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Home»राष्ट्रीय»चढ़ावा विवाद में नया मोड़: 200 चांदी की ईंटों को लेकर सिंधी समाज की एसआईटी से जांच की मांग
राष्ट्रीय

चढ़ावा विवाद में नया मोड़: 200 चांदी की ईंटों को लेकर सिंधी समाज की एसआईटी से जांच की मांग

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksJune 22, 2026No Comments4 Mins Read
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विश्व सिंधी सेवा संगम ने 2021 में राम मंदिर निर्माण के लिए दान की गई 200 एक-किलो चांदी की ईंटों का ब्योरा मांगा; कहा- रसीद और आधिकारिक जानकारी न मिलने से बढ़ीं शंकाएं, जरूरत पड़ी तो एसआईटी को सौंपेंगे दस्तावेज
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अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान को लेकर चल रही जांच के बीच एक नया विवाद सामने आया है। विश्व सिंधी सेवा संगम ने वर्ष 2021 में राम मंदिर निर्माण के लिए दान की गई 200 चांदी की ईंटों के संबंध में पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा है कि उन्हें आज तक न तो दान की आधिकारिक रसीद मिली और न ही बाद में इन ईंटों की स्थिति के बारे में कोई जानकारी दी गई। संगठन का कहना है कि इस कारण अब समुदाय के भीतर कई सवाल उठ रहे हैं और आवश्यकता पड़ने पर इस मामले की जानकारी विशेष जांच दल (एसआईटी) को भी दी जाएगी।

विश्व सिंधी सेवा संगम के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजू मनवानी ने दावा किया कि 26 जनवरी 2021 को दुनिया भर के सिंधी समाज के सहयोग से राम मंदिर निर्माण के लिए 200 चांदी की ईंटें अर्पित की गई थीं। उनके अनुसार प्रत्येक ईंट का वजन लगभग एक किलोग्राम था, यानी कुल मिलाकर करीब 200 किलोग्राम चांदी मंदिर निर्माण के लिए दान की गई थी। इन ईंटों पर सिंधी समाज के आराध्य देव भगवान झूलेलाल की विशेष आकृति भी अंकित कराई गई थी।

डॉ. मनवानी ने बताया कि यह अभियान केवल भारत तक सीमित नहीं था, बल्कि 12 देशों में रहने वाले सिंधी समाज के लोगों ने भी इसमें योगदान दिया था। उनके मुताबिक 150 से अधिक प्रतिनिधि इस अवसर पर अयोध्या पहुंचे थे। विशेष यात्रा व्यवस्था के तहत प्रतिनिधि मुंबई से लखनऊ हवाई मार्ग से पहुंचे और वहां से सड़क मार्ग के जरिए अयोध्या आए। संगठन का दावा है कि कारसेवकपुरम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान ये 200 चांदी की ईंटें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को सौंपी गई थीं।

संगठन ने उस समय की तस्वीरें भी सार्वजनिक की हैं और कहा है कि तस्वीरों सहित अन्य दस्तावेज उनके पास सुरक्षित हैं। डॉ. मनवानी का कहना है कि इतने बड़े दान के बावजूद चार वर्षों में उन्हें कोई आधिकारिक पावती, रसीद या यह जानकारी नहीं दी गई कि दान की गई चांदी का उपयोग किस प्रकार किया गया। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी संस्था पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि दान की गई सामग्री के संबंध में स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी प्राप्त करना है।

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यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब राम मंदिर में चढ़ावे और दान के प्रबंधन को लेकर पहले से ही विवाद बना हुआ है। कथित अनियमितताओं के आरोपों की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय एसआईटी लगातार साक्ष्य जुटाने और संबंधित लोगों के बयान दर्ज करने में लगी हुई है। सूत्रों के अनुसार जांच दल अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट को अंतिम रूप देने में जुटा है और इसे जल्द शासन को सौंपा जा सकता है।

जांच प्रक्रिया के दौरान एसआईटी ने कई व्यक्तियों को दोबारा बुलाकर उनके बयान दर्ज किए हैं। उपलब्ध दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य तथ्यों का भी परीक्षण किया गया है। माना जा रहा है कि प्रारंभिक रिपोर्ट में अब तक सामने आए तथ्यों का उल्लेख होगा और आगे की कार्रवाई के संबंध में सुझाव भी दिए जा सकते हैं।

सूत्रों के अनुसार यदि जांच में प्रथम दृष्टया किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या प्रक्रिया संबंधी गड़बड़ी के संकेत मिलते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय शासन स्तर पर रिपोर्ट के अध्ययन और कानूनी परीक्षण के बाद ही लिया जाएगा।

इस बीच विश्व सिंधी सेवा संगम ने संकेत दिया है कि यदि आवश्यकता हुई तो वह 200 एक-किलो चांदी की ईंटों के दान से जुड़े फोटो, दस्तावेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्य एसआईटी को सौंपेगा। संगठन का कहना है कि दानदाताओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए पूरे मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। अब सबकी नजरें एसआईटी की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि चढ़ावे और दान से जुड़े विवादों में आगे जांच किस दिशा में बढ़ेगी।

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