चेन्नई: तमिलनाडु में करीब ₹100 करोड़ मूल्य की पलानी धंडायुथपानी स्वामीगल मठ की 1.40 एकड़ भूमि के कथित फर्जी पंजीकरण मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। राज्य की अपराध शाखा-आपराधिक जांच विभाग (CB-CID) ने मामले में पंजीकरण विभाग के दो और अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। ताजा कार्रवाई के बाद इस प्रकरण में निलंबित अधिकारियों की संख्या बढ़कर चार हो गई है। जांच एजेंसी अब यह भी पता लगा रही है कि क्या इसी प्रकार की अनियमितताएं अन्य उप-पंजीयक कार्यालयों में भी की गई थीं।
सीबी-सीआईडी ने पलानी उप-पंजीयक कार्यालय के उप-पंजीयक बालाचंदर और कार्यालय सहायक शिवशंकरी को जांच में सामने आए नए तथ्यों के आधार पर निलंबित किया है। इससे पहले डिंडीगुल की जिला पंजीयक ससिकला और पूर्व पलानी उप-पंजीयक जस्टिन मणिकंदन के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की जा चुकी है। जस्टिन मणिकंदन को इस मामले में आरोपी बनाया गया है, जबकि विवादित बिक्री विलेख को न्यायालय के आदेश के बाद पहले ही रद्द किया जा चुका है।
जांच अधिकारियों के अनुसार बालाचंदर को जून के पहले सप्ताह में तिरुप्पुर से पलानी उप-पंजीयक कार्यालय में स्थानांतरित किया गया था। उन्होंने मठ की भूमि के पंजीकरण के दौरान दस्तावेजों पर आपत्ति उठाते हुए प्रक्रिया को लंबित रखा था। हालांकि, उनके अवकाश पर रहने के दौरान अस्थायी रूप से कार्यालय का कार्यभार संभाल रहे जस्टिन मणिकंदन ने कथित रूप से आवश्यक दस्तावेजों की अनिवार्य जांच किए बिना ही बिक्री विलेख का पंजीकरण कर दिया।
सीबी-सीआईडी को संदेह है कि बालाचंदर ने ड्यूटी पर लौटने के बाद कथित अवैध पंजीकरण की जानकारी होने के बावजूद इसकी सूचना उच्च अधिकारियों को नहीं दी और महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाए रखा। इसी प्रकार कार्यालय सहायक शिवशंकरी पर भी कथित अनियमितताओं को दबाने और प्रक्रिया में सहयोग करने के आरोप हैं। इन्हीं आरोपों के आधार पर दोनों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
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जांच एजेंसी 27 जुलाई से जस्टिन मणिकंदन से लगातार पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि यह मामला केवल एक भूमि पंजीकरण तक सीमित नहीं हो सकता। जांच अब इस दिशा में भी आगे बढ़ रही है कि क्या मणिकंदन ने अपने कार्यकाल के दौरान 10 से अधिक अन्य उप-पंजीयक कार्यालयों में भी इसी तरह के कथित फर्जी भूमि पंजीकरण किए थे। यदि ऐसा पाया जाता है तो मामले का दायरा और अधिक विस्तृत हो सकता है।
अब तक इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, जस्टिन मणिकंदन को मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ से मिली अंतरिम गिरफ्तारी संरक्षण की अवधि मंगलवार को समाप्त हो रही है। इसके बाद सीबी-सीआईडी उनके खिलाफ गिरफ्तारी सहित आगे की कानूनी कार्रवाई पर निर्णय ले सकती है। जांच एजेंसी संबंधित दस्तावेजों, पंजीकरण प्रक्रिया और कथित रूप से शामिल अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी गहन जांच कर रही है।
अधिकारियों के अनुसार इस पूरे प्रकरण में विभागीय प्रक्रियाओं का पालन किया गया या नहीं, दस्तावेजों की सत्यता की जांच किस स्तर तक हुई और किन अधिकारियों ने कथित अनियमितताओं को नजरअंदाज किया, इन सभी पहलुओं की विस्तार से पड़ताल की जा रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कथित फर्जी पंजीकरण के पीछे किसी संगठित नेटवर्क या प्रभावशाली व्यक्तियों की भूमिका तो नहीं थी।
भूमि पंजीकरण से जुड़े मामलों के जानकारों का कहना है कि धार्मिक संस्थानों और सार्वजनिक ट्रस्टों की संपत्तियों के पंजीकरण में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का कड़ाई से पालन आवश्यक होता है। किसी भी स्तर पर दस्तावेजों के सत्यापन में लापरवाही या नियमों की अनदेखी से बड़े पैमाने पर संपत्ति विवाद और वित्तीय नुकसान की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ऐसे मामलों में समयबद्ध जांच, जवाबदेही तय करना और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सार्वजनिक संस्थानों की संपत्तियों की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
