नई दिल्ली। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने Growpital प्लेटफॉर्म से जुड़ी निवेश योजना पर अंतिम आदेश जारी करते हुए उसे बंद करने का निर्देश दिया है। नियामक के अनुसार, प्लेटफॉर्म के जरिए 5,208 अलग-अलग निवेशकों से कुल ₹192.88 करोड़ जुटाए गए और निवेशकों को इकाइयां आवंटित कर मुनाफे या रिटर्न का वादा किया गया। SEBI ने प्रमुख नोटिसियों को निवेशकों से आगे रकम जुटाने या किसी सामूहिक निवेश योजना को शुरू करने और संचालित करने से रोक दिया है। साथ ही बकाया रकम 12 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ लौटाने का निर्देश दिया गया है।
SEBI का 28 सितंबर 2026 का अंतिम आदेश Growpital प्लेटफॉर्म के जरिए 1 अप्रैल 2020 से 31 जनवरी 2024 के बीच जुटाई गई रकम की जांच से संबंधित है। नियामक ने पाया कि निवेशकों की रकम अलग-अलग निवेश योजनाओं के माध्यम से एकत्र की गई और उसे एस्क्रो खाते के जरिए संबंधित ZF LLPs में भेजा गया। Growpital की गतिविधियां मुख्य रूप से Farm Silo Tech LLP, Yotta Agro Ventures Pvt Ltd और ZF Project 1, ZF Project 2 तथा ZF Project 3 LLPs से जुड़ी थीं।
नियामक के मुताबिक, निवेशकों को ZF LLPs में साझेदार के तौर पर शामिल किया गया और उन्हें इकाइयां आवंटित की गईं। इसके बदले उन्हें मुनाफे या रिटर्न का वादा किया गया। अलग-अलग निवेश योजनाओं में अनुमानित रिटर्न 10 प्रतिशत से लेकर 18.5 प्रतिशत तक बताया गया था। SEBI ने अपने आदेश में कहा कि इस व्यवस्था में सामूहिक निवेश योजना की वैधानिक शर्तें पूरी होती थीं।
SEBI ने पाया कि निवेशकों का योगदान एक जगह जमा किया गया था और उनसे मुनाफे, आय, उपज या संपत्ति की उम्मीद के साथ रकम लगवाई गई। इसके अलावा योजना से जुड़ी संपत्ति, योगदान या निवेश का प्रबंधन निवेशकों की ओर से किया जा रहा था, जबकि निवेशकों का योजना के रोजमर्रा के संचालन पर नियंत्रण नहीं था। इन आधारों पर नियामक ने व्यवस्था को अपंजीकृत Collective Investment Scheme यानी सामूहिक निवेश योजना माना।
नियामक ने Noticees 1 से 8 को अपंजीकृत सामूहिक निवेश योजना संचालित करने और प्रतिभूति कानूनों का उल्लंघन करने का जिम्मेदार ठहराया। आदेश के अनुसार, इन नोटिसियों के खिलाफ SEBI Act, CIS Regulations और PFUTP Regulations के प्रावधानों के उल्लंघन से जुड़े निष्कर्ष दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा Noticees 9 से 14, 17 से 19 और 20 से 30 को योजना में सहायता करने और ZF LLPs से Yotta तक रकम पहुंचाने में भूमिका निभाने वाला बताया गया है।
SEBI ने Noticees 1 से 14 और 17 से 30 पर मौद्रिक जुर्माना भी लगाया है। आदेश के मुताबिक संबंधित नोटिसियों को आदेश प्राप्त होने के 45 दिनों के भीतर अपनी-अपनी निर्धारित जुर्माना राशि जमा करनी होगी। अलग प्रक्रिया में कुछ नोटिसियों से जुड़ी निपटान कार्यवाही भी हुई। SEBI के रिकॉर्ड में Growpital मामले का अंतिम आदेश और अलग निपटान आदेश दोनों 28 सितंबर 2026 को दर्ज हैं।
निवेशकों को रिफंड की रकम पर 12 प्रतिशत सालाना ब्याज 29 जनवरी 2024 से लगाया जाएगा। यही वह तारीख है जब SEBI ने इस मामले में अंतरिम आदेश जारी किया था। यानी संबंधित निवेशकों को बकाया राशि के साथ उस तारीख से रिफंड किए जाने तक 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का निर्देश है।
SEBI ने कुछ नोटिसियों को प्रतिभूति बाजार से भी प्रतिबंधित किया है। Noticees 1 से 8 को आदेश की तारीख से पांच साल या निवेशकों को रिफंड पूरा होने तक, इनमें से जो अवधि बाद में समाप्त हो, तब तक बाजार में पहुंच से रोका गया है। वहीं Noticees 9 से 14, 17 से 19 और 20 से 30 पर तीन साल का प्रतिबंध लगाया गया है।
मामले में कुल 30 नोटिसियों के नाम आदेश में शामिल हैं। इनमें Rituraj Sharma, Krishnna Joshi, Gayatri Rinwa, Yotta Agro Venture Private Limited, Farm Silo Tech LLP, ZF Project 1 LLP, ZF Project 2 LLP, ZF Project 3 LLP, Toshan Seeds Private Limited, Gopal Vasharambhai Kuchhadiya, Girishkumar Ishvarlal Makvana, MSVO Ventures Private Limited, Rahul Meena और Divya Soni समेत अन्य व्यक्ति और संस्थाएं शामिल हैं।
SEBI के अनुसार, Nutrikosh India Private Limited और Alok Chaudhary से जुड़ी कार्यवाही का निपटारा हो चुका है। वहीं Noticees 17, 18 और 19 की निपटान अर्जियां निर्धारित समयसीमा में निपटान राशि जमा नहीं किए जाने के कारण खारिज कर दी गईं।
SEBI का यह अंतिम आदेश ऐसे मामले में आया है जिसमें कृषि निवेश के नाम पर निवेशकों से बड़ी रकम जुटाने और निर्धारित रिटर्न का वादा किए जाने की जांच की गई थी। नियामक की कार्रवाई में योजना को बंद करने, निवेशकों की बकाया रकम ब्याज समेत लौटाने, जुर्माना लगाने और संबंधित व्यक्तियों तथा संस्थाओं पर प्रतिभूति बाजार से जुड़े प्रतिबंध लगाने के निर्देश शामिल हैं।
