नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब केवल कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ाने का उपकरण नहीं रह गया है, बल्कि कई वैश्विक कंपनियों में यह सीधे मानव कर्मचारियों की जगह लेने लगा है। माइक्रोसॉफ्ट, उबर, कॉमनवेल्थ बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (CBA) और हयात होटल्स जैसी कंपनियां ग्राहक सेवा (कस्टमर सर्विस) के बड़े हिस्से को AI आधारित चैटबॉट और वॉयस सिस्टम के हवाले कर रही हैं। इसके चलते हजारों ग्राहक सेवा कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित हुई हैं और विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह बदलाव और तेज हो सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, कॉल सेंटर उद्योग लंबे समय से ऑटोमेशन के खतरे का सामना कर रहा था, लेकिन हाल के वर्षों में जनरेटिव AI की क्षमताओं में तेज सुधार के बाद कंपनियों ने इसे बड़े पैमाने पर अपनाना शुरू कर दिया है। अब AI सिस्टम ग्राहकों के सवालों के जवाब देने, शिकायतें दर्ज करने, भुगतान संबंधी जानकारी देने, टिकट बुकिंग और कई अन्य नियमित कार्य बिना मानवीय हस्तक्षेप के करने में सक्षम हो गए हैं।
इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण लागत में कमी और तेजी से सेवा उपलब्ध कराना बताया जा रहा है। कई टेक कंपनियों के सेल्स अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि वे ग्राहकों को AI समाधान इस आधार पर बेच रहे हैं कि इससे श्रम लागत कम होगी। यह दावा उस धारणा से अलग है जिसमें कहा जाता था कि AI केवल कर्मचारियों की मदद करेगा, उनकी जगह नहीं लेगा।
उबर ने हाल ही में अपने कस्टमर सर्विस विभाग, जिसे कंपनी “कम्युनिटी ऑपरेशंस” कहती है, में लगभग 10% कर्मचारियों की छंटनी की। कंपनी ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि AI के बढ़ते उपयोग ने इस निर्णय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साथ ही कई कर्मचारियों को कार्यालय से काम करने के लिए भी वापस बुलाया गया है ताकि AI आधारित कार्यप्रणालियों को बेहतर तरीके से लागू किया जा सके।
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कॉमनवेल्थ बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया, माइक्रोसॉफ्ट और हयात होटल्स सहित कई अन्य कंपनियां भी ग्राहक सेवा के बड़े हिस्से को AI प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित कर चुकी हैं। इन कंपनियों का कहना है कि AI साधारण और दोहराए जाने वाले प्रश्नों का उत्तर तेजी से दे सकता है, जिससे मानव कर्मचारी अधिक जटिल मामलों पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। हालांकि कई मामलों में AI अपनाने के साथ ग्राहक सेवा विभागों में कर्मचारियों की संख्या भी घटाई गई है।
इस बदलाव का सबसे अधिक असर भारत और फिलीपींस जैसे देशों पर पड़ सकता है, जहां लाखों लोग वैश्विक कंपनियों के लिए कॉल सेंटर और बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (BPO) सेवाओं में कार्यरत हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि AI आधारित ग्राहक सेवा प्रणाली का विस्तार इसी गति से जारी रहा, तो शुरुआती स्तर की ग्राहक सेवा नौकरियों की मांग धीरे-धीरे कम हो सकती है। इसके साथ ही AI सिस्टम की निगरानी, प्रशिक्षण, डेटा विश्लेषण और जटिल ग्राहक मामलों को संभालने जैसी नई भूमिकाओं की मांग बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि AI कार्यस्थलों की संरचना बदल रहा है। उनका मानना है कि संगठनों और कर्मचारियों दोनों को तेजी से बदलती तकनीक के अनुरूप नए कौशल विकसित करने होंगे। विशेष रूप से ग्राहक सेवा क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों के लिए AI टूल्स, डेटा प्रबंधन, डिजिटल संचार और समस्या समाधान जैसी क्षमताएं भविष्य में रोजगार बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण होंगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, AI का विस्तार पूरी तरह मानव कर्मचारियों का विकल्प नहीं बनेगा, लेकिन यह निश्चित रूप से कार्यों की प्रकृति बदल देगा। कंपनियां लागत घटाने और दक्षता बढ़ाने के लिए AI में निवेश जारी रखेंगी, जबकि कर्मचारियों को नई तकनीकों के अनुरूप स्वयं को तैयार करना होगा। आने वाले वर्षों में ग्राहक सेवा उद्योग में मानव और AI के संयुक्त मॉडल के अधिक व्यापक होने की संभावना जताई जा रही है।
