली स्लीपर बस में यात्रा की।
जांच के दौरान पुलिस ने बस के चालक और कंडक्टर की भूमिका सामने आने के बाद दोनों को गिरफ्तार किया। बस को कब्जे में लेकर पुलिस उसके मार्ग, यात्रा के दौरान हुई गतिविधियों और मामले से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि घटना के दौरान बस में कौन-कौन मौजूद था और पीड़िता किन परिस्थितियों में आरोपियों के संपर्क में आई।
सुप्रीम कोर्ट की चिंता के दायरे में सार्वजनिक परिवहन की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है। बसों में यात्रियों की सुरक्षा, चालक और परिचालक का सत्यापन, सीसीटीवी निगरानी, आपातकालीन सहायता और शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था जैसे पहलुओं की समीक्षा आगे की कार्यवाही में हो सकती है। सार्वजनिक स्थलों पर पर्याप्त रोशनी और नियमित पुलिस निगरानी को भी सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
2012 के निर्भया कांड के बाद महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े कानूनों और संस्थागत व्यवस्थाओं में कई बदलाव किए गए थे। मौजूदा सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट का मुख्य सवाल इन व्यवस्थाओं के जमीन पर प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर है। अदालत ने फिलहाल किसी आरोपी के खिलाफ आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है और मामले में कानूनी प्रक्रिया जारी है।
स्वतः संज्ञान की कार्यवाही आगे बढ़ने के साथ दिल्ली-एनसीआर में सार्वजनिक स्थानों और सार्वजनिक परिवहन की सुरक्षा व्यवस्था, संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी तथा नाबालिगों की सुरक्षा के उपायों पर विस्तृत सुनवाई हो सकती है। अदालत के निर्देश के बाद संबंधित पक्षों से जवाब मांगे जाने और आगे की सुनवाई में सुरक्षा व्यवस्था की कमियों तथा उन्हें दूर करने के उपायों पर विचार होने की संभावना है।
