लखनऊ/आगरा। उत्तर प्रदेश में नकली और सरकारी दवाओं की अवैध खरीद-बिक्री करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने जांच के बाद 58 मेडिकल फर्मों के लाइसेंस निरस्त कर दिए हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह रैकेट सरकारी सप्लाई की दवाओं, जीवनरक्षक दवाओं और नकली उत्पादों की तस्करी में शामिल था।
एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के निर्देश पर चलाए गए अभियान में आगरा को केंद्र बनाकर कई मेडिकल फर्मों और गोदामों की जांच की गई। विभाग की टीम अब तक कई करोड़ रुपये की संदिग्ध दवाएं जब्त कर चुकी है। जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क के तार उत्तर प्रदेश के बाहर हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और उत्तराखंड तक जुड़े हुए हैं।
आगरा में तीसरे चरण की छापेमारी, दो फर्म सील
एफएसडीए की टीम ने कार्रवाई के तीसरे चरण में आगरा की 13 मेडिकल फर्मों पर छापेमारी की। जांच के दौरान अनियमितताएं मिलने पर दो फर्मों को सील कर दिया गया, जबकि दो अन्य फर्मों की दवाओं की खरीद और बिक्री पर रोक लगा दी गई है।
विभाग ने इन फर्मों के 14 संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों ने तीन अलग-अलग थानों में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए तहरीर दी है। जांच एजेंसियां अब इन फर्मों के वित्तीय लेनदेन, सप्लाई चेन और जुड़े हुए लोगों की जानकारी जुटा रही हैं।
करोड़ों रुपये की दवाएं और फर्जी सामग्री बरामद
एफएसडीए की टीम इससे पहले दो चरणों में भी बड़ी कार्रवाई कर चुकी है। आगरा में की गई छापेमारी के दौरान करीब ₹3.72 करोड़ रुपये मूल्य की दवाएं सीज की गई थीं और चार गोदामों को सील किया गया था। इस मामले में अब तक कुल छह प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं।
जांच के दौरान मई महीने में ज्योति ड्रग हाउस से करीब ₹2.50 करोड़ रुपये मूल्य की इंसुलिन, वैक्सीन और सैन्य-एनएसआई अस्पताल में इस्तेमाल होने वाली दवाएं बरामद की गई थीं। अधिकारियों के अनुसार, इन दवाओं की सप्लाई और वैधता की जांच के बाद कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
इसके अलावा एक अन्य मेडिकल एजेंसी से करीब ₹50 लाख रुपये की नकली ऑक्सीजन डीपी जब्त की गई थी। उत्तराखंड के रुड़की में हुई कार्रवाई के दौरान नकली पैकेजिंग सामग्री भी बरामद हुई थी, जिससे आशंका जताई गई कि दवाओं की पैकिंग और लेबल बदलने का काम बड़े स्तर पर किया जा रहा था।
सरकारी दवाओं की री-लेबलिंग का खुलासा
जून महीने में ब्राइट फार्मा के संचालक के ठिकाने पर जांच के दौरान करीब ₹5.20 लाख रुपये मूल्य की सरकारी और जीवनरक्षक दवाओं की अवैध री-लेबलिंग का मामला सामने आया था। इसके अलावा सुमित गुप्ता और सीएफ एंटरप्राइजेज के गोदामों से करीब ₹67 लाख रुपये की अवैध दवाएं और फिजिशियन सैंपल बरामद किए गए थे।
एफएसडीए अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी सरकारी आपूर्ति वाली दवाओं को गलत तरीके से बाजार में बेचने और उनकी पहचान बदलने का प्रयास कर रहे थे। इससे न केवल सरकारी व्यवस्था को नुकसान पहुंच रहा था, बल्कि मरीजों की जिंदगी भी खतरे में पड़ रही थी।
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कई राज्यों तक फैला नेटवर्क, जांच जारी
जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क केवल आगरा तक सीमित नहीं था। इसके संपर्क हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और उत्तराखंड तक मिले हैं। विभाग अब इस पूरे सप्लाई नेटवर्क की जांच कर रहा है और यह पता लगाया जा रहा है कि नकली दवाएं कहां से तैयार होती थीं और किन माध्यमों से बाजार तक पहुंचाई जाती थीं।
सहायक आयुक्त औषधि अतुल उपाध्याय ने बताया कि नकली और घटिया दवाओं का असर मरीजों के इलाज पर पड़ता है। ऐसी दवाएं बीमारी को नियंत्रित करने में असफल रहती हैं, जिससे मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है। खासकर एंटीबायोटिक दवाओं में मिलावट होने से इलाज की प्रक्रिया प्रभावित होती है और मरीजों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि उन्हें नकली या संदिग्ध दवाओं की बिक्री की जानकारी मिलती है तो वे इसकी शिकायत हेल्पलाइन नंबर 18001805533 पर करें। एफएसडीए ने स्पष्ट किया है कि नकली दवाओं के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
