नई दिल्ली। वैश्विक वित्तीय व्यवस्था तेजी से ऐसे डिजिटल ढांचे की ओर बढ़ रही है, जहां विभिन्न प्रकार की परिसंपत्तियों को टोकन के रूप में प्रस्तुत कर उनका हस्तांतरण और लेनदेन किया जा सके। ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में इंफोसिस के सह-संस्थापक और चेयरमैन नंदन नीलेकणि ने टोकनाइजेशन को वित्तीय क्षेत्र में आने वाले बड़े बदलावों में से एक बताते हुए ‘फिननेट’ की अवधारणा को विस्तार से समझाया। उनके मुताबिक, यह मॉडल अलग-अलग परिसंपत्ति वर्गों और वित्तीय उपयोगों को एक साझा तकनीकी ढांचे से जोड़ने की दिशा में काम कर सकता है।
टोकनाइजेशन के तहत किसी वास्तविक या वित्तीय परिसंपत्ति के अधिकार अथवा उसके प्रतिनिधित्व को डिजिटल टोकन के रूप में दर्ज किया जाता है। इससे परिसंपत्ति के स्वामित्व, हस्तांतरण और उससे जुड़े लेनदेन को डिजिटल माध्यम से संचालित करने की संभावनाएं बढ़ती हैं। नीलेकणि ने कहा कि दुनिया के बड़े वित्तीय संस्थानों के बीच टोकनाइज्ड परिसंपत्तियों का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है और यह तकनीक अब केवल प्रयोगशाला या सीमित परियोजनाओं तक सीमित नहीं रह गई है।
उन्होंने तीन ऐसे पायलटों का उल्लेख किया, जो अलग-अलग क्षेत्रों में टोकनाइजेशन के व्यावहारिक इस्तेमाल को परख रहे हैं। इनमें डेयरी क्षेत्र, वेयरहाउस रसीद और परिसंपत्ति प्रतिभूतिकरण शामिल हैं। इन तीनों क्षेत्रों की जरूरतें अलग हैं, लेकिन इनके लिए एक साझा तकनीकी वास्तुकला विकसित करने का प्रयास यह दिखाता है कि टोकनाइजेशन को किसी एक खास परिसंपत्ति तक सीमित रखने के बजाय कई क्षेत्रों में लागू किया जा सकता है।
डेयरी क्षेत्र से जुड़े पायलट में वास्तविक आर्थिक गतिविधियों और डिजिटल वित्तीय ढांचे के बीच संपर्क स्थापित करने की संभावना पर काम हो रहा है। इसी तरह, वेयरहाउस रसीद को डिजिटल टोकन के रूप में दर्ज करने से गोदामों में रखी वस्तुओं से जुड़े अधिकारों और उनके आधार पर होने वाले वित्तीय लेनदेन को अधिक सुव्यवस्थित बनाने का रास्ता खुल सकता है। परिसंपत्ति प्रतिभूतिकरण में टोकनाइजेशन के जरिये विभिन्न वित्तीय परिसंपत्तियों को डिजिटल रूप में संरचित करने और उनके लेनदेन को अधिक कुशल बनाने की संभावना है।
नीलेकणि के दृष्टिकोण में सबसे महत्वपूर्ण बात साझा तकनीकी ढांचा है। इसका उद्देश्य प्रत्येक परिसंपत्ति वर्ग के लिए अलग-अलग प्रणाली बनाने के बजाय ऐसी आधारभूत संरचना तैयार करना है, जिसे अलग-अलग वित्तीय उपयोगों में इस्तेमाल किया जा सके। इससे नए टोकनाइजेशन प्रयोग शुरू करने में लगने वाली तकनीकी जटिलता और समय को कम किया जा सकता है। साथ ही, विभिन्न परिसंपत्तियों और वित्तीय सेवाओं के बीच बेहतर डिजिटल संपर्क स्थापित किया जा सकता है।
इस मॉडल में सार्वजनिक ब्लॉकचेन आधारित बुनियादी ढांचे के इस्तेमाल पर भी जोर है। सार्वजनिक श्रृंखला आधारित व्यवस्था का उद्देश्य डिजिटल परिसंपत्तियों और उनके लेनदेन के लिए ऐसी संरचना उपलब्ध कराना है, जिसे बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा सके। हालांकि, वित्तीय क्षेत्र में इसके व्यापक इस्तेमाल के लिए गति, सुरक्षा, विश्वसनीयता और नियामकीय जरूरतों को एक साथ पूरा करना जरूरी होगा।
प्रस्तावित ढांचे को उच्च मात्रा में लेनदेन संभालने के लिए भी तैयार किया गया है। टोकनाइजेशन का वास्तविक प्रभाव तभी व्यापक हो सकता है, जब यह सीमित संस्थागत प्रयोगों से निकलकर बड़ी आबादी और करोड़ों उपयोगकर्ताओं तक पहुंच सके। इसके लिए ऐसी तकनीक जरूरी होगी जो एक साथ बड़ी संख्या में लेनदेन को सुरक्षित तरीके से संभाल सके और अलग-अलग परिसंपत्ति वर्गों के अनुरूप काम कर सके।
तकनीकी व्यवस्था में प्रोग्राम योग्य हस्तांतरण की सुविधा भी शामिल है। इसके जरिये किसी डिजिटल परिसंपत्ति या धन के हस्तांतरण से जुड़ी पूर्व निर्धारित शर्तों को तकनीकी स्तर पर लागू किया जा सकता है। इससे कुछ वित्तीय प्रक्रियाओं में स्वचालन बढ़ सकता है और अनुबंधों या परिसंपत्ति हस्तांतरण से जुड़े काम अधिक व्यवस्थित तरीके से पूरे किए जा सकते हैं।
साइबर सुरक्षा को भी इस मॉडल का अहम हिस्सा बनाया गया है। वित्तीय परिसंपत्तियों के डिजिटल रूपांतरण के साथ अनधिकृत पहुंच, धोखाधड़ी और डेटा सुरक्षा जैसे जोखिम बढ़ सकते हैं। इसलिए प्रस्तावित ढांचे में सुरक्षा संबंधी क्षमताओं के साथ क्वांटम-सुरक्षा की तैयारी को भी शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य भविष्य में अधिक शक्तिशाली कंप्यूटिंग तकनीकों से पैदा होने वाली संभावित चुनौतियों के सामने वित्तीय ढांचे को सुरक्षित रखना है।
नीलेकणि के मुताबिक, साझा, सुरक्षित और विस्तार योग्य तकनीकी ढांचा टोकनाइजेशन को बड़े पैमाने पर अपनाने की गति बढ़ा सकता है। ‘फिननेट’ की अवधारणा इसी दिशा में एक ऐसी डिजिटल वित्तीय व्यवस्था की कल्पना करती है, जिसमें अलग-अलग परिसंपत्तियां, वित्तीय संस्थान और उपयोगकर्ता अधिक परस्पर जुड़े तरीके से काम कर सकें।
ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में सामने आया यह मॉडल संकेत देता है कि वित्तीय क्षेत्र में अगला बड़ा बदलाव केवल डिजिटल भुगतान तक सीमित नहीं होगा। परिसंपत्तियों का डिजिटल प्रतिनिधित्व, प्रोग्राम योग्य लेनदेन और साझा तकनीकी ढांचे आने वाले वर्षों में वित्तीय सेवाओं की संरचना को प्रभावित कर सकते हैं। डेयरी से लेकर वेयरहाउस रसीद और प्रतिभूतिकरण तक चल रहे पायलट इस बात की शुरुआती तस्वीर पेश कर रहे हैं कि टोकनाइजेशन को वास्तविक अर्थव्यवस्था से जोड़कर किस तरह बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
