नई दिल्ली: भारत के दूरदराज और ग्रामीण इलाकों में हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए सैटेलाइट इंटरनेट एक नया विकल्प बन सकता है। एलन मस्क की SpaceX भारत में अपनी Starlink सैटेलाइट इंटरनेट सेवा के विस्तार की तैयारी कर रही है। कंपनी का फोकस ऐसे क्षेत्रों पर हो सकता है, जहां पारंपरिक टेलीकॉम नेटवर्क की पहुंच सीमित है या जहां फाइबर और मोबाइल नेटवर्क का विस्तार करना मुश्किल है।
एलन मस्क ने गुरुवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि Starlink भारत के उन इलाकों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है, जहां इंटरनेट सेवाएं अभी पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों और दूरदराज के गांवों तक सैटेलाइट कनेक्टिविटी पहुंचाने की जरूरत पर जोर दिया।
Starlink का संभावित विस्तार ऐसे समय में हो रहा है, जब भारत में इंटरनेट उपयोग तेजी से बढ़ा है, लेकिन ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी का अंतर अब भी बना हुआ है। कंपनी की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 तक देश के 11,256 सूचीबद्ध गांवों में 4G कनेक्टिविटी उपलब्ध नहीं थी। वहीं, मार्च 2026 तक भारत में इंटरनेट सब्सक्रिप्शन की संख्या 1.093 अरब से अधिक हो चुकी थी।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच बड़ा डिजिटल अंतर
देश में इंटरनेट कनेक्शन की संख्या एक अरब से अधिक पहुंचने के बावजूद इसकी पहुंच सभी क्षेत्रों में समान नहीं है। आंकड़ों के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट सब्सक्रिप्शन की संख्या 44.087 करोड़ से अधिक थी।
जनसंख्या के अनुपात में भी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है। ग्रामीण भारत में प्रति 100 लोगों पर करीब 48.31 इंटरनेट सब्सक्रिप्शन थे, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 126.80 था।
ये आंकड़े बताते हैं कि भारत ने इंटरनेट विस्तार में तेजी से प्रगति की है, लेकिन गांवों और शहरों के बीच डिजिटल अंतर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में सैटेलाइट इंटरनेट उन इलाकों के लिए उपयोगी हो सकता है, जहां फाइबर नेटवर्क बिछाना या मोबाइल टावर स्थापित करना चुनौतीपूर्ण है।
नियामकीय मंजूरी हासिल करने में जुटी कंपनी
SpaceX भारत में Starlink सेवा शुरू करने के लिए जरूरी नियामकीय मंजूरियां हासिल करने की प्रक्रिया में है। सैटेलाइट आधारित ब्रॉडबैंड को ऐसे भौगोलिक क्षेत्रों में इंटरनेट पहुंचाने के संभावित विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है, जहां पारंपरिक नेटवर्क का विस्तार कठिन है।
सैटेलाइट इंटरनेट के लिए हर इलाके में बड़े पैमाने पर स्थानीय फाइबर नेटवर्क या मोबाइल टावर स्थापित करने की जरूरत अपेक्षाकृत कम हो सकती है। यही वजह है कि यह तकनीक दूरदराज के गांवों, पहाड़ी क्षेत्रों और कम आबादी वाले इलाकों में कनेक्टिविटी बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है।
हालांकि, भारत में Starlink की व्यावसायिक सेवा शुरू होने की प्रक्रिया आवश्यक नियामकीय और परिचालन मंजूरियां पूरी होने पर निर्भर करेगी।
11 हजार से ज्यादा गांव अब भी 4G से दूर
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल बुनियादी ढांचे के विस्तार पर बड़ा निवेश किया है। देश में 1.09 अरब से ज्यादा इंटरनेट सब्सक्रिप्शन हैं और इनमें ग्रामीण क्षेत्रों की हिस्सेदारी 44 करोड़ से अधिक है।
सरकार के BharatNet प्रोजेक्ट के तहत भी ग्रामीण इलाकों में फाइबर कनेक्टिविटी का विस्तार किया जा रहा है। इस परियोजना के तहत 8.5 लाख किलोमीटर से अधिक ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जा चुकी है।
इसके बावजूद हजारों गांव अभी 4G नेटवर्क से बाहर हैं। 11,256 गांवों में 4G कनेक्टिविटी का अभाव बताता है कि देश के दूरदराज क्षेत्रों में विश्वसनीय हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाना अभी भी बड़ी चुनौती है।
ऐसे में Starlink की सैटेलाइट आधारित तकनीक भारत के मौजूदा डिजिटल नेटवर्क में एक अतिरिक्त विकल्प बन सकती है। यदि जरूरी मंजूरियां पूरी होने के बाद सेवा शुरू होती है, तो कंपनी उन क्षेत्रों को लक्षित कर सकती है जहां पारंपरिक ब्रॉडबैंड और मोबाइल नेटवर्क की पहुंच सीमित है।
भारत के लिए बड़ी चुनौती ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच डिजिटल अंतर को कम करना है। दूरदराज समुदायों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने में सैटेलाइट कनेक्टिविटी आने वाले समय में इस प्रयास का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।
