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Home»Policy Watch»TRAI और Truecaller के बीच 140 व 1600 नंबर सीरीज पर बढ़ा विवाद; स्पैम कॉल पहचान को लेकर नई बहस
Policy Watch

TRAI और Truecaller के बीच 140 व 1600 नंबर सीरीज पर बढ़ा विवाद; स्पैम कॉल पहचान को लेकर नई बहस

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksJuly 9, 2026No Comments3 Mins Read
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TRAI का कहना- व्हाइटलिस्टेड कमर्शियल और सर्विस नंबरों को स्पैम नहीं बताया जाना चाहिए, जबकि Truecaller का दावा- लाखों यूजर स्वयं इन कॉल्स को ब्लॉक या नजरअंदाज कर रहे हैं
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नई दिल्ली। 140 और 1600 नंबर सीरीज से आने वाली कॉल्स को लेकर भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) और कॉलर पहचान प्लेटफॉर्म Truecaller के बीच नया विवाद सामने आया है। TRAI का कहना है कि इन आधिकारिक रूप से निर्धारित नंबर श्रृंखलाओं को कॉलर आईडी एप्स द्वारा स्पैम के रूप में चिह्नित नहीं किया जाना चाहिए, जबकि Truecaller का दावा है कि यूजर्स का व्यवहार बताता है कि बड़ी संख्या में लोग इन कॉल्स को स्वयं ब्लॉक या नजरअंदाज कर रहे हैं।

भारत के दूरसंचार ढांचे के तहत 140 सीरीज का उपयोग प्रमोशनल कमर्शियल कॉल्स के लिए किया जाता है, जबकि 1600 सीरीज बैंकों और अन्य अधिकृत संस्थाओं द्वारा की जाने वाली सर्विस एवं ट्रांजैक्शनल कॉल्स के लिए निर्धारित है। इन दोनों नंबर श्रृंखलाओं को व्हाइटलिस्टेड माना जाता है, यानी कॉलर पहचान एप्स से अपेक्षा की जाती है कि वे इन्हें अपनी ओर से स्पैम के रूप में वर्गीकृत न करें।

विवाद की मुख्य वजह यूजर्स द्वारा की जाने वाली स्पैम रिपोर्टिंग है। Truecaller के अनुसार, कंपनी ने शुरुआत में नियामकीय व्यवस्था का पालन करते हुए इन नंबरों को व्हाइटलिस्ट किया था, लेकिन बाद में बड़ी संख्या में यूजर्स ने इन सीरीज से आने वाली कॉल्स को मैन्युअली स्पैम रिपोर्ट करना या ब्लॉक करना शुरू कर दिया। कंपनी का कहना है कि उसका प्लेटफॉर्म यूजर्स की प्रतिक्रिया को दर्शाता है, न कि स्वतंत्र रूप से इन नंबरों को स्पैम घोषित करता है।

TRAI ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि नियामकीय ढांचे के तहत स्वीकृत कमर्शियल कम्युनिकेशन नंबरों को स्पैम के रूप में चिह्नित या ब्लॉक नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे वैध संचार प्रभावित हो सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, नियामक ने इस संबंध में कॉलर पहचान एप्स पर कार्रवाई के लिए सूचना प्रौद्योगिकी ढांचे के तहत अधिक अधिकार देने की मांग भी की है।

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विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए Truecaller के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) ऋषित झुनझुनवाला ने कहा कि कंपनी ने इस व्यवस्था को लेकर अपनी आशंकाओं के बावजूद व्हाइटलिस्टिंग लागू की थी। उनके अनुसार, इन दोनों नंबर श्रृंखलाओं से प्रतिदिन आने वाली 5.1 करोड़ से अधिक कॉल्स का जवाब ही नहीं दिया जाता, जो दर्शाता है कि यूजर्स ऐसे संचार पर भरोसा नहीं कर रहे हैं।

Truecaller का दावा है कि पिछले आठ महीनों में यूजर्स ने 140 सीरीज की लगभग 81% कॉल्स और 1600 सीरीज की लगभग 79% कॉल्स को नजरअंदाज किया। कंपनी के अनुसार, अक्टूबर 2025 से 1600 सीरीज के नंबरों को मैन्युअली ब्लॉक करने की घटनाओं में 208% की वृद्धि दर्ज की गई है, जो अवांछित कॉल्स के प्रति बढ़ती असंतुष्टि को दर्शाती है।

यह विवाद दूरसंचार ऑपरेटरों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के नियामकीय अधिकार क्षेत्र के अंतर को भी उजागर करता है। दूरसंचार सेवा प्रदाता दूरसंचार विभाग से लाइसेंस प्राप्त कर सीधे TRAI के नियमन के अधीन कार्य करते हैं, जबकि Truecaller जैसे कॉलर पहचान एप्स सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत डिजिटल इंटरमीडियरी के रूप में संचालित होते हैं और वर्तमान व्यवस्था में TRAI के प्रत्यक्ष नियामकीय नियंत्रण के दायरे में नहीं आते।

यह मामला स्पैम कॉल्स से उपभोक्ताओं की सुरक्षा और वैध बैंकिंग, व्यावसायिक तथा ट्रांजैक्शनल संचार के निर्बाध संचालन के बीच संतुलन बनाने को लेकर नई बहस को जन्म दे रहा है। फिलहाल इस विषय पर कोई अंतिम नियामकीय निर्णय नहीं लिया गया है और संबंधित पक्षों के बीच विचार-विमर्श जारी रहने की संभावना है।

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