नई दिल्ली। दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल परिसर में ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। दो आरोपियों ने ग्राहक बनकर एक डिलीवरी बॉय को झांसा दिया और ₹94 हजार मूल्य के चार रिफर्बिश्ड लैपटॉप लेकर फरार हो गए। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, पीड़ित प्रदीप कुमार (27) सरिता विहार इलाके के रहने वाले हैं और ग्रेटर नोएडा स्थित एक कंपनी में काम करते हैं। उनकी कंपनी रिफर्बिश्ड लैपटॉप की बिक्री करती है। 5 जुलाई को कंपनी के आधिकारिक नंबर पर एक अज्ञात व्हाट्सऐप नंबर से चार लैपटॉप का ऑर्डर आया था। सौदा ₹94 हजार में तय हुआ था, जिसमें दो डेल और दो लेनोवो कंपनी के लैपटॉप शामिल थे।
जांच के मुताबिक, तय समय के अनुसार 8 जुलाई की शाम प्रदीप लैपटॉप की डिलीवरी देने के लिए नई दिल्ली के काली बाड़ी मार्ग पहुंचे। वहां ग्राहक ने उन्हें फोन कर RML अस्पताल के गेट नंबर-6 के पास बुलाया। इसके बाद एक आरोपी उन्हें अस्पताल परिसर के अंदर स्टाफ कैंटीन के पास ले गया, जहां उसका एक अन्य साथी पहले से मौजूद था।
पुलिस के अनुसार, दूसरे आरोपी ने लैपटॉप के बॉक्स खोलकर उनकी जांच शुरू कर दी। इसी दौरान पहले आरोपी ने प्रदीप से कहा कि वह स्कूटी से उसके साथ चले, जहां से वह पैसे लेकर वापस आएगा। आरोपी के भरोसे में आकर प्रदीप उसकी नीले रंग की स्कूटी पर बैठ गए।
Registration Begins for FutureCrime Summit 2026, India’s Largest Cybercrime Conference
आरोपियों ने पहले से ही स्कूटी की आगे की नंबर प्लेट को लाल रंग की चुन्नी से ढक रखा था, ताकि वाहन की पहचान आसानी से न हो सके। कुछ दूरी पर पहुंचने के बाद आरोपी ने बहाना बनाया कि आगे ट्रैफिक पुलिस खड़ी है और प्रदीप को वहीं उतरने के लिए कहा। उसने कहा कि वह आगे से दोबारा उन्हें बैठा लेगा।
पुलिस के अनुसार, जैसे ही प्रदीप स्कूटी से उतरे, आरोपी तेजी से वहां से फरार हो गया। इसके बाद पीड़ित ऑटो से वापस RML अस्पताल पहुंचे तो दूसरा आरोपी भी गायब मिला। मौके से चारों लैपटॉप भी नहीं मिले। इसके बाद उन्होंने पुलिस को घटना की जानकारी दी।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि आरोपियों ने पूरी योजना के तहत वारदात को अंजाम दिया। ग्राहक बनकर पहले विश्वास हासिल किया गया और फिर भुगतान से पहले डिलीवरी बॉय को अलग कर लैपटॉप लेकर फरार हो गए।
जांच एजेंसियां अब अस्पताल परिसर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही हैं। इसके अलावा स्कूटी की पहचान, आरोपियों की आवाजाही, मोबाइल नंबर और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर उनकी तलाश की जा रही है।
फ्यूचर क्राइम रिसर्च फाउंडेशन (FCRF) के अनुसार, ऑनलाइन खरीद-बिक्री से जुड़े धोखाधड़ी मामलों में अपराधी अक्सर फर्जी ग्राहक बनकर विक्रेताओं को निशाना बनाते हैं। ऐसे मामलों में सामान की डिलीवरी से पहले भुगतान की पुष्टि करना, ग्राहक की पहचान सत्यापित करना और संदिग्ध व्यवहार की स्थिति में अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर जल्द गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
