लखनऊ (उत्तर प्रदेश): भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की करेंसी चेस्ट में पिछले छह वर्षों के दौरान करीब ₹1.80 लाख मूल्य के जाली नोट पकड़े गए हैं। वर्ष 2020 से 2026 के बीच सामने आए इन मामलों में सबसे अधिक संख्या 20 रुपये और 50 रुपये के नकली नोटों की बताई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार कम मूल्य वाले नोटों को आम लेनदेन में आसानी से खपाने की कोशिश की जाती है, क्योंकि कई बार लोग इनकी बारीकी से जांच नहीं करते। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि नकली नोटों की आपूर्ति कहां से हो रही है और इसके पीछे कौन लोग सक्रिय हैं।
आरबीआई के तत्कालीन असिस्टेंट मैनेजर सुरेंद्र कुमार दुबे की ओर से 26 मई को महानगर थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर में जाली नोटों से जुड़े मामलों की जानकारी दी गई है। एफआईआर के अनुसार अप्रैल में 100 रुपये के नकली नोट और फरवरी 2026 में 4000 रुपये मूल्य के जाली नोट करेंसी चेस्ट में मिले थे। बरामद नोटों को जांच के लिए संबंधित प्रिंटिंग प्रेस और फोरेंसिक लैब भेजा गया है, ताकि उनकी गुणवत्ता, छपाई तकनीक और संभावित स्रोत का पता लगाया जा सके।
आरबीआई की ओर से हर साल ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज कराई जाती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 में 11, 2021 में 10, 2022 में 11, 2023 में 10, 2024 में 8, 2025 में 10 और 2026 में अब तक 4 एफआईआर दर्ज की गई हैं। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि जाली नोटों के मामलों में अक्सर जांच लंबी चलती है, क्योंकि नकली नोटों की सप्लाई चेन तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण होता है।
जांच में सामने आया है कि जालसाज छोटे मूल्य के नोटों को अधिक निशाना बनाते हैं। 20 रुपये और 50 रुपये के नोटों में आम लोगों द्वारा कम सतर्कता बरतने का फायदा उठाकर इन्हें बाजार में चलाने की कोशिश की जाती है। कई बार नकली नोट इतने समान दिखाई देते हैं कि सामान्य जांच में पहचान करना मुश्किल हो जाता है। कुछ मामलों में बैंक काउंटिंग मशीनों से भी शुरुआती स्तर पर ऐसे नोट पकड़ में नहीं आते, जिसके बाद विशेषज्ञ जांच की जरूरत पड़ती है।
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महानगर थाने के इंस्पेक्टर अखिलेश मिश्रा ने बताया कि पुलिस लगातार मामलों की जांच कर रही है। बरामद नकली नोटों को फोरेंसिक लैब और प्रिंटिंग प्रेस भेजकर उनकी जांच कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि नकली नोटों के नेटवर्क और इसके पीछे जुड़े लोगों तक पहुंचने के लिए सभी उपलब्ध साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है और जल्द आरोपियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आम लोगों को नोट लेते समय उसकी सुरक्षा विशेषताओं की जांच करनी चाहिए। असली नोट को रोशनी के सामने देखने पर उसके खाली सफेद हिस्से में महात्मा गांधी की धुंधली तस्वीर और नोट का मूल्य दिखाई देता है। असली नोट का कागज सामान्य कागज से अलग होता है और उसमें महात्मा गांधी की तस्वीर, अशोक स्तंभ तथा गवर्नर के हस्ताक्षर जैसे कुछ हिस्से उभरे हुए महसूस किए जा सकते हैं।
इसके अलावा नोट के बाईं ओर नीचे बने छोटे डिजाइन को रोशनी के सामने देखने पर उसमें नोट का मूल्य स्पष्ट दिखाई देता है। नोट को हल्का झुकाने पर सुरक्षा धागे में बदलाव भी असली नोट की पहचान में मदद करता है। दृष्टिबाधित लोगों की सुविधा के लिए 100, 200 और 500 रुपये के नोटों में किनारों पर उभरी हुई तिरछी लाइनें भी बनाई गई हैं।
आरबीआई और पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को नकली नोट मिलता है या कोई उसे बाजार में चलाने की कोशिश करता दिखाई देता है तो इसकी सूचना तुरंत नजदीकी पुलिस थाने को दें। इसके बाद संबंधित बैंक और आरबीआई को भी जानकारी दी जा सकती है। अधिकारियों का कहना है कि समय पर सूचना मिलने से नकली नोटों के नेटवर्क पर कार्रवाई करने में मदद मिलती है।
