कन्नौज। उत्तर प्रदेश के कन्नौज में पुलिस ने साइबर ठगी के एक मामले में अंतरराज्यीय गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि गिरोह के सदस्य लोगों को कानूनी सहायता और अन्य बहानों से विश्वास में लेकर ठगी करते थे। जांच में सामने आया है कि गिरोह के एक सदस्य ने खुद को वकील बताकर आंध्र प्रदेश के अशोक रेड्डी से संपर्क किया और 50 लाख रुपये की ठगी के मामले में मदद दिलाने का भरोसा देकर उनसे करीब ₹1 लाख की रकम ऐंठ ली।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था और वे लोगों को अलग-अलग तरीकों से निशाना बनाते थे। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, बैंक लेनदेन और अन्य डिजिटल जानकारी के आधार पर जांच शुरू की। जांच के दौरान गिरोह के सदस्यों की पहचान हुई और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य पीड़ितों से संपर्क करने के लिए फर्जी पहचान का इस्तेमाल करते थे। आरोपी खुद को वकील या अन्य भरोसेमंद व्यक्ति बताकर लोगों को कानूनी मामलों में मदद दिलाने का आश्वासन देते थे। इसके बाद वे समस्या का समाधान कराने और कार्रवाई से बचाने के नाम पर पैसे की मांग करते थे।
आंध्र प्रदेश निवासी अशोक रेड्डी को भी इसी तरीके से निशाना बनाया गया। आरोपी ने कथित रूप से खुद को वकील बताते हुए उनसे संपर्क किया और 50 लाख रुपये की ठगी के मामले में सहायता दिलाने का भरोसा दिया। विश्वास में लेने के बाद आरोपी ने अलग-अलग बहानों से उनसे करीब ₹1 लाख की रकम ट्रांसफर करा ली।
पैसे लेने के बाद जब आरोपी ने कोई ठोस मदद नहीं की और संपर्क करने से बचने लगा, तब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद मामले की शिकायत पुलिस से की गई। पुलिस ने जांच आगे बढ़ाते हुए आरोपियों तक पहुंच बनाई और उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
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जांच में यह भी पता चला है कि गिरोह के सदस्य लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे और बाद में इन खातों का इस्तेमाल साइबर अपराध से जुड़ी रकम के लेनदेन के लिए करते थे। इन खातों से ATM और अन्य माध्यमों के जरिए पैसे निकाले जाते थे। पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजेक्शन, मोबाइल नंबर और अन्य सहयोगियों की जानकारी जुटा रही है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में साइबर ठगी के कई अन्य मामलों के खुलासा होने की संभावना है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और ठगी की रकम कहां-कहां भेजी गई।
Future Crime Research Foundation (FCRF) के अनुसार, साइबर अपराधी अब कानूनी सहायता, निवेश, नौकरी, बैंकिंग और सरकारी सेवाओं के नाम पर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे मामलों में अपराधी पहले पीड़ित का विश्वास हासिल करते हैं और फिर किसी समस्या के समाधान या राहत दिलाने का झांसा देकर पैसे ट्रांसफर कराते हैं। FCRF का कहना है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के दावों पर भरोसा करने से पहले उसकी पहचान और संबंधित जानकारी की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति फोन या ऑनलाइन माध्यम से कानूनी मदद, केस निपटाने या आर्थिक लाभ दिलाने के नाम पर पैसे मांगता है तो सतर्क रहना चाहिए। संदिग्ध लेनदेन या साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने से कार्रवाई और धन वापसी की संभावना बढ़ सकती है।
