श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर (CIK) ने सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में कथित रूप से आतंकवाद और अलगाववाद का महिमामंडन करने वाली पुस्तकों के प्रसार के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन प्रकाशकों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार ये पुस्तकें समग्र शिक्षा योजना (Samagra Shiksha Scheme) के तहत सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी तक पहुंचाई गई थीं। अब इस बात की विस्तृत जांच की जा रही है कि इन पुस्तकों को प्रकाशन और सरकारी वितरण की मंजूरी कैसे मिली।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जम्मू स्थित ओबेरॉय बुक सर्विस के इंदरपाल तथा नोएडा स्थित डॉमिनेंट पब्लिशर्स से जुड़े अमरदीप सिंह और गिरीश अरोड़ा के रूप में हुई है। जांच एजेंसियां इनसे पूछताछ कर यह पता लगा रही हैं कि विवादित पुस्तकों के प्रकाशन, अनुमोदन और वितरण में उनकी क्या भूमिका रही तथा यह सामग्री सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरियों तक कैसे पहुंची।
यह कार्रवाई जम्मू और नोएडा में हाल ही में की गई छापेमारी के बाद की गई है। जांच दो पुस्तकों—”Personalities and Legends of J&K” और “Great Personalities of Jammu and Kashmir”—के इर्द-गिर्द केंद्रित है, जिन्हें सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में उपलब्ध पाया गया था।
जांचकर्ताओं के अनुसार इन पुस्तकों में जेकेएलएफ (JKLF) के संस्थापक मोहम्मद मकबूल भट्ट, अलगाववादी नेता मसर्रत आलम, दिवंगत अलगाववादी नेता अब्दुल गनी लोन, सैयद अली शाह गिलानी तथा मीरवाइज उमर फारूक सहित कई अलगाववादी नेताओं पर अध्याय शामिल हैं। इसके अलावा पुस्तकों में जम्मू-कश्मीर के लिए “Indian Held Kashmir” और “Indian Occupied Kashmir” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किए जाने का भी आरोप है, जिसके बाद व्यापक विवाद खड़ा हो गया और सरकार ने तत्काल हस्तक्षेप किया।
विवाद सामने आने के बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने स्कूल शिक्षा विभाग के आठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया, जबकि एक कंप्यूटर ऑपरेटर की सेवाएं समाप्त कर दी गईं। सरकार ने संबंधित लेखकों और प्रकाशकों को केंद्र शासित प्रदेश में प्रतिबंधित एवं ब्लैकलिस्ट करते हुए उनकी पुस्तकों को शैक्षणिक संस्थानों से वापस लेने के आदेश भी जारी किए।
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अधिकारियों के अनुसार जम्मू, रामबन, उधमपुर और बारामूला जिलों के सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में वितरित इन दोनों पुस्तकों की कुल 251 प्रतियां वापस ले ली गई हैं। साथ ही पूरी खरीद और वितरण प्रक्रिया की जांच के लिए उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इनमें अपराध के लिए उकसाने, आपराधिक षड्यंत्र, भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने, वैमनस्य फैलाने तथा भ्रामक या झूठी सामग्री प्रकाशित एवं प्रसारित करने से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। इसके अतिरिक्त गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 13 भी मामले में लगाई गई है।
घटना के बाद सरकार ने केंद्र शासित प्रदेश के सभी सरकारी और मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, कोचिंग संस्थानों और सार्वजनिक पुस्तकालयों में उपलब्ध पुस्तकों, शोध प्रकाशनों, शोध प्रबंधों, डिजिटल रिपॉजिटरी और अन्य शैक्षणिक सामग्री का व्यापक ऑडिट कराने का निर्देश दिया है। यह समीक्षा इस बात की परवाह किए बिना की जाएगी कि संबंधित सामग्री कब खरीदी गई थी।
कुलपतियों, प्राचार्यों, मुख्य शिक्षा अधिकारियों, जोनल शिक्षा अधिकारियों, संस्थानों के प्रमुखों, पुस्तकालयाध्यक्षों और स्कूल प्रबंधन को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने परिसरों में उपलब्ध सभी शैक्षणिक सामग्री की जांच करें और यह सुनिश्चित करें कि तथ्यात्मक रूप से गलत, भ्रामक, अवैध अथवा आतंकवाद, हिंसक उग्रवाद, कट्टरपंथ, अलगाववाद या देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता के विरुद्ध सामग्री विद्यार्थियों की पहुंच में न रहे।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि विवादित पुस्तकें सरकारी खरीद प्रक्रिया को पार कर शैक्षणिक संस्थानों तक कैसे पहुंचीं तथा इनके प्रकाशन, अनुमोदन और वितरण में किन-किन व्यक्तियों या संस्थाओं की भूमिका रही।
