लखनऊ: प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत रूफटॉप सोलर लगवाने के लिए मिलने वाले लोन की प्रक्रिया में अब संपत्ति के दस्तावेजों को अनिवार्य कर दिया गया है। सोलर लोन में कथित फर्जीवाड़े और अपात्र लोगों द्वारा दूसरे की संपत्ति के आधार पर कर्ज लेने की शिकायतों के बाद नियमों को सख्त किया गया है। नए प्रावधान के तहत लोन आवेदन के साथ मकान या जमीन की रजिस्ट्री की कॉपी लगानी होगी। सोलर लोन उसी व्यक्ति के नाम पर स्वीकृत किया जाएगा, जिसके नाम पर संबंधित संपत्ति दर्ज है।
अगर जिस व्यक्ति के नाम से लोन के लिए आवेदन किया जा रहा है, उसके नाम पर संपत्ति की रजिस्ट्री नहीं है तो मकान मालिक या संपत्ति के स्वामी का अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) देना अनिवार्य होगा। बिना NOC के आवेदन को निरस्त कर दिया जाएगा।
रजिस्ट्री की कॉपी लगाना अनिवार्य
उत्तर प्रदेश सोलर एनर्जी डेवलपमेंट एसोसिएशन (यूपीरेडा) की ओर से नए निर्देशों के तहत सोलर लोन की प्रक्रिया में संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों को प्रमुख आधार बनाया गया है। आवेदन के साथ रजिस्ट्री की कॉपी जमा करनी होगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सोलर पैनल जिस मकान या संपत्ति पर लगाया जाना है, उसका वास्तविक मालिक कौन है।
ऐसे मामलों में जहां मकान परिवार के किसी अन्य सदस्य के नाम पर है या संपत्ति पैतृक है, आवेदक को संपत्ति मालिक की NOC प्रस्तुत करनी होगी। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सोलर सिस्टम लगाने और उससे जुड़े लोन की प्रक्रिया में संपत्ति मालिक की सहमति स्पष्ट रूप से दर्ज हो।
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (IIA) के सदस्य हिमांशु रावत के मुताबिक, नियमों में बदलाव से ऐसे आवेदनों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी, जिनमें आवेदक संपत्ति पर अपना अधिकार स्पष्ट किए बिना लोन लेने का प्रयास करते हैं।
दूसरे की संपत्ति पर लोन लेने की शिकायतें
सोलर लोन की प्रक्रिया में फर्जीवाड़े की शिकायतों के बाद विभाग ने दस्तावेजों की जांच को प्राथमिकता दी है। जांच के दौरान ऐसे मामलों की जानकारी सामने आने की बात कही गई है, जिनमें लोगों ने कथित तौर पर दूसरे की संपत्ति या किराए के मकान के आधार पर सोलर लोन लेने का प्रयास किया।
कुछ मामलों में संपत्ति के स्वामित्व से संबंधित स्पष्ट दस्तावेज नहीं होने के बावजूद लोन प्रक्रिया आगे बढ़ाने की शिकायतें भी सामने आई थीं। इसके बाद विभाग ने आवेदन के साथ संपत्ति के दस्तावेज और मालिक की सहमति को अनिवार्य करने का फैसला लिया।
नए नियमों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जिस मकान पर सोलर पैनल लगाया जा रहा है, उसके मालिक को इसकी जानकारी हो और लोन की जिम्मेदारी भी सही व्यक्ति के नाम दर्ज हो।
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पहले बिजली बिल से आगे बढ़ जाता था आवेदन
पहले सोलर लोन के लिए आवेदन प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान थी। आवेदक बिजली के बिल की कॉपी समेत जरूरी दस्तावेज जमा कर लोन की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकते थे। आरोप है कि इसी प्रक्रिया का फायदा उठाकर कुछ अपात्र लोगों ने दूसरे की संपत्ति से जुड़े मामलों में भी लोन हासिल करने की कोशिश की।
अब केवल बिजली का बिल पर्याप्त नहीं होगा। बिजली कनेक्शन किसी व्यक्ति के नाम होने से यह साबित नहीं माना जाएगा कि संबंधित मकान या जमीन भी उसी की है। लोन प्रक्रिया में संपत्ति के स्वामित्व की पुष्टि के लिए रजिस्ट्री या अन्य निर्धारित दस्तावेजों को देखा जाएगा।
परिवार और पैतृक संपत्ति वालों को NOC देनी होगी
नए नियम उन लोगों पर भी लागू होंगे जो ऐसे मकान में रहते हैं जो उनके माता-पिता, पति-पत्नी या परिवार के किसी अन्य सदस्य के नाम पर है। यदि सोलर लोन के लिए आवेदन करने वाला व्यक्ति संपत्ति का पंजीकृत मालिक नहीं है तो उसे मालिक की NOC देनी होगी।
पैतृक संपत्ति के मामलों में भी संबंधित स्वामित्व दस्तावेज और आवश्यक सहमति मांगी जा सकती है। विभाग आवेदन की जांच के दौरान दस्तावेजों की वैधता और संपत्ति से जुड़े अधिकारों का सत्यापन करेगा।
फर्जीवाड़े पर लगेगी रोक
नए नियमों से सोलर लोन की प्रक्रिया में आवेदक और संपत्ति के बीच संबंध स्पष्ट होने की उम्मीद है। इससे फर्जी दस्तावेजों, गलत संपत्ति विवरण और बिना अनुमति दूसरे के मकान पर सोलर सिस्टम लगाने के मामलों को रोकने में मदद मिल सकती है।
विभाग अब आवेदन में दिए गए बिजली कनेक्शन, संपत्ति के दस्तावेज और लोन लेने वाले व्यक्ति की जानकारी का मिलान करने पर जोर देगा। किसी भी स्तर पर जानकारी गलत पाए जाने पर आवेदन निरस्त करने के साथ संबंधित मामले में आगे की कार्रवाई भी की जा सकती है।
