चेन्नई: तमिलनाडु के चेन्नई स्थित अवाडी भारतीय वायुसेना प्रशिक्षण केंद्र में आयोजित एयरफोर्स क्लर्क (अग्निवीर) भर्ती परीक्षा के दौरान एक कथित अंतरराज्यीय परीक्षा धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। भारतीय वायुसेना के अधिकारियों और स्थानीय पुलिस की सतर्कता से हरियाणा के चार युवकों को गिरफ्तार किया गया, जिन पर दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने और अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मदद से नकल करने का आरोप है। प्रारंभिक जांच से संकेत मिले हैं कि गिरोह भर्ती परीक्षाओं में प्रॉक्सी उम्मीदवार और गुप्त संचार उपकरणों का इस्तेमाल कर संगठित तरीके से धोखाधड़ी को अंजाम देता था। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क, इसके संचालकों और वास्तविक अभ्यर्थियों की भूमिका की जांच कर रही है।
पुलिस के अनुसार रविवार को आयोजित लिखित परीक्षा में देशभर से लगभग 1,800 अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था, जबकि भर्ती केवल चार क्लर्क (अग्निवीर) पदों के लिए की जा रही थी। परीक्षा केंद्र पर प्रवेश के दौरान नियमित दस्तावेज और प्रवेश पत्र सत्यापन के समय अधिकारियों को एक अभ्यर्थी के एडमिट कार्ड पर लगी तस्वीर और परीक्षा देने पहुंचे व्यक्ति के चेहरे में स्पष्ट अंतर दिखाई दिया। संदेह होने पर उसे तुरंत रोककर पूछताछ की गई, जिससे पूरे मामले का खुलासा शुरू हुआ।
जांच में पता चला कि गिरफ्तार युवक गौरव (21), हरियाणा के जींद जिले के थुआ गांव का निवासी है और वह कथित रूप से वास्तविक अभ्यर्थी अमन कुमार के स्थान पर परीक्षा दे रहा था। उसे हिरासत में लेने के बाद अधिकारी उस स्थान पर पहुंचे जहां वह अन्य अभ्यर्थियों के साथ ठहरा हुआ था। वहां रखे बैग और अन्य सामान की जांच के दौरान तीन अन्य संदिग्धों की गतिविधियां भी संदेहास्पद मिलीं, जिसके बाद विस्तृत तलाशी ली गई।
आगे की जांच में पुलिस ने दूसरे कथित प्रॉक्सी अभ्यर्थी अनिल (27), निवासी छत्तर गांव, जींद को भी पकड़ा। आरोप है कि वह वास्तविक अभ्यर्थी सुनील के स्थान पर परीक्षा देने पहुंचा था। वहीं, दो अन्य आरोपी सावन (25) और दीपक (24), दोनों हरियाणा के जींद जिले के निवासी, कथित रूप से अत्यंत छोटे SIM-आधारित GSM संचार उपकरणों का उपयोग करते पाए गए। पुलिस के अनुसार ये उपकरण कान के भीतर इस तरह छिपाए गए थे कि सामान्य जांच में उनका पता लगाना कठिन था।
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अधिकारियों ने बताया कि ये विशेष GSM डिवाइस केवल आने वाली कॉल प्राप्त करने के लिए डिजाइन किए गए थे। इनके माध्यम से परीक्षा केंद्र के बाहर मौजूद कोई व्यक्ति फोन पर प्रश्नों के उत्तर बता सकता था। भारतीय वायुसेना के अधिकारियों ने परीक्षा केंद्र पर सिग्नल जैमर सक्रिय किया, जिससे संचार बाधित हो गया और आरोपियों द्वारा उपयोग किए जा रहे गुप्त उपकरणों का पता चल गया। इसके बाद चारों आरोपियों को मुथापुडुपेट पुलिस के हवाले कर दिया गया।
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कथित रूप से स्वीकार किया कि उन्हें दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने के लिए अग्रिम भुगतान के रूप में ₹50,000 दिए गए थे। पुलिस अब उन वास्तविक अभ्यर्थियों की तलाश कर रही है जिनके स्थान पर ये युवक परीक्षा देने पहुंचे थे। जांच के दौरान पुलिस ने एक ब्लूटूथ ड्यूल-सिम GSM बॉक्स, एक ब्लूटूथ ईयरपीस, आठ मोबाइल फोन और दस सिम कार्ड बरामद किए हैं। जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की डिजिटल एवं फॉरेंसिक जांच कर यह पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह का संबंध अन्य भर्ती परीक्षाओं से भी है या नहीं।
भारतीय वायुसेना के एक अधिकारी की शिकायत के आधार पर मुथापुडुपेट पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 319(2) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 62 और 66D के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का मानना है कि यह एक संगठित परीक्षा धोखाधड़ी नेटवर्क हो सकता है, जिसमें प्रॉक्सी अभ्यर्थियों, तकनीकी सहायता देने वाले लोगों और वास्तविक उम्मीदवारों के बीच समन्वय स्थापित किया गया था।
A Researcher at Algoritha Security ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में ब्लूटूथ ईयरपीस, GSM संचार उपकरण और अन्य छिपे हुए इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का उपयोग परीक्षा सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि बायोमेट्रिक सत्यापन, AI-आधारित पहचान मिलान, RF सिग्नल डिटेक्शन, सिग्नल जैमर और डिजिटल फॉरेंसिक विश्लेषण जैसी तकनीकों का व्यापक उपयोग ऐसे संगठित परीक्षा धोखाधड़ी नेटवर्क का समय रहते पता लगाने और उन्हें रोकने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
