कोच्चि। केरल के कोच्चि में एक मर्सिडीज-बेंज कार से हुए जानलेवा हादसे ने पुलिस प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है। दुर्घटना में 55 वर्षीय स्कूटी सवार जयबालकृष्णन की मौत के बाद जांच की निष्पक्षता और पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर सवाल उठे हैं। मामले में एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश के 17 वर्षीय बेटे पर कार चलाते समय स्कूटी को टक्कर मारने का आरोप है। विवाद बढ़ने के बीच कोच्चि सिटी पुलिस कमिश्नर कालीराज महेश को पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह आर. निशांतिनी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे पहले चार पुलिसकर्मियों को भी निलंबित किया जा चुका है।
मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया, जब मृतक के परिवार की ओर से जांच को कथित तौर पर कमजोर करने की कोशिश किए जाने के आरोप लगाए गए। दुर्घटना से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर उठे सवालों के बाद अब जांच के हर पहलू पर निगाहें टिकी हैं। हालांकि, लगाए गए आरोपों की सच्चाई और किसी भी व्यक्ति की जिम्मेदारी का निर्धारण जांच तथा कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
नाबालिग पर तेज रफ्तार में कार चलाने का आरोप
मामला एक ऐसी दुर्घटना से जुड़ा है, जिसमें स्कूटी सवार जयबालकृष्णन की जान चली गई। आरोप है कि मर्सिडीज-बेंज कार 17 वर्षीय किशोर चला रहा था। वह एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश का बेटा है। जांच के दौरान यह आरोप भी सामने आया कि किशोर सोशल मीडिया के लिए रील बनाने के उद्देश्य से कार चला रहा था और कथित तौर पर तेज रफ्तार में वाहन चलाने का वीडियो रिकॉर्ड किया जा रहा था।
पुलिस ने हादसे से पहले कार की गतिविधियों और उसकी गति से संबंधित साक्ष्यों की जांच की। जांचकर्ताओं को किशोर के मोबाइल फोन से एक वीडियो फुटेज मिलने की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि इस फुटेज में दुर्घटना से कुछ समय पहले कार तेज रफ्तार में चलती दिखाई देती है। जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि वीडियो कब और किन परिस्थितियों में बनाया गया था तथा दुर्घटना से उसका क्या संबंध है।
वीडियो फुटेज को लेकर भी विवाद
मामले में आरोप लगाया गया कि न्यायाधीश ने अपने बेटे के मोबाइल फोन से वीडियो फुटेज हटवा दी थी। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है। जांचकर्ताओं द्वारा फुटेज बरामद किए जाने की बात सामने आने के बाद डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है।
ऐसे मामलों में मोबाइल फोन से प्राप्त वीडियो, अन्य डिजिटल रिकॉर्ड और घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्य दुर्घटना के क्रम को समझने में मदद कर सकते हैं। जांच एजेंसियों को यह भी स्पष्ट करना होगा कि हादसे से पहले कार कौन चला रहा था, वाहन की गति क्या थी और दुर्घटना के बाद साक्ष्यों को लेकर किसी तरह की अनियमितता हुई या नहीं। किसी भी आरोप को प्रमाणित मानने से पहले उसकी स्वतंत्र जांच जरूरी है।
पुलिस की भूमिका पर सवाल, कमिश्नर हटाए गए
दुर्घटना के बाद पुलिस की जांच प्रक्रिया को लेकर असंतोष सामने आया। मृतक के परिवार ने आरोप लगाया कि मामले को कमजोर करने की कोशिश की गई। पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर सवाल उठने और विवाद बढ़ने के बाद चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया। इसके बाद कोच्चि सिटी पुलिस कमिश्नर को भी उनके पद से हटा दिया गया।
कमिश्नर की जगह आर. निशांतिनी को जिम्मेदारी सौंपे जाने से मामले में प्रशासनिक बदलाव हुआ है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में कमिश्नर को हटाने के आदेश के सभी विस्तृत कारण स्पष्ट नहीं हैं। इसलिए इस कार्रवाई को किसी विशेष आरोप की पुष्टि के रूप में नहीं देखा जा सकता। जांच में यह निर्धारित करना होगा कि पुलिस की ओर से कोई लापरवाही हुई थी या नहीं और यदि हुई, तो उसके लिए कौन जिम्मेदार था।
एफआईआर में जोड़ी गई मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199ए
मामले में कानूनी कार्रवाई के दायरे को आगे बढ़ाते हुए 27 अक्टूबर को एफआईआर में मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199ए जोड़ी गई। यह प्रावधान नाबालिग द्वारा वाहन चलाए जाने की स्थिति में निर्धारित परिस्थितियों के तहत अभिभावक या वाहन मालिक की जिम्मेदारी से संबंधित है। केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्नीथला ने इस धारा को शामिल किए जाने की जानकारी दी।
इस प्रावधान के तहत जांच में यह देखा जा सकता है कि नाबालिग को वाहन चलाने की अनुमति किसने दी, वाहन किसके स्वामित्व में था और क्या अभिभावक या वाहन मालिक की ओर से आवश्यक सावधानियां बरती गई थीं। हालांकि, किसी व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी तथ्यों, साक्ष्यों और लागू कानून के आधार पर ही तय होगी।
निष्पक्ष जांच से तय होगी जिम्मेदारी
जयबालकृष्णन की मौत के मामले में अब दुर्घटना की परिस्थितियों, कथित तेज रफ्तार, मोबाइल फोन से बरामद वीडियो और पुलिस की शुरुआती कार्रवाई की जांच अहम होगी। चार पुलिसकर्मियों के निलंबन, पुलिस कमिश्नर को हटाए जाने और एफआईआर में नई धारा जोड़े जाने के बाद मामले में जवाबदेही तय करने का दबाव बढ़ गया है।
मृतक के परिवार को न्याय दिलाने के लिए जरूरी है कि सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाए। नाबालिग के वाहन चलाने, अभिभावक या वाहन मालिक की संभावित जिम्मेदारी और साक्ष्यों से जुड़े आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने तथा कानूनी प्रक्रिया के बाद ही निकाला जा सकेगा।
