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Home»Policy Watch»Meta के नए Muse AI इमेज टूल पर सरकार की नजर; प्राइवेसी और AI-जनित तस्वीरों को लेकर जांच शुरू
Policy Watch

Meta के नए Muse AI इमेज टूल पर सरकार की नजर; प्राइवेसी और AI-जनित तस्वीरों को लेकर जांच शुरू

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksJuly 9, 2026No Comments3 Mins Read
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मौजूदा कानूनी ढांचे के तहत होगी समीक्षा; विशेषज्ञों ने इमेज स्क्रैपिंग, सहमति और डीपफेक के बढ़ते खतरे पर जताई चिंता
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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कहा है कि वह Meta के नए AI इमेज जनरेशन फीचर Muse Image की मौजूदा कानूनी ढांचे के तहत जांच करेगी। यह कदम यूजर्स की निजता, डेटा सुरक्षा और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तस्वीरों के संभावित दुरुपयोग को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच उठाया गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने कहा है कि इस फीचर से संबंधित प्राप्त शिकायतों और सुझावों की समीक्षा कर यह परखा जाएगा कि यह भारतीय कानूनों के अनुरूप है या नहीं।

विवाद तब शुरू हुआ जब Meta ने Muse Image को अपने सबसे उन्नत AI इमेज जनरेशन मॉडल में से एक बताते हुए लॉन्च किया। हालांकि, इस फीचर पर आरोप लगे हैं कि यह सार्वजनिक Instagram अकाउंट्स पर उपलब्ध तस्वीरों का उपयोग कर AI-जनित तस्वीरें तैयार कर सकता है, जिससे यूजर की सहमति, इमेज स्क्रैपिंग और डिजिटल प्राइवेसी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, यह टूल किसी व्यक्ति के Instagram यूजरनेम और उसके सार्वजनिक रूप से उपलब्ध फोटो का उपयोग कर AI इमेज तैयार कर सकता है। आलोचकों का कहना है कि यदि यह सुविधा सार्वजनिक अकाउंट्स के लिए डिफॉल्ट रूप से सक्रिय रहती है, तो कई यूजर्स को यह जानकारी भी नहीं होगी कि उनकी तस्वीरों का AI आधारित सामग्री तैयार करने में उपयोग किया जा सकता है, जब तक कि वे अपनी प्राइवेसी सेटिंग्स स्वयं न बदलें।

प्राइवेसी और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस तकनीक से पहचान की चोरी, किसी अन्य व्यक्ति का रूप धारण कर फर्जी सामग्री तैयार करना, नकली प्रचार, ऑनलाइन उत्पीड़न और AI-जनित डीपफेक जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है। उनका कहना है कि जैसे-जैसे AI से तैयार तस्वीरें अधिक वास्तविक होती जाएंगी, असली और नकली तस्वीरों के बीच अंतर करना और कठिन हो सकता है।

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Meta ने इन चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यूजर्स Instagram की Reuse सेटिंग बंद कर अपनी सार्वजनिक तस्वीरों का AI इमेज जनरेशन में उपयोग रोक सकते हैं। कंपनी ने Content Seal नामक एक अदृश्य वॉटरमार्क भी पेश किया है, जो AI से तैयार तस्वीरों की पहचान करने में मदद करेगा। कंपनी के अनुसार, यह वॉटरमार्क फोटो को क्रॉप, रिसाइज या स्क्रीनशॉट लेने के बाद भी बना रहेगा। Meta ने यह भी कहा है कि वह AI-जनित सामग्री की पहचान के लिए एक विशेष डिटेक्शन टूल विकसित कर रही है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी शिकायतों और तकनीकी सुझावों की समीक्षा के बाद यह तय किया जाएगा कि यह फीचर मौजूदा कानूनों और निजता संबंधी प्रावधानों के अनुरूप है या नहीं। यदि जांच में किसी प्रकार के कानूनी या गोपनीयता संबंधी उल्लंघन सामने आते हैं, तो आवश्यक कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है।

इस घटनाक्रम ने जिम्मेदार AI उपयोग, यूजर की सहमति, डेटा सुरक्षा और जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के संभावित दुरुपयोग को लेकर बहस को और तेज कर दिया है। फिलहाल सरकार की समीक्षा प्रक्रिया जारी है और इस संबंध में अभी कोई अंतिम नियामकीय निर्णय घोषित नहीं किया गया है।

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