नई दिल्ली: UPI पर Merchant Discount Rate (MDR) लागू किए जाने की चर्चाओं के बीच वित्त मंत्रालय ने शनिवार को स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि आम यूजर्स को UPI से भुगतान करने के लिए किसी तरह का ट्रांजेक्शन शुल्क नहीं देना होगा। रोजमर्रा की खरीदारी, बिल भुगतान और व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P लेनदेन पहले की तरह मुफ्त रहेंगे। सरकार ने यह भी कहा कि कारोबारियों के लिए भी UPI के अधिकांश लेनदेन मुफ्त रहेंगे।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, भविष्य में यदि UPI पर MDR लागू करने का फैसला लिया जाता है तो यह सभी कारोबारियों और सभी लेनदेन पर समान रूप से नहीं लगाया जाएगा। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत एक निर्धारित सीमा से ऊपर होने वाले कुछ चुनिंदा कारोबारी लेनदेन को ही इसके दायरे में लाया जा सकता है। सरकार ने संकेत दिया है कि ऐसी स्थिति में MDR की दर बेहद मामूली रखी जाएगी और यह डेबिट या क्रेडिट कार्ड से जुड़े MDR की तुलना में कम होगी।
अभी MDR की दर तय नहीं
वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल MDR की कोई दर तय नहीं हुई है। इसके लिए पहले Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 को संसद से पारित कराना जरूरी होगा। सरकार के प्रस्ताव के अनुसार, इस विधेयक के जरिए Payment and Settlement Systems Act, 2007 की धारा 10A में संशोधन किया जाना है।
कानून में प्रस्तावित बदलाव के बाद यदि UPI पर MDR लागू करने का निर्णय लिया जाता है, तो इसकी दर और संबंधित व्यवस्था तय करने की जिम्मेदारी NPCI की अध्यक्षता वाली UPI and Services Steering Committee की होगी। यानी अभी किसी निश्चित शुल्क को लागू करने का फैसला नहीं हुआ है।
आम लोगों पर नहीं पड़ेगा सीधा बोझ
सरकार ने स्पष्ट किया है कि UPI का इस्तेमाल करने वाले आम ग्राहकों से लेनदेन शुल्क लेने की कोई व्यवस्था प्रस्तावित नहीं है। इसका मतलब है कि ग्राहक दुकानों पर भुगतान करने, ऑनलाइन खरीदारी करने, बिल भरने या किसी व्यक्ति को पैसे भेजने के लिए UPI का इस्तेमाल बिना अतिरिक्त शुल्क के कर सकेंगे।
P2P यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच होने वाले भुगतान भी मुफ्त रहेंगे। सरकार का यह स्पष्टीकरण उन चर्चाओं के बीच आया है जिनमें UPI पर शुल्क लगाए जाने की संभावना को लेकर आम यूजर्स के बीच भ्रम की स्थिति बनी थी।
कानून में बदलाव की जरूरत क्यों?
वित्त मंत्रालय के अनुसार, देश में UPI के इस्तेमाल में लगातार तेजी आ रही है। इसके बढ़ते नेटवर्क को सुरक्षित और मजबूत बनाए रखने के लिए साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकने, तकनीकी ढांचे और भुगतान प्रणाली की क्षमता बढ़ाने पर लगातार निवेश की जरूरत है।
सरकार का कहना है कि केवल सरकारी सब्सिडी के सहारे UPI के अगले चरण की वृद्धि को लंबे समय तक बनाए रखना मुश्किल होगा। इसलिए ऐसी आर्थिक व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है, जिससे डिजिटल भुगतान का बुनियादी ढांचा वित्तीय रूप से टिकाऊ बना रहे और निजी क्षेत्र की कंपनियां भी इसमें निवेश के लिए प्रोत्साहित हों।
सरकार के मुताबिक, भुगतान क्षेत्र में अधिक कंपनियों की भागीदारी से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। इससे तकनीकी निवेश को बढ़ावा मिलने के साथ UPI के विस्तार को ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों तक ले जाने में मदद मिल सकती है।
जुलाई में 2,366 करोड़ UPI लेनदेन
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 में UPI के जरिए 2,366 करोड़ लेनदेन हुए और इनका कुल मूल्य करीब ₹29.9 लाख करोड़ रहा। जून 2026 तक UPI से जुड़े यूजर्स की संख्या करीब 55.49 करोड़ थी।
वित्त वर्ष 2025-26 में UPI के जरिए कुल 24,162 करोड़ लेनदेन हुए, जिनकी कुल राशि ₹314 लाख करोड़ रही। UPI अब 11 देशों में भी उपलब्ध है और कई अन्य देशों ने भारत की इस डिजिटल भुगतान प्रणाली को अपनाने में रुचि दिखाई है।
बाहरी दबाव की खबरों को सरकार ने बताया भ्रामक
वित्त मंत्रालय ने UPI की शुल्क व्यवस्था में संभावित बदलाव को किसी बाहरी दबाव से जोड़ने वाली खबरों को भी खारिज किया है। सरकार ने ऐसी रिपोर्टों को गलत और भ्रामक बताया।
सरकार ने कहा कि UPI भारत की अपनी डिजिटल भुगतान व्यवस्था है और प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य इसे सुरक्षित, सस्ता, समावेशी और लंबे समय तक टिकाऊ बनाना है। साथ ही लोगों से UPI से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए केवल वित्त मंत्रालय, RBI और NPCI जैसे आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करने की अपील की गई है।
