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Home»Education»NCERT पेपर सप्लायर मामला: अदालत में पेश न होने पर शिक्षा मंत्रालय ने अधिकारियों के खिलाफ जांच के आदेश दिए
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NCERT पेपर सप्लायर मामला: अदालत में पेश न होने पर शिक्षा मंत्रालय ने अधिकारियों के खिलाफ जांच के आदेश दिए

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksJuly 11, 2026No Comments3 Mins Read
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दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अनुपस्थित रहने पर कार्रवाई की तैयारी; दो वर्ष के ब्लैकलिस्टिंग आदेश और पाठ्यपुस्तकों के लिए कागज आपूर्ति विवाद से जुड़ा मामला
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नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) के उन अधिकारियों के खिलाफ जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, जो कागज आपूर्तिकर्ता कंपनी को ब्लैकलिस्ट किए जाने से जुड़े मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के समन के बावजूद कथित रूप से अदालत में उपस्थित नहीं हुए।

मामला मुंबई स्थित बाफना ग्लोबल वेंचर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है, जो NCERT की पाठ्यपुस्तकों की छपाई के लिए कागज की आपूर्ति करती है। कंपनी ने 24 जून को दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर NCERT द्वारा 22 जून को जारी उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उसे दो वर्षों के लिए परिषद की निविदा (टेंडर) प्रक्रिया में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया।

NCERT का आरोप है कि कंपनी निर्धारित समयसीमा के भीतर कागज की आपूर्ति करने में विफल रही, जिसके कारण चालू शैक्षणिक सत्र के लिए पाठ्यपुस्तकों की छपाई में देरी हुई। परिषद ने इसी कथित अनुबंध उल्लंघन के आधार पर कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने का निर्णय लिया था।

शिक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने पुष्टि की कि मंत्रालय ने अदालत में अधिकारियों की कथित अनुपस्थिति को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। मंत्रालय ने कहा कि यह कदम प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं में लापरवाही के प्रति उसकी “जीरो टॉलरेंस” नीति को दर्शाता है।

मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, समन जारी होने के बावजूद सुनवाई के दौरान NCERT की ओर से कोई अधिकारी अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद मंत्रालय ने पूरे घटनाक्रम की जांच कर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आवश्यक प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई पर विचार शुरू किया है।

सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने फिलहाल NCERT को कंपनी द्वारा जमा कराई गई ₹6 करोड़ की बैंक गारंटी भुनाने (Invoke) से भी रोक दिया है। मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को निर्धारित की गई है।

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कंपनी का कहना है कि पश्चिम एशिया संकट के कारण हाइड्रोजन पेरॉक्साइड की कमी हो गई थी, जो कागज निर्माण में उपयोग होने वाला एक महत्वपूर्ण रसायन है। इसी वजह से वह समय पर आपूर्ति करने में असमर्थ रही।

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब चालू शैक्षणिक वर्ष में संशोधित कक्षा 8 और कक्षा 9 की कुछ NCERT पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता में देरी को लेकर भी सवाल उठे थे। हालांकि, NCERT ने इस देरी के कारणों पर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।

इससे पहले भी इसी शैक्षणिक सत्र में NCERT विवादों में रहा था, जब सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका से जुड़े विवादित अध्याय वाली कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान (भाग-2) की पुस्तक के वितरण पर रोक लगा दी थी। इसके बाद परिषद ने संबंधित अध्याय हटाकर संशोधित संस्करण जारी किया था।

फ्यूचर क्राइम रिसर्च फाउंडेशन (FCRF) के अनुसार, सार्वजनिक खरीद (Public Procurement) से जुड़े मामलों में पारदर्शी अनुबंध प्रबंधन, समय पर कानूनी अनुपालन, उचित दस्तावेजीकरण और अदालतों में प्रभावी प्रतिनिधित्व अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। संस्थागत जवाबदेही और मजबूत प्रशासनिक प्रक्रियाएं ऐसे विवादों को कम करने तथा सार्वजनिक हित की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

फिलहाल मामला दिल्ली हाईकोर्ट में विचाराधीन है। अदालत में चल रही सुनवाई के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय द्वारा NCERT अधिकारियों की भूमिका की जांच भी जारी रहेगी और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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