अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की राशि चोरी के मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। पुलिस और विशेष जांच दल (SIT) की जांच में अब तक आरोपियों की करीब एक दर्जन संपत्तियों को चिह्नित किया गया है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि पिछले चार से पांच वर्षों में अर्जित की गई इन संपत्तियों में से कुछ का निर्माण कथित रूप से चोरी की रकम से किया गया हो सकता है। इन संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
जांच के अनुसार, चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार टिन्टू और उसके कथित गिरोह ने मंदिर में आने वाली दान राशि से करोड़ों रुपये की हेराफेरी की। पुलिस का अनुमान है कि आरोपियों ने करीब चार से पांच करोड़ रुपये की राशि का गबन किया है। अब तक की कार्रवाई में गहनों को छोड़कर बरामद नकदी और अन्य सामान का मूल्य लगभग 85 लाख रुपये तक पहुंच गया है। जांच एजेंसियां आरोपियों के बैंक खातों, संपत्तियों और अन्य वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल कर रही हैं।
मामले में एसआईटी की रिपोर्ट और पुलिस द्वारा की गई बरामदगी के आंकड़ों में लगभग 1.33 लाख रुपये का अंतर सामने आया है। अधिकारियों के अनुसार, इस अंतर को दूर करने के लिए बरामदगी, जब्ती दस्तावेज और जांच रिपोर्ट का मिलान किया जा रहा है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि चोरी की रकम किन माध्यमों से इस्तेमाल की गई और उससे कौन-कौन सी संपत्तियां खरीदी गईं।
वहीं, मंदिर में दान राशि की गणना व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। चढ़ावा चोरी की घटना के बाद भी वही हाउसकीपिंग कर्मचारी दान राशि की गणना प्रक्रिया में शामिल हैं, जिन्हें पहले ‘सैनिक सिक्योरिटी’ कंपनी के माध्यम से नियुक्त किया गया था। बताया जा रहा है कि करीब 46 कर्मचारियों को ट्रस्ट की सिफारिश पर कंपनी के जरिए रखा गया था, लेकिन उन्हें मूल कार्य हाउसकीपिंग के बजाय दान राशि जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में लगाया गया।
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हालांकि, घटना के बाद व्यवस्था में कुछ बदलाव किए गए हैं। अब दान राशि की गणना करने वाले कर्मचारियों के लिए निर्धारित ड्रेस व्यवस्था लागू की गई है और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई जा रही है। इसके बावजूद पूरा स्टाफ बदले जाने की प्रक्रिया नहीं हुई है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि सुरक्षा मानकों के अनुसार नए कर्मचारियों की नियुक्ति क्यों नहीं की जा रही और संबंधित कंपनी के साथ मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा क्यों नहीं की गई।
जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि चढ़ावा राशि की चोरी में केवल सीधे तौर पर शामिल लोग ही जिम्मेदार थे या फिर किसी अन्य स्तर पर भी लापरवाही या मिलीभगत रही। इसके लिए कर्मचारियों की भूमिका, ड्यूटी रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, वित्तीय लेनदेन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
इस बीच अयोध्या की सुरक्षा व्यवस्था में भी बदलाव हुआ है। एसपी सुरक्षा के पद पर तैनात रहे बलरामचारी का 25 मई को तबादला हो गया था, लेकिन नए एसपी सुरक्षा विजय शंकर मिश्र के कार्यभार संभालने तक वह पद पर बने रहे। अब सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी विजय शंकर मिश्र के पास है।
मंदिर ट्रस्ट और जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती चोरी की पूरी रकम का पता लगाना, आरोपियों की अवैध संपत्तियों को चिन्हित कर कानूनी कार्रवाई करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए मजबूत व्यवस्था तैयार करना है। जांच आगे बढ़ने के साथ मामले में और नए खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
