हरियाणा के पंचकूला में अमेरिका भेजने के नाम पर ₹12.30 लाख की कथित इमिग्रेशन धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने करीब दो वर्षों से फरार चल रहे मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी की पहचान आजाद सिंह, निवासी पानीपत, के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, वह मलेशिया भागने की कोशिश कर रहा था, तभी लुकआउट सर्कुलर (LOC) के आधार पर उसे अमृतसर हवाई अड्डे से हिरासत में लिया गया।
पुलिस ने बताया कि आरोपी को कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पंचकूला लाया गया, जहां स्थानीय अदालत ने उसे आगे की पूछताछ के लिए तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया।
यह मामला 7 मार्च 2024 को पंचकूला के रायपुर रानी थाने में दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि आरोपी और उसके साथियों ने उसे ₹38 लाख में पर्यटक वीज़ा के जरिए कानूनी रूप से अमेरिका भेजने का वादा किया और अग्रिम के रूप में ₹12.30 लाख वसूल लिए।
जांच के अनुसार, अमेरिका भेजने के बजाय पीड़ित को पहले दुबई और फिर आर्मेनिया भेजा गया। इस दौरान उसे लगातार भरोसा दिलाया जाता रहा कि अंततः उसे अमेरिका पहुंचा दिया जाएगा। बाद में खुद को ठगा महसूस करने पर पीड़ित भारत लौट आया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
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पुलिस के मुताबिक, मामले में इससे पहले तीन सह-आरोपियों—बलजिंदर, विकास उर्फ विक्की और पंकज चौहान—को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। वहीं मुख्य आरोपी आजाद सिंह फरार था, जिसके खिलाफ 23 जून 2024 को लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया था।
पूछताछ के दौरान मुख्य आरोपी ने कथित तौर पर एक अन्य सहयोगी की संलिप्तता की जानकारी दी है, जिसकी तलाश जारी है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि ठगी की गई रकम में आरोपी का कितना हिस्सा था और उसकी बरामदगी के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।
जांच एजेंसियों का कहना है कि यह मामला विदेश भेजने के नाम पर संचालित अवैध इमिग्रेशन नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है। पुलिस पूरे नेटवर्क, वित्तीय लेनदेन और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।
फ्यूचर क्राइम रिसर्च फाउंडेशन (FCRF) के अनुसार, विदेश में नौकरी या बसने के नाम पर होने वाली इमिग्रेशन धोखाधड़ी में फर्जी एजेंट अक्सर कानूनी वीज़ा का झांसा देकर अवैध मार्गों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे मामलों से बचने के लिए केवल सरकार से अधिकृत और लाइसेंसधारी इमिग्रेशन एजेंटों की सेवाएं लेनी चाहिए तथा किसी भी भुगतान से पहले उनकी वैधता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करनी चाहिए।
